Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

मंजिल तक कैसे पहुँचा जाए - प्रेरक कहानी (Manjil Tak Kaise Pahuncha Jaye)


Add To Favorites Change Font Size
एक बार एक संत ने अपने दो भक्तों को बुलाया और कहा आप को यहाँ से पचास कोस जाना है।
एक भक्त को एक बोरी खाने के समान से भर कर दी और कहा जो लायक मिले उसे देते जाना। और एक को खाली बोरी दी उससे कहा रास्ते मे जो उसे अच्छा मिले उसे बोरी मे भर कर ले जाए।

दोनो निकल पड़े जिसके कंधे पर समान था वो धीरे चल पा रहा था। खाली बोरी वाला भक्त आराम से जा रहा था। थोड़ी दूर उसको एक सोने की ईंट मिली उसने उसे बोरी मे डाल लिया। थोड़ी दूर चला फिर ईंट मिली उसे भी उठा लिया।

जैसे-जैसे चलता गया उसे सोना मिलता गया और वो बोरी मे भरता हुआ चल रहा था। और बोरी का वजन बढ़ता गया उसका चलना मुश्किल होता गया और साँस भी चढ़ने लग गई। एक एक कदम आगे चलना कठिन होता गया।

दूसरा भक्त जैसे-जैसे चलता गया रास्ते मै जो भी मिलता उसको बोरी मे से खाने का कुछ समान देता गया धीरे-धीरे बोरी का वजन कम होता गया। और उसका चलना आसान होता गया। जो बाँटता गया उसका गंतव्य स्थान तक पहुँचना आसान होता गया। और जो लालच मे आकर इकट्ठा करता रहा वो रास्ते मे ही दम तोड़ गया।

हम सभी को अब ये सोचना चाहिए कि हमने जीवन में क्या बाँटा और क्या इकट्ठा किया हम मंजिल तक कैसे पहुँच पाएँगे।
यह भी जानें

Prerak-kahani Khali Bori Prerak-kahaniSone Ki Eent Prerak-kahaniSant Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Latest Prerak-kahani ›

महाभारत के युद्ध में भोजन प्रबंधन

आर्यावर्त के समस्त राजा या तो कौरव अथवा पांडव के पक्ष में खड़े दिख रहे थे। श्रीबलराम और रुक्मी ये दो ही व्यक्ति ऐसे थे जिन्होंने इस युद्ध में भाग नहीं लिया।

इल्ली और घुन की कहानी

एक इल्ली और घुन था। इल्ली बोली आओ घुन कार्तिक स्नान करे, घुन बोला तू ही कार्तिक स्नान कर ले।..

व्यर्थ - व्यर्थ की चिंतायें - प्रेरक कहानी

एक व्यक्ति बहुत दिनों से तनावग्रस्त चल रहा था जिसके कारण वह काफी चिड़चिड़ा तथा क्रोध में रहने लगा था। वह सदैव इस बात से परेशान रहता था कि घर के सारे खर्चे उसे ही उठाने पड़ते हैं

बुराई का अंत हर हाल में होता है - प्रेरक कहानी

एक साँप को एक बाज अपने पंजों में दबाकर आसमान में उड़ाकर ले जा रहा था। अचानक साँप बाज के पंजों से छूट गया और एक कुएँ में जा गिरा।

कोयल- अपनी वाणी को मधुर बना लेना - प्रेरक कहानी

एक बार वसंत ऋतु में एक कोयल वृक्ष पर बैठी कूक रही थी। कुछ देर बैठो, बातें करते हैं.. कौआ- वह जरा जल्दी में है और देश को छोड़कर परदेस जा रहा है..

जब मुँह खोलोगे ही नहीं तो फँसोगे कैसे? - प्रेरक कहानी

एक मछलीमार कांटा डाले तालाब के किनारे बैठा था। काफी समय बाद भी कोई मछली कांटे में नहीं फँसी, ना ही कोई हलचल हुई तो वह सोचने लगा...

निस्वार्थ भाव से दान पुण्य करें - प्रेरक कहानी

ठाकुर का एक बेटा था, जो इस जगत को देख नहीं सकता था पर ठाकुर को उस परमात्मा पर विश्वास था..

Ram Bhajan - Ram Bhajan
Shri Krishna Bhajan - Shri Krishna Bhajan
Bhakti Bharat APP