मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना - भजन (Mere Mohan Tera Muskurana)


मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है
चोट खायी है जो मैंने दिल में, वो दिखने के काबिल नहीं है
जबसे देखा है जलवा तुम्हारा, कोई आँखों को जचता नहीं है
यूं तो देखे है बहुत नूर वाले, सारे आलम में तुमसा नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है

तेरी सूरत पे क़ुर्बान जाऊ, तेरी आँखे है या मय के प्याले
जिनको नज़रो से तुमने पिलाई, होश आने के काबिल नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है

मैंने पूछा की अब कब मिलोगे, पहले मुस्काये फिर हंस के बोले
सबके दिल में समाये हुए है, आने जाने के काबिल नहीं है
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है
Mere Mohan Tera Muskurana - Read in English
Mere Mohan Tera Muskurana, Bhool Jaane Ke Kabil Nahin Hai, Chot Khayee Hai Jo Mainne Dil Mein, Vo Dikhane Ke Kabil Nahin Hai
Bhajan Shri Krishna BhajanBrij BhajanBaal Krishna BhajanBhagwat BhajanJanmashtami BhajanLaddu Gopal BhajanRadhashtami BhajanPhalguna BhajanIskcon BhajanShri Shyam Bhajan
अगर आपको यह भजन पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!


* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

नवीनतम भजन ›

श्याम नज़रें देख लो, अब खोल के: भजन

श्याम नज़रें देख लो, अब खोल के, चरणों में रखा कलेजा, खोल के, श्याम नजरे देख लो, अब खोल के ॥

ओ लागी लागी रे प्रीत, थासु सांवरिया सरकार: भजन

ओ लागी लागी रे प्रीत, थासु सांवरिया सरकार, बन के दीवानी मैं तो नाचूंगी, सांवरा होके दीवानी मैं तो नाचूंगी,
ओ लागी लागी रे प्रित, थासु सांवरिया सरकार ॥

मेरे बाबा तुझे किसने सजाया, दिल गया हार सांवरे: भजन

मेरे बाबा तुझे किसने सजाया, दिल गया हार सांवरे, मैं मुड़ मुड़ दर तेरे आया, मुड़ मुड़ दर तेरे आया, दिल गया हार सांवरे,
मेरे बाबा तुझें किसने सजाया, दिल गया हार सांवरे ॥

मैं सेवक तू मालिक, श्याम हमारा है: भजन

हम दोनों का रिश्ता, कितना प्यारा है, मैं सेवक तू मालिक, श्याम हमारा है ॥

महाकाल की लगन: शिव भजन

मोहे लागी रे लगन महाकाल की लगन, तुम्हारे नाम से किस्मत मेरी सजा लू मैं, तुम्हारे चरणों को ही अपना घर बना लू मैं, मुझे कर गई मगन, महाकाल की लगन ॥