श्रीमद्‍भगवद्‍गीता: अनुक्रमणिका (Shrimad Bhagwat Geeta: Index)


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अध्याय १: अर्जुनविषादयोगः - कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्यनिरीक्षण
अध्याय २: साङ्ख्ययोगः - गीता का सार
अध्याय ३: कर्मयोगः - कर्मयोग
अध्याय ४: ज्ञानकर्मसंन्यासयोगः - दिव्य ज्ञान
अध्याय ५: कर्मसंन्यासयोगः - कर्मयोग-कृष्णभावनाभावित कर्म
अध्याय ६: आत्मसंयमयोगः - ध्यानयोग
अध्याय ७: ज्ञानविज्ञानयोगः - भगवद्ज्ञान
अध्याय ८: अक्षरब्रह्मयोगः - भगवत्प्राप्ति
अध्याय ९: राजविद्याराजगुह्ययोगः - परम गुह्य ज्ञान
अध्याय १०: विभूतियोगः - श्री भगवान् का ऐश्वर्य
अध्याय ११: विश्वरूपदर्शनयोगः - विराट रूप
अध्याय १२: भक्तियोगः - भक्तियोग
अध्याय १३: क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोगः - प्रकृति, पुरुष तथा चेतना
अध्याय १४: गुणत्रयविभागयोगः - प्रकृति के तीन गुण
अध्याय १५: पुरुषोत्तमयोगः - पुरुषोत्तम योग
अध्याय १६: दैवासुरसम्पद्विभागयोगः - दैवी तथा आसुरी स्वभाव
अध्याय १७: श्रद्धात्रयविभागयोगः - श्रद्धा के विभाग
अध्याय १८: मोक्षसंन्यासयोगः - उपसंहार-संन्यास की सिद्धि

यह भी जानें
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    विनय पत्रिका

    गोस्वामी तुलसीदास कृत विनयपत्रिका ब्रज भाषा में रचित है। विनय पत्रिका में विनय के पद है। विनयपत्रिका का एक नाम राम विनयावली भी है।

    श्री रामचरितमानस: सुन्दर काण्ड: पद 41

    बुध पुरान श्रुति संमत बानी । कही बिभीषन नीति बखानी ॥ सुनत दसानन उठा रिसाई ।..

    श्री रामचरितमानस: सुन्दर काण्ड: पद 44

    कोटि बिप्र बध लागहिं जाहू । आएँ सरन तजउँ नहिं ताहू ॥ सनमुख होइ जीव मोहि जबहीं ।..

    मंदिर

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