गुह्येश्वरी शक्ति पीठ - Guhyeshwari Shakti Peeth

सभी शक्ति पीठ पीठों में माता सती के शरीर का कोई ना कोई अंग स्थित होता है, अतः गुह्येश्वरी मंदिर में माता के दोनों घुटने गिरे होने के कारण यह श्री गुह्येश्वरी शक्तिपीठ कहलाया जाता है। यह मंदिर गुह्येश्वरी (गुप्त ईश्वरी) को समर्पित है, देवी को गुह्यकाली भी कहा जाता है। गुह्येश्वरी शक्तिपीठ के भैरव कपाली हैं।

नेपाल के प्रसिद्ध श्री पशुपतिनाथ मन्दिर दर्शन से पहले माता गुह्येश्वरी के दर्शन करना अनिवार्य माना जाता है। इस परंपरा का पालन वहाँ के शाही परिवार के सदस्यों द्वारा अभी भी किया जाता है। अर्थात पहले गुह्येश्वरी मंदिर की पूजा की जाती है उसके उपरांत ही अन्य मंदिरों के दर्शन किए जाते हैं।

यह शक्तिपीठ श्री पशुपतिनाथ मन्दिर से लगभग 1 किमी पूर्व में स्थित है और नेपाल के काठमांडू में बागमती नदी के तट के पास स्थित है। यह हिंदू और विशेष रूप से तांत्रिक उपासकों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। गर्भग्रह की लगभग सभी मूर्तियां सोने एवं चांदी से बनी हुई हैं।

श्री पशुपतिनाथ मंदिर ही की तरह, भारतीय एवं तिब्बती मूल के हिंदुओं तथा बौद्धों को ही मुख्य मंदिर में प्रवेश की अनुमति है। पूजा-आरती के दौरान उपयोग किए जाने वाले कई वाद्य यंत्र राजा राणा बहादुर द्वारा भेंट स्वरूप दिए गए थे।

मंदिर की वास्तुकला भूटानी पगोडा वास्तुकला शैली में बनाई गई है। प्रसिद्ध मृगस्थली वन के निकट एवं बागमती नदी के तट पर स्थित होने के कारण गुह्येश्वरी मंदिर का वातावरण हरियाली एवं फूलों से सजाया गया लगता है। अगर आप श्री गुह्येश्वरी शक्तिपीठ से वन के रास्ते श्री पशुपतिनाथ मन्दिर जा रहे हैं तो, रास्ते में आने वाले शरारती बानरों से थोड़ा सावधान रहें।

दशईं एवं नवरात्रि यहाँ मनाए जाने वाले प्रमुख त्यौहार हैं, श्री पशुपतिनाथ मन्दिर निकट होने के कारण शिवरात्रि एवं सोमवार के दिन यहाँ भी अत्यधिक श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं।

प्रचलित नाम: श्री गुह्येश्वरी मंदिर

मुख्य आकर्षण - Key Highlights

◉ शक्तिपीठ में माता के दोनों घुटने स्थित हैं।
◉ गुह्येश्वरी शक्तिपीठ के भैरव कपाली हैं।

समय - Timings

त्यौहार
Guhyeshwari Yatra, Navratri, Shivaratri, Sawan Somwar, Bhairav Jayanti | यह भी जानें: Shivaratri

पौराणिक कथा

मंदिर का नाम संस्कृत के शब्द गुह्या (गुप्त) और ईश्वरी (देवी) से बना है। ललिता सहस्रनाम में देवी के 707 वें नाम का उल्लेख 'गुह्यरुपिनी' के रूप में किया गया है, जिसका अर्थ है कि देवी का रूप मानवीय धारणा से परे है और यह एक रहस्य है। एक और तर्क यह है कि यह षोडशी मंत्र का गुप्त १६वाँ अक्षर है। गुह्येश्वरी एक शक्ति पीठ है और माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां देवी सती के घुटने गिरे थे। यहां देवी को महामाया या महाशिर और भगवान शिव को कपाली के रूप में पूजा जाता है।

मंदिर का उल्लेख काली तंत्र, चंडी तंत्र, शिव तंत्र रहस्य के पवित्र ग्रंथों में भी तंत्र की शक्ति प्राप्त करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक के रूप में किया गया है। देवी गुहेश्वरी का विश्वस्वरूप उन्हें असंख्य हाथों वाली कई और अलग-अलग रंग की देवी के रूप में दिखाता है। मंदिर में दिव्य महिला शक्ति है और इसे सबसे शक्तिशाली पूर्ण तंत्र पीठ माना जाता है क्योंकि यह सत्रह श्मशान घाटों के ऊपर बनाया गया है।

Guhyeshwari Shakti Peeth in English

Guhyeshwari Temple is one of the revered holy temples. It is located about 1 km east of Pashupatinath and is situated near the banks of the Bagmati River in Kathmandu, Nepal.

जानकारियां - Information

बुनियादी सेवाएं
Prasad, Drinking Water, Shoe Store, Dharmshala, Sitting Benches
संस्थापक
भगवान शिव
स्थापना
सतयुग
समर्पित
माता सती
वास्तुकला
पगोडा
फोटोग्राफी
🚫 नहीं (मंदिर के अंदर तस्वीर लेना अ-नैतिक है जबकि कोई पूजा करने में व्यस्त है! कृपया मंदिर के नियमों और सुझावों का भी पालन करें।)
नि:शुल्क प्रवेश
हाँ जी

कैसे पहुचें - How To Reach

सड़क/मार्ग 🚗
Bagmati Road
हवा मार्ग ✈
Tribhuvan International Airport, Kathmandu
नदी ⛵
Bagmati
वेबसाइट 📡
निर्देशांक 🌐
27.711292°N, 85.353381°E
गुह्येश्वरी शक्ति पीठ गूगल के मानचित्र पर
http://www.bhaktibharat.com/mandir/guhyeshwari-shakti-peeth

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