तरसे नज़रिया वोतरसे नज़रिया वो... तरसे नज़रिया वो... 2 दे दर्सन के दान वो मईया,तरसे नज़रिया वो.. चढ़- तोर मुहरन के वो...झलक देखादे वो...॥
दातिये कर छावां: भजनअम्मीये तेरे द्वारे विच्चों, जोतां दे लिशकारे विच्चों, मेहराँ भरे भंडारे विच्चों, मैं वी खुशियां पावां, दातिये कर छावां, तेरे प्यार दी ठंडड़ी छां, दातिये कर छावां ॥