बजरंग बाणनिश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
आया बुलावा भवन से: भजनआया बुलावा भवन से, मैं रह ना पाई अपने पति संग चढ़ के चढ़ाई, नंगे पाँव आई, लाल चुनरी चढाऊं, जय हो माँ, तेरी ज्योति जगाऊं, जय हो माँ, बस इतना वर चाहूँ, मैं बस इतना वर पाऊं, दर्शन को हर साल, सदा सुहागन ही आऊं ॥
जपूं नारायणी तेरो नाम: भजनजपूँ नारायणी तेरो नाम, राणीसती माँ झुँझनवाली, राणीसती माँ झुँझनवाली, सांचो तेरो धाम, जपूं नारायणी तेरो नाम, जपूं नारायणी तेरो नाम ॥