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राधाष्टमी - Radhashtami


Updated: Sep 05, 2019 23:50 PM बारें में | संबंधित जानकारियाँ | यह भी जानें


आने वाले त्यौहार: 26 August 2020
राधाष्टमी राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है, जिन्हें माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है।

राधाष्टमी राधा रानी के अवतरण दिवस के रूप में मनाई जाती है, जिन्हें माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है। राधा रानी को भगवान कृष्ण की दैवीय प्रेमिका के रूप में जाना जाता है, इनका अवतार कमल के फूल से हुआ, तथा भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु के आठवें अवतार रूप में माना गया हैं।

राधाष्टमी मुख्य रूप से उन भक्तों द्वारा मनाया जाता है, जो भगवान कृष्ण की आराधना करते हैं। हिंदू पांचांग के अनुसार राधाष्टमी भद्रपद महीने में शुक्ल पक्ष के आठवें दिन मनाई जाती है।

परंपराओं के अनुसार, गौडिया वैष्णव संप्रदाय श्रीकृष्ण एवं राधा रानी के प्रति समर्पित होकर उनकी पूजा करते है। यह संप्रदाय चैतन्य महाप्रभु द्वारा वर्णित भगवत गीता और भागवत पुराण का पाठ करते हैं, चैतन्य महाप्रभु वैष्णव संप्रदाय के संस्थापक है। गौडिया वैष्णव संप्रदाय राधाष्टमी को अपनी प्रथाओं और परम्पराओं के अनुरूप आधे दिन उपवास का करते हैं। कुछ भक्त इस दिन सख्त उपवास का पालन भी करते हैं। वे पानी की बूंद का उपभोग किए बिना पूरे दिन कड़ा व्रत करते हैं। राधाष्टमी भगवान कृष्ण और राधा रानी के ईश्वरीय प्रेम के समरूप मनाया जाता है, भक्त श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त हेतु प्रशंसा, भजन और गीतों के साथ राधा रानी की पूजा करते हैं।

परंपरागत रूप से राधाष्टमी मुख्य रूप से ब्रज क्षेत्र में मनाया जाता है। इस दिन राधा रानी और भगवान कृष्ण के विग्रह पूर्ण रूप से फूलों से सजाया जाता हैं। राधाष्टमी वह दिन है जब भक्त राधा रानी के चरणों के शुभ दर्शन प्राप्त करते हैं, क्योंकि दूसरे दिनों में राधा के पैर ढके रहते हैं।

राधाष्टमी के दिन, भक्तों द्वारा दिव्य प्रेमी जोड़े (भगवान कृष्ण और राधा रानी) की प्रशंसा में भक्ति, आध्यात्मिक और श्री राधा गायत्री मंत्र का पाठ आयोजित किया जाता हैं। राधाष्टमी को बरसाना, मथुरा, वृंदावन, नंदगाँव तथा आस-पास के क्षेत्र (ब्रज भूमि) में मुख्य रूप से मनाया जाती है।

राधाष्टमी भगवान और मनुष्य के बीच एक अद्वितीय संबंध का प्रतीक है, जो श्रीकृष्ण और राधारानी के निःस्वार्थ दैवीय प्रेम बंधन को दर्शाता है। राधा अष्टमी उत्सव भारत के प्रसिद्ध जन्माष्टमी उत्सव के 15 दिनों के बाद मनाया जाता है।

आमतौर पर बरसाने के पवित्र राधा कुंड में स्नान करना निषिद्ध है। लेकिन राधा अष्टमी के दिन, भक्त राधा कुंड के पवित्र जल में डुबकी लेने के लिए मध्यरात्रि तक कतार में खड़े होकर प्रतीक्षा करते हैं ताकि वह अपने आराध्य के दिव्य प्रेम और आशीर्वाद को प्राप्त कर सकें। बरसाना को ही श्री लाड़ली जी की स्थली माना जाता है।

संबंधित अन्य नाम
राधा जयंती

Radhashtami - Available in English

Radhashtami is celebrated as the birth anniversary of Radha Rani. Radha Rani is considered as another form of Goddess Lakshmi.

विशाखा देवी

विशाखा देवी

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
14 September 2021
आवृत्ति
वार्षिक
समय
1 दिन
सुरुआत तिथि
भाद्रपद शुक्ला अष्टमी
समाप्ति तिथि
भाद्रपद शुक्ला अष्टमी
महीना
अगस्त / सितंबर
कारण
श्री राधा रानी के अवतरण दिवस।
उत्सव विधि
रास लीला, श्री राधा कृष्ण मंदिर में पूजा, उपवास।
महत्वपूर्ण जगह
बरसाना, मथुरा, वृंदावन, ब्रज प्रदेश, श्री राधा कृष्ण मंदिर।
पिछले त्यौहार
6 September 2019, 17 September 2018, 29 August 2017, 9 September 2016

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