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🎋छठ पूजा - Chhath Puja

Chhath Puja Date: Nahaye Khaye: Friday, 28 October 2022

छठ पर्व या छठ पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी से कार्तिक शुक्ल सप्तमी तक मनाया जाने वाला चार दिनों तक चलने वाला लोक पर्व है। यह पर्व दिवाली के 6 दिन बाद मनाया जाता है। छठ पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्य बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

छठ पूजा में सूर्य देव और छठी मैया की पूजा व उन्हें अर्घ्य देने का विधान है। छठ भारत मे वैदिक काल से ही मनाए जाने वाला बिहार का प्रसिद्ध पर्व है। षष्ठी तिथि के प्रमुख व्रत को मनाए जाने के कारण इस पर्व को छठ कहा जाता है। इस दौरान व्रतधारी लगातार 36 घंटे का व्रत रखते हैं। इस दौरान वे पानी भी ग्रहण नहीं करते।

संबंधित अन्य नामछठ पर्व, छठ, षष्‍ठी पूजा
सुरुआत तिथिकार्तिक शुक्ल चतुर्थी
कारणसूर्य देव एवं छठी मैया की पूजा।
उत्सव विधिस्नान, सूर्य को अर्घ्य, भजन, कीर्तन, आरती, मेले।

Chhath Puja in English

Chhath or Chhath Puja is a four-day folk festival celebrated from Kartik Shukla Shashthi to Kartik Shukla Saptami.

नहाय खाये

8 November 2021
तिथि: कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
छठ पर्व का प्रथम दिन जिसे नहाय-खाय के नाम से जाना जाता है। इस दिन सर्वप्रथम घर की सफाई कर उसे पवित्र किया जाता है। उसके उपरांत व्रती अपने निकटतम नदी अथवा तालाब में जाकर स्वच्छ जल से स्नान करते है। व्रती इस दिन सिर्फ एक बार ही खाना खाते है। तला हुआ खाना इस व्रत मे पूर्णरूप से वर्जित हैं. यह खाना कांसे या मिटटी के बर्तन में पकाया जाता है।

खरना और लोहंडा

9 November 2021
तिथि: कार्तिक शुक्ल पंचमी
छठ पर्व का दूसरा दिन जिसे खरना या लोहंडा के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखते है, सूर्यास्त से पहिले पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करते हैं। शाम को चावल गुड़ और गन्ने के रस का प्रयोग कर खीर बनाई जाती है। इन्हीं दो चीजों को पुन: सूर्यदेव को नैवैद्य देकर उसी घर में एकान्त-वास करते हुए ग्रहण किया जाता है।

सभी परिवार जनों, मित्रों एवं रिश्तेदारों को प्रसाद स्वरूप खीर-रोटी दिया जाता हैं। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को खरना कहते हैं। इसके उपरांत व्रती अगले 36 घंटों के लिए निर्जला व्रत धारण कर लेता है। मध्य रात्रि को व्रती पूजा के लिए विशेष प्रसाद रूप मे ठेकुआ नमक पकवान बनाता है।

संध्या अर्घ्य

10 November 2021
तिथि: कार्तिक शुक्ल षष्ठी
छठ पर्व का तीसरा दिन जिसे संध्या अर्घ्य के नाम से जाना जाता है। पूरे दिन सभी परिजन मिलकर पूजा की तैयारिया करते हैं। छठ पूजा के लिए विशेष प्रसाद जैसे ठेकुआ, कचवनिया(चावल के लड्डू) बनाए जाते हैं। छठ पूजा के लिए एक बांस की बनी हुयी टोकरी जिसे दउरा कहते है में पूजा के प्रसाद, फल डालकर देवकारी में रख दिया जाता है।

वहां पूजा अर्चना करने के बाद शाम को एक सूप में नारियल, पांच प्रकार के फल और पूजा का अन्य सामान लेकर दउरा में रख कर घर का पुरुष अपने हाथो से उठाकर छठ घाट पर ले जाते हैं। इस पर्व मे पवित्रता का खास ध्यान रखा जाता है। इस संपूर्ण आयोजन मे महिलाये प्रायः छठ मैया के गीतों को गाते हुए घाट की ओर जातीं हैं।

नदी के किनारे छठ माता का चौरा बनाकर उसपर पूजा का सारा सामान रखकर नारियल अर्पित किया जाता है एवं दीप प्रज्वलित किया जाता है। सूर्यास्त से कुछ समय पहले, पूजा का सारा सामान लेकर घुटने तक पानी में जाकर खड़े होकर, डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पांच बार परिक्रमा की जाती है।

उषा अर्घ्य

11 November 2021
तिथि: कार्तिक शुक्ल सप्तमी
चौथे अर्थात अंतिम दिन, सुबह उदियमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। सूर्योदय से पहिले ही व्रती-जन घाट पर उगते सूर्यदेव की पूजा हेतु सभी परिजनो के साथ पहुँचते हैं।

संध्या अर्घ्य में अर्पित पकवानों को नए पकवानों से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है, परन्तु कन्द, मूल, फलादि वही रहते हैं। सभी नियम-विधान सांध्य अर्घ्य के समान ही किए जाते हैं। पूजा-अर्चना समाप्तोपरान्त घाट के पूजन का विधान है।

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
17 November 2023 - 20 November 20235 November 2024 - 8 November 202426 October 2025 - 29 October 202513 November 2026 - 16 November 2026
आवृत्ति
वार्षिक
समय
4 दिन
सुरुआत तिथि
कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
समाप्ति तिथि
कार्तिक शुक्ल सप्तमी
महीना
अक्टूबर / नवंबर
प्रकार
बिहार का सार्वजनिक अवकाश
कारण
सूर्य देव एवं छठी मैया की पूजा।
उत्सव विधि
स्नान, सूर्य को अर्घ्य, भजन, कीर्तन, आरती, मेले।
महत्वपूर्ण जगह
बिहार, झारखंड एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश, नदी घाट, नहर घाट, तालाब एवं जल श्रोत।
पिछले त्यौहार
Usha Arghya: 11 November 2021, Sandhya Arghya: 10 November 2021, Kharna or Lohanda: 9 November 2021, 18 November 2020 - 21 November 2020
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