🌝अधिक मास - Adhik Mas

आधिक मास हिन्दू पंचांग में एक अतिरिक्त माहीने को कहा जाता है। आधिक-मास को प्रायः अशुभ महीना माना गया है, इस महीने में सभी प्रकार के शुभ कार्य करने पर प्रतिबंध होता है। इसे पुरुषोत्तम मास अथवा मलमास भी कहा जाता है। बृजभूमि मे इस माह के कारण संपूर्ण वर्ष को लौंद वाला साल भी कहते हैं। ज्योतिष शस्त्र के अनुसार अधिक-मास प्रत्येक तीन वर्ष के बाद आता है, परंतु कौनसा हिन्दी माह अधिक होगा वह ज्योतिष गणना से ही निकाला जाता है।

क्यों होता है अधिक मास?
हिंदू पंचांग में 12 महीने होते हैं, जिनका आधार चंद्रमा की गति है। सूर्य कैलेंडर मे एक वर्ष 365 दिन और लगभग 6 घंटे का होता है, जबकि हिंदू पंचांग चंद्रमा का एक वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। इन दोनो कैलेंडर वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर है। यह 11 दिन का अंतर तीन साल में एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को दूर करने के लिए, हर तीन साल के अंतराल में एक चंद्र महीना अस्तित्व में आता है। इस नये बढ़े हुए महीने को ही अधिक मास या मलमास कहा जाता है। भगवान विष्णु की पूजा आदिक मास में की जाती है।

हिन्दू पञ्चाङ्ग कैसे काम करता है?
◉ हिन्दू पंचांग चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा पर आधारित है।
◉ एक अमावस्या से अगली अमावस्या तक के समय को एक चंद्र मास कहते है।

चंद्र मास क्या होता है?
◉ एक चंद्र मास की अवधि लगभग 29 से 29.5 दिन होती है।
◉ इस प्रकार 12 चंद्र मास मिलकर लगभग 354 दिनों का चंद्र वर्ष बनता है।

सूर्य वर्ष क्या है?
◉ पृथ्वी द्वारा सूर्य का एक चक्कर लगाने के समय को एक सूर्य वर्ष कहते हैं।
◉ एक सूर्य वर्ष लगभग 365 दिन का होता है।
◉ प्रत्येक चंद्र एवं सूर्य वर्ष में लगभग 11 दिनों का अंतर बन जाता है।

चंद्र एवं सूर्य वर्ष के अंतर को ठीक न किया जाए, क्या होगा?
◉ धीरे-धीरे ऋतुएँ, त्योहार अपने वास्तविक समय से बिल्कुल भिन्न हो जाएँगी।
◉ दिवाली कभी गर्मियों में भी होने लगेगी।
◉ होली शर्दियों में होने लगेगी।

चंद्र एवं सूर्य वर्ष के बीच संतुलन कैसे करें?
◉ अब इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए लगभग हर 32–33 माह के उपरांत एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है।
◉ उसी अतिरिक्त माह को “अधिक मास” कहा जाता है।

अधिक मास कब होगा?
◉ जब एक पूरे चंद्र मास के दौरान सूर्य किसी नई राशि में प्रवेश नहीं करता..
◉ अर्थात उस माह में कोई “संक्रांति” नहीं होती।
◉ तब उस माह को अतिरिक्त मास माना जाता है।

हिन्दू पंचांग केवल धार्मिक व्यवस्था नहीं, बल्कि खगोल विज्ञान, ऋतु चक्र एवं प्रकृति के गहरे ज्ञान पर आधारित एक अत्यंत विकसित कालगणना व्यवस्था है।
सूर्य और चंद्रमा की गति को समावेश करने की एक अद्भुत वैज्ञानिक व्यवस्था है।
अधिक मास से जुड़ी विस्तृत जानकारियों के लिए भक्ति भारत को अवश्य पढ़ें।

संबंधित अन्य नाममलमास, पुरुषोत्तम मास, लौंद का महिना
शुरुआत तिथिप्रतिपदा
कारणसूर्य एवं चंद्र महीने के बीच का संतुलन स्थापित करने हेतु।
उत्सव विधिभगवान श्री विष्णु पाठ एवं स्तुति।
Read in English - Adhik Mas
Adhik Maas, Purushottam, Malmaas aur Launad is an extra month in the Hindu calendar. The month of Adhik Maas or Malmass is considered inauspicious.

पुरुषोत्तम मास नाम कैसे पड़ा?

कहा जाता है कि भगवान विष्णु, अधिक मास के भगवान हैं, तथा पुरुषोत्तम उनका एकमात्र नाम है। इसलिए, अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसके पीछे भी एक कहानी है।

विश्वास के अनुसार, भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से प्रत्येक चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किया। चूँकि अधिक मास सूर्य एवं चंद्र महीने के बीच का संतुलन स्थापित करता है, इसलिए कोई देवता इस अतिरिक्त महीने का शासक बनने के लिए तैयार नहीं था। ऐसी स्थिति में, ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से इस महीने का भार अपने ऊपर लेने का आग्रह किया। भगवान विष्णु ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह माह पुरुषोत्तम माह बन गया।

कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य इस महीने में नहीं किए जाते हैं।

अधिक मास में क्या करें?

जप, दान, स्वाध्याय, ध्यान, साधना, भगवद् चिंतन, दीप दान, गंगा स्नान इन कार्यों को इस मास में विशेष महत्व दिया गया है।
विश्वास के अनुसार, भारतीय मनीषियों ने अपनी गणना पद्धति से प्रत्येक चंद्र मास के लिए एक देवता निर्धारित किया।

अधिक मास में क्या न करें?

कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य इस महीने में नहीं करने चाहिए।

अधिक मास को और किन-किन नामो से जाना जाता है?

◉ भगवान विष्णु ने इस मास को अपना स्वरूप प्रदान किया, इसीलिए इसेः पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
◉ भगवान विष्णु द्वारा स्वीकृति न दिए जाने से पहिले, इसे मल मास भी कहा जाता था।
◉ स्थानीय भाषाओ में इसे लौंद का महिना भी कहा जाता है।

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
आवृत्ति
3 वर्ष के अंतराल मे
समय
30 दिन
शुरुआत तिथि
प्रतिपदा
समाप्ति तिथि
अमावस्‍या
महीना
कोई निश्चित नहीं।
प्रकार
ज्योतिषीय घटना
कारण
सूर्य एवं चंद्र महीने के बीच का संतुलन स्थापित करने हेतु।
उत्सव विधि
भगवान श्री विष्णु पाठ एवं स्तुति।
पिछले त्यौहार
अधिक मास : 15 June 2026, अधिक मास : 17 May 2026, Sharavan Mas : 16 August 2023, Sharavan Mas : 18 July 2023

Updated: Jun 15, 2026 21:34 PM

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