शीतल षष्ठी ओडिशा, विशेषकर संबलपुर में मनाया जाने वाला सबसे आध्यात्मिक और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का स्मरण कराता है और भक्ति, पवित्रता और दिव्य शक्तियों के मिलन का प्रतीक है। शीतल षष्ठी, \"शीतल\" का अर्थ है शीतल या सुखदायक और \"षष्ठी\" चंद्र पखवाड़े के छठे दिन को संदर्भित करता है।
शीतल षष्ठी त्योहार की पौराणिक पृष्ठभूमि
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त करने के लिए गहन तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर, भगवान शिव ने उनका प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और देवताओं, ऋषियों और भक्तों ने उनके दिव्य विवाह का उत्सव मनाया। शीतल षष्ठी इसी पवित्र विवाह का पुनर्मंचन है। यह त्योहार ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष के छठे दिन मनाया जाता है, जो आमतौर पर मई या जून में होता है।
शीतल षष्ठी त्योहार के प्रमुख अनुष्ठान और उत्सव
❀ दिव्य विवाह समारोह: भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्तियों का विधिपूर्वक विवाह संपन्न कराया जाता है।
❀ पुरोहितों द्वारा विस्तृत वैदिक अनुष्ठान और मंत्रों का पाठ किया जाता है।
❀ समुदाय के परिवार प्रतीकात्मक रूप से दूल्हा और दुल्हन के रिश्तेदार बन जाते हैं।
शीतल षष्ठी उत्सव की भव्य शोभायात्रा
इस उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण रंगारंग शोभायात्रा है, जिसमें शामिल हैं: सजी हुई पालकी और रथ, पारंपरिक संगीत और ढोल, लोक नृत्य और मार्शल आर्ट प्रदर्शन, भक्त “हर हर महादेव” का जाप करते हैं। हजारों लोग इस उत्सव को देखने के लिए एकत्रित होते हैं।
| शुरुआत तिथि | ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष के छठे दिन |
| कारण | भगवान शिव |
| उत्सव विधि | व्रत, पूजा, व्रत कथा, भजन-कीर्तन, गौरी-शंकर मंदिर में पूजा, रुद्राभिषेक |
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