कन्हैया ले चल परली पार - भजनतेरी आस लगा बैठी हूँ, लज्जा शील गवां बैठी हूँ, मैं अपना आप लूटा बैठी हूँ, आँखें खूब थका बैठी हूँ, साँवरिया मैं तेरी रागिनी, तू मेरा मल्हार।। कन्हैया ले चल परली पार ॥
नारायण मिल जाएगा - भजनप्रेम प्रभु का बरस रहा है, पीले अमृत प्यासे, सातों तीरथ तेरे अंदर, बाहर किसे तलाशे..पता नहीं किस रूप में आकर
नारायण मिल जाएगा