तुलसीदास जी द्वारा श्री रामचरितमानस की रचना - सत्य कथा
दो वर्ष सात महीने छब्बीस दिन मे श्रीरामचरित मानस की रचना समाप्त हुई। संवत् १६३३ मार्गशीर्ष मास के शुक्लपक्ष में रामविवाह के दिन सातों काण्ड पूर्ण हो गये।
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क्या भगवान का अस्तित्व है? - प्रेरक कहानी
वह जैसे ही नाई की दुकान से निकला, उसने सड़क पर एक लम्बे-घने बालों वाले एक व्यक्ति को देखा जिसकी दाढ़ी भी बढ़ी हुई थी।...
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नामुमकिन को कैसे मुमकिन बनायें - प्रेरक कहानी
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चार रेत की ढेरियां - प्रेरक कहानी
एक राजा था, उसके कोई पुत्र नहीं था। राजा बहुत दिनों से पुत्र की प्राप्ति के लिए आशा लगाए बैठा था, तांत्रिकों की तरफ से राजा को सुझाव मिला कि यदि किसी बच्चे की बलि दे दी जाए..
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परमात्मा! जीवन यात्रा के दौरान हमारे साथ हैं - प्रेरक कहानी
प्रतिवर्ष माता पिता अपने पुत्र को गर्मी की छुट्टियों में उसके दादा-दादी के घर ले जाते । 10-20 दिन सब वहीं रहते और फिर लौट आते।..
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जो जिम्मेदारी लेता है - प्रेरक कहानी
हमारे घर के हाल में दो पंखे लगे हैं। जिनमें एक ही अक्सर चलता है, और वही धूल लगकर गंदा हो जाता है।..
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फर्क नजरिये का..: प्रेरक कहानी
मालूम नहीं। यहां पत्थर तोड़ते - तोड़ते जान निकल रही है और इनको यह चिंता है कि यहां क्या बनेगा।
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दान का खूबसूरत रूप - प्रेरक कहानी
उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आई। तभी एक मजदूरन ने मुझे आवाज लगाकर अपनी सीट देते हुए कहा मेडम आप यहां बैठ जाइए।..
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अन्तत: अन्तिम निर्णय ईश्वर ही करता है - प्रेरक कहानी
जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी।...
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देह दानी राजा शिवि महाराज - प्रेरक कहानी
शिवि की धर्मपरायणता, उदारता, दयालुता एवं परोपकार की ख्याति स्वर्गलोक में भी पहुंच गई थी। इन्द्र और अग्निदेव शिवि की प्रशंसा सुनने के बाद उनकी परीक्षा की योजना बनायी
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प्रार्थना के बाद भी भगवान नहीं सुन रहे? - प्रेरक कहानी
प्रार्थना छोड़ दोगे तो कहीं के नहीं रहोगे? प्रार्थना के बाद भी भगवान आपकी नहीं सुन रहे हैं? एक सेठ के घर के बाहर एक साधू महाराज खड़े होकर प्रार्थना कर रहे थे और बदले में खाने को रोटी मांग रहे थे।
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एक पुराना मन्दिर था। दरारें पड़ी थीं। खूब जोर से वर्षा हुई और हवा चली। मन्दिर बहुत-सा भाग लड़खड़ा कर गिर पड़ा..
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पिता का आशीर्वाद - प्रेरक कहानी
मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि, तुम जीवन में बहुत सुखी रहोगे और धूल को भी हाथ लगाओगे तो वह सोना बन जायेगी।
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बल प्रयोग अंतिम विकल्प - प्रेरक कहानी
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मेरे प्रिय, सुबह तुम जैसे ही सो कर उठे, मैं तुम्हारे बिस्तर के पास ही खड़ा था। मुझे लगा कि तुम मुझसे कुछ बात करोगे...
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