नवरात्रि विशेष 2026 - Navratri Specials 2026
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

ब्रम्हा मुहूर्त क्या होता है? (What is Brahma Muhurta?)

वेदों में ब्रह्म मुहूर्त को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि ब्रह्म मुहूर्त में निद्रा त्यागने से विद्या, बुद्दि, स्वास्थ्य और बल प्राप्त होते हैं। किसी भी काम ब्रह्म मुहूर्त में शुरू करना बहुत उत्तम माना गया है।
ब्रम्हा मुहूर्त कब शुरू होता है?
शास्त्र के अनुसार सूर्योदय से ठीक पहले का समय ब्रह्म मुहूर्त का समय होता है। ब्रह्ममुहूर्त रात का 14वां मुहूर्त काल है। एक मुहूर्त 48 मिनट की अवधि है, जिसमें पूरी रात 15 मुहूर्त होती है। सूर्योदय का समय भौगोलिक स्थिति और वर्ष के समय के अनुसार हर दिन बदलता रहता है और ब्रह्ममुहूर्त का समय इसके साथ बदलता रहता है।

उदाहरण के लिए, यदि सूर्योदय सुबह 6:00 बजे है, तो ब्रह्ममुहूर्त 4:24 बजे शुरू होता है और 5:12 बजे समाप्त होता है।

ब्रम्हा मुहूर्त में उठने के लाभ:
❀ शास्त्रों में बताया गया है कि ब्रह्म मुहूर्त काल में देव और पितर घर में विराजमान होते हैं। जिससे घर और परिवार उन्नति करता है।
❀ ब्रह्म मुहूर्त में ध्यान का अभ्यास, आत्म चिंतन और विद्या अर्जित करने के लिए बहुत लाभकारी माना गया है।
❀ इस समय उठने से शारीरिक एवं मानसिक ताकत में वृद्धि होती है। साथ ही तनाव, चिंता, अनिद्रा जैसी अनेक समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
❀ ब्रह्म मुहूर्त में वातावरण साफ़ होता है। इस समय योग का अभ्यास या सैर करने से व्यक्ति का स्वास्थ्य निरोगी रहता है।
❀ शास्त्रों में में बताया गया है कि इस समय की प्रार्थना भगवान को भी सुनाई देती है। इसलिए पूजा पाठ के लिए यह समय उत्तम माना गया है।

ब्रम्हा मुहूर्त में क्या नहीं करना है?
❀ इस समय मन में नकारात्मक भाव नहीं लाने चाहिए, अन्यथा आपको पूरे दिन तनाव रहता है। जिससे आपको मानसिक रूप से परेशानी हो सकती है।
❀ कुछ लोग सुबह को उठते ही चाय नाश्ता करने लगते हैं, ये आदत सेहत के लिहाज से बहुत खराब होती है। सुबह को उठते ही या फिर ब्रह्म मुहूर्त में भूलकर भी भोजन नहीं करना चाहिए। इससे आपको बिमारियां घेरने लगती हैं।

मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त को रात के अंतिम समय को कहा गया है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय परमात्मा का समय है। इसलिए इसका महत्व अधिक है।

What is Brahma Muhurta? in English

Brahma Muhurta is considered very important in the Vedas. It has been told in the scriptures that by giving up sleep in Brahma Muhurta, one gets knowledge, intelligence, health and strength. It is considered very good to start any work in Brahma Muhurta.
यह भी जानें

Blogs Brahma Muhurta BlogsDev Muhurta BlogsHindu Scripture BlogsVed Puran BlogsPractice Yoga BlogsWorship Time Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

ब्रम्हा मुहूर्त क्या होता है?

वेदों में ब्रह्म मुहूर्त को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि ब्रह्म मुहूर्त में निद्रा त्यागने से विद्या, बुद्दि, स्वास्थ्य और बल प्राप्त होते हैं। किसी भी काम ब्रह्म मुहूर्त में शुरू करना बहुत उत्तम माना गया है।

अमेरिका के सबसे ऊंची हनुमान मूर्ति

अमेरिका, डेलावेयर हॉकेसिन के महालक्ष्मी मंदिर में 25 फीट की सबसे ऊंची हनुमान मूर्ति स्थापित गयी है, जो की तेलंगाना के वारंगल से लाया गया है। यह देश में एक हिंदू भगवान की सबसे ऊंची मूर्ति है और इसे काले ग्रेनाइट के एक ही पत्थर से उकेरा गया है। इस 30,000 किलो वजन हनुमान प्रतिमा को पूरा होने में एक साल से अधिक का समय लगा है।

चैत्र नवरात्रि विशेष 2026

हिंदू पंचांग के प्रथम माह चैत्र मे, नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्रि पर्व में व्रत, जप, पूजा, भंडारे, जागरण आदि में माँ के भक्त बड़े ही उत्साह से भाग लेते है। Navratri Dates 19th March 2026 and ends on 27th April 2026

समाधि क्या है? भू-समाधि और जल-समाधि में अंतर बताइए?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में संत या गुरु के रूप में माने जाने वाले लोगों को सम्मानित करने के लिए समाधि स्थलों को अक्सर इस तरह से बनाया जाता है, जिसमें कहा जाता है कि ऐसी आत्माएं महा समाधि में चली गई थीं, या मृत्यु के समय पहले से ही समाधि में थीं।

2026 बसंत विषुव | मार्च विषुव

मार्च विषुव उत्तरी गोलार्ध में बसंत (वसंत) विषुव और दक्षिणी गोलार्ध में शरद विषुव (पतन) विषुव है। उत्तरी गोलार्द्ध में मार्च विषुव को वसंत विषुव कहा जाता है। उत्तरी गोलार्ध में वसंत विषुव लगभग 20 या 21 मार्च को पड़ता है, जब सूर्य उत्तर की ओर जाने वाले खगोलीय भूमध्य रेखा को पार करता है।

भगवान श्री विष्णु के दस अवतार

भगवान विष्‍णु ने धर्म की रक्षा हेतु हर काल में अवतार लिया। भगवान श्री विष्णु के दस अवतार यानी दशावतार की प्रामाणिक कथाएं।

गंडमूल क्या है?

गंडमूल (जिसे गंडमूल या गंडान्त नक्षत्र भी लिखा जाता है) वैदिक ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो कुछ जन्म नक्षत्रों को संदर्भित करता है, जिनके बारे में माना जाता है कि यदि उन्हें अनुष्ठानों द्वारा ठीक से प्रसन्न नहीं किया जाता है, तो वे व्यक्ति के जीवन में कठिनाइयाँ या कर्म संबंधी चुनौतियाँ पैदा करते हैं।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP