भक्तमाल: पांडुरंग शास्त्री आठवले
अन्य नाम - दादाजी
शिष्या - धनश्री (जयश्री) तलवलकर
आराध्य - भगवान कृष्ण
जन्म स्थान - 19 अक्टूबर 1920, रोहा, महाराष्ट्र
निधन - 25 अक्टूबर 2003 (उम्र 83 वर्ष), मुंबई
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता - वैजनाथ शास्त्री आठवले
माता - पार्वती आठवले
पत्नी - निर्मला ताई आठवले
बच्चे - जयश्री तलवलकर
पुरस्कार: सामुदायिक नेतृत्व के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार, टेम्पलटन पुरस्कार, पद्म विभूषण
प्रसिद्ध - स्वाध्याय परिवार, कार्यकर्ता दार्शनिक, आध्यात्मिक शिक्षक, आध्यात्मिक नेता
पांडुरंग शास्त्री अथावले (1920-2003) एक पूजनीय भारतीय दार्शनिक, आध्यात्मिक गुरु, समाज सुधारक और स्वाध्याय आंदोलन के संस्थापक थे। उन्हें प्रेम से "दादाजी" कहा जाता है। उनकी शिक्षाओं में भक्ति, स्वाध्याय और वैदिक मूल्यों पर आधारित सामाजिक परिवर्तन का समावेश था।
भक्तिभारत के अनुसार, दादाजी बचपन से ही भगवद् गीता, उपनिषदों और भारतीय शास्त्रों से गहरे प्रभावित थे। उन्होंने किशोरावस्था में ही गीता पर प्रवचन देना शुरू कर दिया था।
पांडुरंग शास्त्री अथावले द्वारा स्वाध्याय आंदोलन
1954 में, उन्होंने औपचारिक रूप से स्वाध्याय आंदोलन की शुरुआत की, जो एक आध्यात्मिक और सामाजिक-सांस्कृतिक आंदोलन था, जो निम्नलिखित सिद्धांतों पर आधारित था:
❀ शास्त्रों का स्व-अध्ययन
❀ प्रत्येक मनुष्य में विद्यमान ईश्वर के प्रति भक्ति
❀ निस्वार्थ सेवा (भक्ति से प्रेरित कर्म)
उन्होंने "अंतर्यामी भगवान" की अवधारणा पर जोर दिया और "वसुधैव कुटुंबकम" (संसार एक परिवार है) नामक दिव्य परिवार की भावना को बढ़ावा दिया।
स्वाध्याय की पहलों में शामिल हैं:
❀ योगेश्वर कृषि (सामूहिक खेती)
❀ मत्स्यगंधा नौकाएँ (सामुदायिक मत्स्य पालन परियोजनाएँ)
❀ वृक्ष मंदिर
❀ आदिवासी और ग्रामीण उत्थान कार्यक्रम
पांडुरंग शास्त्री अठावले ने 25 अक्टूबर 2003 को देह त्याग दी, लेकिन उनकी शिक्षाएँ स्वाध्याय परिवार के माध्यम से भारत और विदेशों में लाखों लोगों को प्रेरित करती रहती हैं।