होली एक ऐसा रंगबिरंगा त्योहार है, जिसमे हर धर्म के लोग पूरे उत्साह और मस्ती के साथ रंगों से, मिष्ठानो से, भजनों से जाति बंधन से परे संदेश देते हैं। होली में रंगों का प्रयोग जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक भजनों का गाया जाना भी है। भजनों में रसिया, ठुमरी एवं राग गाये जाते हैं, इन सभी प्रकार के भजनों को होली के दौरान गायन के कारण, होरी गायन भी कहते हैं।
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ओढ़े लाल लाल चुनरी सिंह पे सवारी माँ आज आई रे, देखो माई लगे प्यारी सिंह पे सवारी माँ आज आई रे,
माँ के माथे पे कुम कुम की बिंदियां है सोहे, गले नीबूवन की माला है माँ ने पिरोये,
ओढ़े लाल लाल चुनरी सिंह पे सवारी माँ आज आई रे ॥
महक उठा घर बार मेरा माँ, इक तेरे आ जाने से, इसी तरह ही आते रहना, किसी ना किसी बहाने से, किसी ना किसी बहाने से माँ,
किसी ना किसी बहाने से, मेहक उठा घर बार मेरा माँ, इक तेरे आ जाने से, इसी तरह ही आते रहना, किसी ना किसी बहाने से ॥