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श्रीमद्‍भगवद्‍गीता: अर्जुनविषादयोग - श्लोक 40 (Shrimad Bhagwat Geeta: Arjun Visada Yog: Shlok 40)


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कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः ।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥
भावार्थ: कुल के नाश से सनातन कुल-धर्म नष्ट हो जाते हैं तथा धर्म का नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में पाप भी बहुत फैल जाता है।
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Granth Bhagwat Geeta Granth

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