janmashtami 2026
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सीता चालीसा (Sita Chalisa)


॥ दोहा ॥
बन्दौ चरण सरोज निज जनक लली सुख धाम,
राम प्रिय किरपा करें सुमिरौं आठों धाम ॥
कीरति गाथा जो पढ़ें सुधरैं सगरे काम,
मन मन्दिर बासा करें दुःख भंजन सिया राम ॥
॥ चौपाई ॥
राम प्रिया रघुपति रघुराई,
बैदेही की कीरत गाई ॥

चरण कमल बन्दों सिर नाई,
सिय सुरसरि सब पाप नसाई ॥

जनक दुलारी राघव प्यारी,
भरत लखन शत्रुहन वारी ॥

दिव्या धरा सों उपजी सीता,
मिथिलेश्वर भयो नेह अतीता ॥4

सिया रूप भायो मनवा अति,
रच्यो स्वयंवर जनक महीपति ॥

भारी शिव धनु खींचै जोई,
सिय जयमाल साजिहैं सोई ॥

भूपति नरपति रावण संगा,
नाहिं करि सके शिव धनु भंगा ॥

जनक निराश भए लखि कारन,
जनम्यो नाहिं अवनिमोहि तारन ॥8

यह सुन विश्वामित्र मुस्काए,
राम लखन मुनि सीस नवाए ॥

आज्ञा पाई उठे रघुराई,
इष्ट देव गुरु हियहिं मनाई ॥

जनक सुता गौरी सिर नावा,
राम रूप उनके हिय भावा ॥

मारत पलक राम कर धनु लै,
खंड खंड करि पटकिन भू पै ॥12

जय जयकार हुई अति भारी,
आनन्दित भए सबैं नर नारी ॥

सिय चली जयमाल सम्हाले,
मुदित होय ग्रीवा में डाले ॥

मंगल बाज बजे चहुँ ओरा,
परे राम संग सिया के फेरा ॥

लौटी बारात अवधपुर आई,
तीनों मातु करैं नोराई ॥16

कैकेई कनक भवन सिय दीन्हा,
मातु सुमित्रा गोदहि लीन्हा ॥

कौशल्या सूत भेंट दियो सिय,
हरख अपार हुए सीता हिय ॥

सब विधि बांटी बधाई,
राजतिलक कई युक्ति सुनाई ॥

मंद मती मंथरा अडाइन,
राम न भरत राजपद पाइन ॥20

कैकेई कोप भवन मा गइली,
वचन पति सों अपनेई गहिली ॥

चौदह बरस कोप बनवासा,
भरत राजपद देहि दिलासा ॥

आज्ञा मानि चले रघुराई,
संग जानकी लक्षमन भाई ॥

सिय श्री राम पथ पथ भटकैं,
मृग मारीचि देखि मन अटकै ॥24

राम गए माया मृग मारन,
रावण साधु बन्यो सिय कारन ॥

भिक्षा कै मिस लै सिय भाग्यो,
लंका जाई डरावन लाग्यो ॥

राम वियोग सों सिय अकुलानी,
रावण सों कही कर्कश बानी ॥

हनुमान प्रभु लाए अंगूठी,
सिय चूड़ामणि दिहिन अनूठी ॥28

अष्ठसिद्धि नवनिधि वर पावा,
महावीर सिय शीश नवावा ॥

सेतु बाँधी प्रभु लंका जीती,
भक्त विभीषण सों करि प्रीती ॥

चढ़ि विमान सिय रघुपति आए,
भरत भ्रात प्रभु चरण सुहाए ॥

अवध नरेश पाई राघव से,
सिय महारानी देखि हिय हुलसे ॥32

रजक बोल सुनी सिय बन भेजी,
लखनलाल प्रभु बात सहेजी ॥

बाल्मीक मुनि आश्रय दीन्यो,
लवकुश जन्म वहाँ पै लीन्हो ॥

विविध भाँती गुण शिक्षा दीन्हीं,
दोनुह रामचरित रट लीन्ही ॥

लरिकल कै सुनि सुमधुर बानी,
रामसिया सुत दुई पहिचानी ॥36

भूलमानि सिय वापस लाए,
राम जानकी सबहि सुहाए ॥

सती प्रमाणिकता केहि कारन,
बसुंधरा सिय के हिय धारन ॥

अवनि सुता अवनी मां सोई,
राम जानकी यही विधि खोई ॥

पतिव्रता मर्यादित माता,
सीता सती नवावों माथा ॥40

॥ दोहा ॥
जनकसुत अवनिधिया राम प्रिया लवमात,
चरणकमल जेहि उन बसै सीता सुमिरै प्रात ॥

Sita Chalisa in English

Ram priya raghupati raghurai baidehi ki keerat gaai॥ Charan kamal bandon sir naai, Siya surasari sab paap nasaai॥
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