Updated: May 15, 2026 12:27 PM |
बारें में | संबंधित जानकारियाँ | यह भी जानें
Raja Parba Date: Sunday, 14 June 2026
रज पर्व ओडिशा राज्य के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। भगवान विष्णु की पत्नी भूमा देवी को समर्पित, यह ओडिशा में एक अनूठा त्योहार है जो नारीत्व का जश्न मनाता है। रज लगातार तीन दिनों तक मनाया जाता है। उत्सव मिथुन संक्रांति से एक दिन पहले शुरू होता है और उसके दो दिन बाद समाप्त होता है।
राज शब्द का उच्चारण र-ज होता है और यह संस्कृत शब्द राजस्वला से आया है, जिसका अर्थ है मासिक धर्म।
| संबंधित अन्य नाम | रज पर्व, पहिली रज, रज संक्रांति, मिथुन संक्रांति |
| शुरुआत तिथि | मिथुन संक्रांति |
| कारण | नारीत्व पर्व, भूदेवी पूजा, भूमा देवी |
| उत्सव विधि | फूलों की सजावट, भूदेवी पूजा |
Raja Parba is one of the most popular festivals of the state of Odisha. Dedicated to Bhuma Devi, the wife of Bhagwan Vishnu, it is a unique festival in Odisha that celebrates womanhood. Raja is celebrated for three consecutive days. The festivities begin a day before Mithun Sankranti and end two days after that.
रज पर्व कैसे मनाया जाता है?
❀ त्योहार के पहले दिन को पहिली रज, दूसरे को मिथुन संक्रांति और तीसरे भू दाह या बसी रज कहा जाता है।
❀ पहिली रज से एक दिन पहले तैयारी शुरू हो जाती है, और इसे सजबाज कहा जाता है। मुख्य रूप से, यह अविवाहित लड़कियों के लिए अपनी शादी की तैयारी करने का समय है।
❀ यह मुख्यतः लड़कयों का त्यौहार है, लड़कियां पोड़ पीठा जैसे पौष्टिक भोजन खाते हैं, नंगे पैर नहीं चलते, पेड़ से जुड़ी रस्सियों पर झूले झूलते हैं और इसी तरह त्योहार से संबंधित विभिन्न रीति-रिवाजों का पालन करते हैं।
❀ पर्व के दौरान, ओडिया लोग कोई निर्माण कार्य या जुताई नहीं करते हैं जिसके लिए पृथ्वी को खोदने की आवश्यकता होती है। और इस तरह की गतिविधियों को न करके, वे धरती माँ को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्हें नियमित काम से छुट्टी की आवश्यकता होती है।
रज पर्व के पीछे की पौराणिक कहानी
इस पर्व से जुड़ी एक कहानी है। भगवान विष्णु की पत्नी देवी पृथ्वी (भूमा देवी) इस अवधि के दौरान अपने मासिक धर्म से गुजरती हैं। दिलचस्प बात यह है कि ओडिया में 'रज' शब्द का अर्थ मासिक धर्म है, और यह रजस्वला से लिया गया है, जिसका अर्थ है मासिक धर्म वाली महिला। आश्चर्यजनक रूप से, यह एक ऐसा त्योहार है जो स्त्रीत्व के इस पहलू का जश्न मनाता है जो स्त्रीत्व को अद्वितीय बनाता है। मासिक धर्म को प्रजनन क्षमता का संकेत माना जाता है, और इसलिए, यह स्त्रीत्व और दूसरे जीवन को जन्म देने की उसकी क्षमता का जश्न मनाता है।
त्योहार का समापन वसुमती स्नान या भूमा देवी के स्नान नामक प्रथा के साथ होता है। महिलाएं एक पत्थर की पूजा करती हैं जो धरती माता का प्रतीक है। वे उसे हल्दी के लेप से स्नान कराते हैं और उसे फूल चढ़ाते हैं और उसे सिंदूर लगाते हैं। इस त्योहार का संबंध
असम के अंबुबाची मेले से है।
यह त्योहार गर्मी के मौसम के अंत और मानसून के आगमन से भी जुड़ा हुआ है। और इसलिए, यह कृषि और खेती से संबंधित समुदायों और गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है।
रज महोत्सव का सांस्कृतिक महत्व
रजमहोत्सव ओडिया संस्कृति और ग्रामीण परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। इस दौरान अक्सर स्कूल बंद रहते हैं, गांवों में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और बड़े पेड़ों के नीचे झूले लगाए जाते हैं। यह महोत्सव समाज में प्रकृति और महिलाओं के प्रति सम्मान को दर्शाता है।
संबंधित जानकारियाँ
भविष्य के त्यौहार
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शुरुआत तिथि
मिथुन संक्रांति
कारण
नारीत्व पर्व, भूदेवी पूजा, भूमा देवी
उत्सव विधि
फूलों की सजावट, भूदेवी पूजा
पिछले त्यौहार
14 June 2025, 14 June 2024
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