बजरंग बाणनिश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥
अवधपति बोले यूँ मुख से, सुनो वीर हनुमान: भजनअवधपति बोले यूँ मुख से, सुनो वीर हनुमान, वर्षो बाद पड़ा है तुमसे, एक जरुरी काम, धरती पर मानव जाति यूँ, कर रही हाहाकार,
तुम्हरे काँधे पर धरता, उनके जीवन का भार, के तुम वहां बैठे बलि, करो हर एक की भली, के तुम वहां बैठे बलि,
करो हर एक की भली ॥