Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

पार्थिव शिवलिंग अभिषेक क्या है? (What is Parthiv Shivling Abhishek?)

पार्थिव शिवलिंग अभिषेक क्या है?
पार्थिव शिवलिंग अभिषेक भगवान शिव की पूजा का एक विशेष रूप है जिसमें भक्त मिट्टी, कीचड़ या प्राकृतिक तत्व से शिवलिंग बनाते हैं और फिर शिव मंत्रों के जाप के साथ जल, दूध, शहद, दही, घी, चीनी और पवित्र जड़ी-बूटियों जैसे पवित्र पदार्थों से शिवलिंग का अनुष्ठानिक अभिषेक कराते हैं।
पार्थिव शिवलिंग का अर्थ
❀ पार्थिव - संस्कृत शब्द पृथ्वी से उत्पन्न, जिसका अर्थ है "पृथ्वी" या "मिट्टी"।
❀ शिवलिंग - भगवान शिव का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व।
❀ अभिषेक - किसी देवता को स्नान कराना या अर्पित करना।
अतः, पार्थिव शिवलिंग अभिषेक, मिट्टी के शिवलिंग को स्नान कराना और उसकी पूजा करना है।

पार्थिव शिवलिंग की पूजा क्यों की जाती है?
❀ इसे शिव पूजा के सबसे शक्तिशाली रूपों में से एक माना जाता है।
❀ शिवपुराण जैसे शास्त्रों के अनुसार, पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से पाप दूर होते हैं, मनोकामनाएँ पूरी होती हैं और शांति मिलती है।
❀ ऐसा कहा जाता है कि श्रावण मास, महाशिवरात्रि या प्रदोष व्रत के दौरान इसकी पूजा विशेष रूप से लाभकारी होती है।
❀ कई संतों का मानना है कि इससे मोक्ष मिलता है और स्वास्थ्य, समृद्धि और आध्यात्मिक प्रगति का आशीर्वाद मिलता है।

पार्थिव शिवलिंग अभिषेक अनुष्ठान
❀ स्थान को साफ़ करें, साफ़ कपड़े पहनें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
❀ साफ़, शुद्ध मिट्टी या चिकनी मिट्टी से एक छोटा शिवलिंग तैयार करें। इसे हाथों से या साँचे का उपयोग करके बनाया जा सकता है।
❀ शिवलिंग को साफ़ तांबे की प्लेट (थाली) पर या ताज़े पत्तों (अक्सर बिल्व या आम) पर रखें।
❀ ॐ नमः शिवाय जैसे मंत्रों से भगवान शिव का आह्वान करें।
❀ एक विशिष्ट क्रम में जल, दूध, दही, शहद और घी अर्पित करें।
❀ वैकल्पिक रूप से पंचामृत (उपरोक्त पाँचों का मिश्रण) का उपयोग करें।
❀ बिल्वपत्र, धतूरा, पुष्प, चंदन जैसी पवित्र वस्तुएँ अर्पित करें।
❀ शिव मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र या रुद्रम के श्लोकों का पाठ करें।
❀ आशीर्वाद के लिए प्रार्थना करें।
पूजा के बाद, पार्थिव शिवलिंग को आमतौर पर नदी, सरोवर या स्वच्छ जल स्रोत में विसर्जित कर दिया जाता है, जो पृथ्वी तत्व की वापसी का प्रतीक है।

पार्थिव शिवलिंग अभिषेक का महत्व
पार्थिव शिवलिंग अभिषेक में 108 पार्थिव शिवलिंग बनाना और उनकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम ने भी लंका पर चढ़ाई करने से पहले रामेश्वरम में पार्थिव शिवलिंग की पूजा की थी।

What is Parthiv Shivling Abhishek? in English

Parthiv Shivling Abhishek is a special form of worship to Bhagwan Shiva in which devotees create a Shivling from clay, mud, or natural soil and then perform abhishek.
यह भी जानें

Blogs Masik Shivratri BlogsMahashivratri BlogsShiv BlogsBholenath BlogsMahadev BlogsShivaratri BlogsMonday BlogsShivaratri Specials BlogsParthiv Shivling Abhishek BlogsMata Parvati Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि में क्या अंतर है?

मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि दोनों में ही भगवान शिव की पूजा का विधान है, लेकिन फिर भी दोनों को एक दूसरे से अलग माना जाता है।

जगन्नाथ मंदिर प्रसाद को 'महाप्रसाद' क्यों कहा जाता है?

जगन्नाथ मंदिर में सदियों से पाया जाने वाला महाप्रसाद लगभग 600-700 रसोइयों द्वारा बनाया जाता है, जो लगभग 50 हजार भक्तों के बीच वितरित किया जाता है।

सावन शिवरात्रि 2026

आइए जानें! सावन शिवरात्रि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ एवं सम्वन्धित कुछ प्रेरक तथ्य.. | बृहस्पतिवार, 30 जुलाई 2026 से शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 तक

शिवलिंग पर बेलपत्र कैसे चढ़ाएं?

शिवलिंग पर बेलपत्र (बिल्व पत्र) चढ़ाते समय, हिंदू धर्मग्रंथों और पारंपरिक पूजा पद्धतियों के अनुसार, इसे एक विशिष्ट विधि से अर्पित किया जाना चाहिए।

ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

यह एकादशी तिथियाँ केवल वैष्णव सम्प्रदाय इस्कॉन के अनुयायियों के लिए मान्य है | ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

अमेरिका में कैसे मनाई जाती है जन्माष्टमी?

अमेरिका श्रीकृष्ण के मंदिरों में जन्माष्टमी के त्यौहार पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है और त्योहार का उत्सव भव्य रूप से मनाया जाता है। जन्माष्टमी उत्सव के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका में मंदिर द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, पुजारियों और अन्य वक्ताओं द्वारा भगवान श्री कृष्ण के जीवन से सबक सुनाया जाते हैं।

संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?

शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी जो पूर्णिमा के बाद आती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।

Sawan 2026 - Sawan 2026
Sawan 2026 - Sawan 2026
Bhakti Bharat APP