मुख्य आकर्षण - Key Highlights |
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| ◉ मंदिर की स्थापना श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने की है। |
| ◉ मंदिर राधा वल्लभ संप्रदाय परंपरा का पालन करता है। |
राधा वल्लभ मंदिर, उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले के वृंदावन में स्थित ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है और राधा वल्लभ मंदिर, राधा वल्लभ संप्रदाय का मुख्य मंदिर है। इस मंदिर की भक्ति परंपरा में श्री राधा को दिव्य प्रेम (प्रेम भक्ति) का सर्वोच्च केंद्र माना जाता है।
राधा वल्लभ मंदिर में दर्शन का समय
यह मंदिर पूरे सप्ताह खुला रहता है और दर्शन का समय सुबह 5:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक और शाम 5:30 बजे से रात 9:00 बजे तक है।
राधावल्लभ मंदिर के प्रमुख त्यौहार
राधाष्टमी, जन्माष्टमी, होली, हितोत्सव, व्याहलु उत्सव, शरद पूर्णिमा, दशहरा, झूलन उत्सव, फूल बंगले (पुष्प आर्चेड), सांझी उत्सव पाटोत्सव और अन्य पारंपरिक उत्सव बड़ी भक्ति के साथ मनाए जाते हैं।
राधावल्लभ मंदिर तक कैसे पहुँचें?
राधावल्लभ मंदिर उतार प्रदेश के मथुरा जिले के वृन्दावन में स्थित है। मंदिर सड़क मार्ग से बहुत अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है। इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा निकटतम है।
राधा वल्लभ मंदिर 1585 ईस्वी के आसपास राधा वल्लभ परंपरा के अनुयायी सुंदरदास भटनागर की देखरेख में बनकर तैयार हुआ था। परंपरा के अनुसार, इस मंदिर में श्री राधा की अलग मूर्ति के बजाय श्री राधा वल्लभ लाल जी के बगल में रखे एक मुकुट के माध्यम से श्री राधा की उपस्थिति को दर्शाया जाता है। इस मंदिर की स्थापना श्री हित हरिवंश महाप्रभु ने की थी।
यहाँ मुख्य देवता कृष्ण हैं, जिनकी पूजा 'श्री राधा वल्लभ' (अर्थात राधा के प्रियतम) के रूप में की जाती है। कृष्ण के साथ ही एक मुकुट भी रखा जाता है, जो देवी राधा की उपस्थिति का प्रतीक है। यह ऐतिहासिक मंदिर अपनी लाल बलुआ पत्थर की बनावट और हिंदू व इस्लामी वास्तुकला के अनूठे मेल के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के इतिहास के अनुसार, मुगल काल के दौरान लाल बलुआ पत्थर के इस्तेमाल की अनुमति ली गई थी, जो मुख्य रूप से शाही निर्माण कार्यों से जुड़ा हुआ माना जाता था। कहा जाता है कि इसकी दीवारें लगभग 10 फीट मोटी हैं। यह मंदिर मुख्य रूप से 'रस भक्ति' और दिव्य प्रेम से जुड़ा है, न कि मोक्ष (मुक्ति) को अंतिम आध्यात्मिक लक्ष्य मानने से। यह मंदिर राधा वल्लभ संप्रदाय की परंपरा का पालन करता है।
वृंदावन में राधा वल्लभ परंपरा की शुरुआत 16वीं सदी में हित हरिवंश महाप्रभु ने की थी। मंदिर की पारंपरिक कथा के अनुसार, श्री राधा वल्लभ लाल जी की पवित्र प्रतिमा वे ही वृंदावन लाए थे और उन्होंने इसे यमुना के पास 'ऊँची ठौर' पर स्थापित किया था।
5:30 AM - 9 PM
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