भक्तमाल: ऋषि वशिष्ठ
अन्य नाम - ब्रह्मर्षि, अरुंधति नाथ
आराध्य - भगवान शिव
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता, माता - ब्रह्मा (मानस पुत्र), मित्र-वरुण और उर्वशी
पत्नी - अरुंधति
बच्चे - महर्षि शक्ति, कल्माषपाद, व्याघ्रपाद
पोते - महर्षि पराशर
प्रसिद्ध - सप्तऋषि
ऋषि वशिष्ठ भारतीय परंपरा में सबसे प्रतिष्ठित संतों में से एक हैं और सप्तर्षियों (सात महान ऋषियों) में एक प्रमुख ऋषि हैं।
हिंदू परंपरा में ऋषि वशिष्ठ का महत्व
❀ महाकाव्य रामायण में वशिष्ठ भगवान राम के गुरु (आध्यात्मिक शिक्षक) थे।
❀ वे इक्ष्वाकु वंश (भगवान राम के वंशज) के राजपुजारी थे।
❀ उन्हें ब्रह्मा के मानस पुत्रों में से एक माना जाता है।
ऋषि वशिष्ठ ऋग्वेद से जुड़े हैं, जहाँ अनेक भजन उनसे संबंधित हैं
❀ वास्तविकता और माया
❀ मन और चेतना
❀ मोक्ष
❀ ऋषि वशिष्ठ और उनकी पत्नी अरुंधती, वशिष्ठ-अरुंधती की जोड़ी को आकाश में (सप्तऋषि नक्षत्र के निकट) एक दोहरे तारे के रूप में दर्शाया गया है और हिंदू विवाहों के दौरान पारंपरिक रूप से इसे दिखाया जाता है।
❀ वशिष्ठ के पास कामधेनु था, जो मनोकामना पूरी कर सकता था। यह भौतिक धन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति से प्रचुरता का प्रतीक है।
ऋषि वशिष्ठ की शिक्षाएँ और दर्शन
❀ मन बंधन और मुक्ति दोनों उत्पन्न करता है
❀ सच्चा ज्ञान दुखों से मुक्ति की ओर ले जाता है
❀ वैराग्य, आत्म-जांच और ध्यान पर बल
ऋषि वशिष्ठ का आध्यात्मिक महत्व
❀ ब्रह्म-ज्ञान (परम ज्ञान) का प्रतिनिधित्व करते हैं
❀ शांति, ज्ञान और दिव्य अधिकार के प्रतीक हैं
❀ सत्य और ज्ञान की खोज करने वालों के लिए मार्गदर्शक
जानिए
ऋषि कश्यप और
ऋषि अत्रि।