Shri Krishna Bhajan
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अजितनाथ (Ajitanatha)


अजितनाथ
भक्तमाल: अजितनाथ
अन्य नाम - अजीत, अजिता
शिष्य - 90 गणधर, सिंहसेना
आराध्य - जैन धर्म
आयु: 72 लाख पूर्व
जन्म स्थान - अयोध्या
निर्वाण स्थान: सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ पर्वत)
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता - राजा जितशत्रु
माता - रानी विजयमाता
प्रसिद्ध - जैन धर्म के द्वितीय तीर्थंकर
राजवंश: इक्ष्वाकुवंश
प्रतीक (लंछना): हाथी
पवित्र वृक्ष: साला वृक्ष
यक्ष-यक्षिणीः महासेना-अजितः
अजितनाथ, जिन्हें भगवान अजितनाथ के नाम से भी जाना जाता है, जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर हैं। उनका जन्म अयोध्या में राजा जितशत्रु और रानी विजयमाता के घर हुआ था। उनके नाम अजिता का अर्थ है "अपराजित", जो आंतरिक जुनून पर विजय का प्रतीक है।

भगवान अजितनाथ ने अहिंसा, आत्म-अनुशासन और वैराग्य का मार्ग सिखाया। उनका जीवन इस बात पर बल देता है कि सच्ची विजय संसार पर नहीं, बल्कि इच्छा, क्रोध, अहंकार और लोभ पर विजय है।

स्वयं पर विजय ही सबसे बड़ी विजय है!

Ajitanatha in English

Ajitanatha, also known as Bhagwan Ajitnath, is the second Tirthankara of Jainism.
यह भी जानें

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