सीता नवमी | वट सावित्री व्रत | आज का भजन! | भक्ति भारत को फेसबुक पर फॉलो करें!

श्री झूलेलाल चालीसा


॥ दोहा ॥
जय जय जल देवता, जय ज्योति स्वरूप।
अमर उडेरो लाल जय, झुलेलाल अनूप॥

॥ चौपाई ॥
रतनलाल रतनाणी नंदन। जयति देवकी सुत जग वंदन॥
दरियाशाह वरुण अवतारी। जय जय लाल साईं सुखकारी॥
जय जय होय धर्म की भीरा। जिन्दा पीर हरे जन पीरा॥

संवत दस सौ सात मंझरा। चैत्र शुक्ल द्वितिया भगऊ वारा॥
ग्राम नसरपुर सिंध प्रदेशा। प्रभु अवतरे हरे जन कलेशा॥

सिन्धु वीर ठट्ठा राजधानी। मिरखशाह नऊप अति अभिमानी॥
कपटी कुटिल क्रूर कूविचारी। यवन मलिन मन अत्याचारी॥

धर्मान्तरण करे सब केरा। दुखी हुए जन कष्ट घनेरा॥
पिटवाया हाकिम ढिंढोरा। हो इस्लाम धर्म चाहुँओरा॥

सिन्धी प्रजा बहुत घबराई। इष्ट देव को टेर लगाई॥
वरुण देव पूजे बहुंभाती। बिन जल अन्न गए दिन राती॥

सिन्धी तीर सब दिन चालीसा। घर घर ध्यान लगाये ईशा॥
गरज उठा नद सिन्धु सहसा। चारो और उठा नव हरषा॥

वरुणदेव ने सुनी पुकारा। प्रकटे वरुण मीन असवारा॥
दिव्य पुरुष जल ब्रह्मा स्वरुपा। कर पुष्तक नवरूप अनूपा॥

हर्षित हुए सकल नर नारी। वरुणदेव की महिमा न्यारी॥
जय जय कार उठी चाहुँओरा। गई रात आने को भौंरा॥

मिरखशाह नऊप अत्याचारी। नष्ट करूँगा शक्ति सारी॥
दूर अधर्म, हरण भू भारा। शीघ्र नसरपुर में अवतारा॥

रतनराय रातनाणी आँगन। खेलूँगा, आऊँगा शिशु बन॥
रतनराय घर ख़ुशी आई। झुलेलाल अवतारे सब देय बधाई॥
घर घर मंगल गीत सुहाए। झुलेलाल हरन दुःख आए॥
मिरखशाह तक चर्चा आई। भेजा मंत्री क्रोध अधिकाई॥
मंत्री ने जब बाल निहारा। धीरज गया हृदय का सारा॥

देखि मंत्री साईं की लीला। अधिक विचित्र विमोहन शीला॥
बालक धीखा युवा सेनानी। देखा मंत्री बुद्धि चाकरानी॥

योद्धा रूप दिखे भगवाना। मंत्री हुआ विगत अभिमाना॥
झुलेलाल दिया आदेशा। जा तव नऊपति कहो संदेशा॥

मिरखशाह नऊप तजे गुमाना। हिन्दू मुस्लिम एक समाना॥
बंद करो नित्य अत्याचारा। त्यागो धर्मान्तरण विचारा॥

लेकिन मिरखशाह अभिमानी। वरुणदेव की बात न मानी॥
एक दिवस हो अश्व सवारा। झुलेलाल गए दरबारा॥

मिरखशाह नऊप ने आज्ञा दी। झुलेलाल बनाओ बन्दी॥

किया स्वरुप वरुण का धारण। चारो और हुआ जल प्लावन॥
दरबारी डूबे उतराये। नऊप के होश ठिकाने आये॥

नऊप तब पड़ा चरण में आई। जय जय धन्य जय साईं॥
वापिस लिया नऊपति आदेशा। दूर दूर सब जन क्लेशा॥
संवत दस सौ बीस मंझारी। भाद्र शुक्ल चौदस शुभकारी॥

भक्तो की हर आधी व्याधि। जल में ली जलदेव समाधि॥
जो जन धरे आज भी ध्याना। उनका वरुण करे कल्याणा॥

॥ दोहा ॥
चालीसा चालीस दिन पाठ करे जो कोय।
पावे मनवांछित फल अरु जीवन सुखमय होय॥

॥ ॐ श्री वरुणाय नमः ॥

Read Also:
» चेटी चंड - Cheti Chand
» दिल्ली के प्रसिद्ध झूलेलाल मंदिर
» श्री झूलेलाल आरती- ॐ जय दूलह देवा! | हो लाल मेरी पत रखियो बला!

ChalisaShri Jhulelal Chalisa


अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

* यदि आपको इस पेज में सुधार की जरूरत महसूस हो रही है, तो कृपया अपने विचारों को हमें शेयर जरूर करें: यहाँ शेयर करें
** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर शेयर करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ शेयर करें

श्री दुर्गा चालीसा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूँ लोक फैली उजियारी॥

श्री झूलेलाल चालीसा

जय जय जल देवता, जय ज्योति स्वरूप। अमर उडेरो लाल जय, झुलेलाल अनूप॥

श्री शिव चालीसा

जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

माँ श्री लक्ष्मी चालीसा

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्घ करि, परुवहु मेरी आस॥

श्री गंगा चालीसा

जय जय जननी हराना अघखानी। आनंद करनी गंगा महारानी॥ जय भगीरथी सुरसरि माता।

श्री सूर्य देव चालीसा

जय सविता जय जयति दिवाकर!, सहस्त्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥ भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!...

संतोषी माता की चालीसा!

जय सन्तोषी मात अनूपम। शान्ति दायिनी रूप मनोरम॥ सुन्दर वरण चतुर्भुज रूपा। वेश मनोहर ललित अनुपा॥

गणपति श्री गणेश चालीसा

जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥

माता श्री तुलसी चालीसा

जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी। नमो नमो हरि प्रेयसी श्री वृन्दा गुन खानी॥

श्री चित्रगुप्त चालीसा

सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश। ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश॥

close this ads
^
top