एक संत ने बहुत सुंदर उदाहरण दिया। वे कहते थे कि अगर किसी चींटी को हरिद्वार से ऋषिकेश खुद जाना हो, तो उसे तीन-चार जन्म लग सकते हैं। लेकिन अगर वही चींटी किसी इंसान के कपड़ों पर चढ़ जाए, तो वह तीन-चार घंटों में अपनी मंज़िल तक पहुँच सकती है।
इसी तरह, अगर हम परमपिता परमेश्वर से मिलना ही चाहते हैं, तो हमें कभी भी अपने गुरु का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। ये गुरु ही हमें सही रास्ता दिखाते हैं और पापों के सागर को पार करने में हमारी मदद करते हैं, तथा उस परमात्मा को पाने का सही मार्ग दिखाते हैं।
आइए हम सब अपने दिलों में प्यार रखें, नफ़रत को दूर करें और सभी धर्मों का सम्मान करें। हर इंसान को प्यार, शांति और सम्मान मिले। धन्यवाद।
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