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वयं राष्ट्रे जागृयाम.. (Vayam Rashtre Jagrayam)


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वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः - यजुर्वेद ९:२३
हिन्दी भावार्थ:
हम पुरोहित राष्ट्र को जीवंत एवं जाग्रत बनाए रखेंगे। पुरोहित का अर्थ होता है जो इस पुर का हित करता है। प्राचीन भारत में शायद ऐसे व्यक्तियों को पुरोहित कहते थे, जो राष्ट्रीय-चरित्र, राष्ट्रीय-गौरव, राष्ट्रीय-मर्यादा, राष्ट्रीय-आत्मीयता, राष्ट्रीय-समृद्धि आदि की वृद्धि और उत्कर्ष की बात का दूरगामी हित समझकर उसकी प्राप्ति की व्यवस्था करते थे। पुरोहित में चिन्तक और साधक दोनों के गुण होते हैं, जो सही परामर्श दे सकें। हे पुरोहितो, इस राष्ट्र में जागृति लाओ और इस राष्ट्र की रक्षा करो। राष्ट्रजागरण का महान् कार्य तो जाग्रत् अन्तःकरण वाले व्यक्तियों का है।

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