पितृ पक्ष - Pitru Paksha
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

ईश्वर ने मेरे भाग्य में क्या लिखा है - प्रेरक कहानी (Ishwar Ne Mere Bhagya Me Kya Likha Hai)


ईश्वर ने मेरे भाग्य में क्या लिखा है - प्रेरक कहानी
Add To Favorites Change Font Size
दूसरों के पीछे मत भागो?
एक बार स्वामी विवेकानद जी अपने आश्रम में एक छोटे पालतू कुत्ते के साथ टहल रहे थे। तभी अचानक एक युवक उनके आश्रम में आया और उनके पैरों में झुक गया और कहने लगा- स्वामीजी मैं अपनी जिंदगी से बड़ा परेशान हूँ। मैं प्रतिदिन पुरुषार्थ करता हूँ लेकिन आज तक मैं सफलता प्राप्त नहीं कर पाया। पता नहीं ईश्वर ने मेरे भाग्य में क्या लिखा है, जो इतना पढ़ा-लिखा होने के बावजूद भी मैं नाकामयाब हूँ।
युवक की परेशानी को स्वामीजी ने तुरंत समझ लिया। उन्होंने युवक से कहा- भाई! थोड़ा मेरे इस कुत्ते को कहीं दूर तक सैर करा दो। उसके बाद मैं तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर दूंगा।

उनकी इस बात पर युवक को थोड़ा अजीब लगा लेकिन दोबारा उसने कोई प्रश्न नहीं किया और कुत्ते को दौड़ाते हुए आगे निकल पड़ा। कुत्ते को सैर कराने के बाद, जब एक युवक आश्रम में पहुंचा तो वह देखा कि युवक का चेहरा तेज है लेकिन उसका छोटा कुत्ता थक से जोर-जोर से हांफ रहा था।

स्वामीजी ने पूछा- भाई, मेरा कुत्ता इतना कैसे थक गया? तुम तो बड़े शांत दिख रहे हो। क्या तुम्हें थकावट नहीं हुई?
युवक ने कहा- स्वामीजी, मैं धीरे-धीरे आराम से चल रहा था, लेकिन मेरा कुत्ता अशांत था। सभी जानवरों के पीछे दौड़ता था, इसीलिए बहुत थक गया था।

तब विवेकानंद ने कहा- भाई, तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर तो यही है! तुम्हारा लक्ष्य तुम्हारे आसपास है, लेकिन तुम उससे दूर चलते हो। अन्य लोगों के पीछे दौड़ते रहते हो और तुम जो चाहते हो वह दूर हो जाता है।

युवक ने विवेकानंद के उत्तर से संतुष्ट होकर अपनी गलती को सुधारने का निर्णय लिया। अतः अपने लक्ष्य पर ध्यान रखो और भटकाने वाली सोच से दूरी बनाओ।
यह भी जानें

Prerak-kahani Ishwar Prerak-kahaniSwami Vivekanand Prerak-kahaniDog Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Latest Prerak-kahani ›

रामायण से, श्री कृष्ण के पंख की कहानी

वनवास के दौरान माता सीताजी को प्यास लगी, तभी श्रीरामजी ने चारों ओर देखा, तो उनको दूर-दूर तक जंगल ही जंगल दिख रहा था। कुदरत से प्रार्थना की, हे वन देवता..

कर्मानुसार सुख एवं दुःख का भोग - प्रेरक कहानी

प्रभु मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही अपने प्रारब्ध से दुःखी है आप उसे और ज्यादा दुःख प्रदान करते हैं, और जो सुख में हैं आप उसे दुःख नहीं देते है।

अपना मान भले टल जाए, भक्त का मान ना टलने देना - प्रेरक कहानी

भक्त के अश्रु से प्रभु के सम्पूर्ण मुखारविंद का मानो अभिषेक हो गया। अद्भुत दशा हुई होगी... ज़रा सोचो! रंगनाथ जी भक्त की इसी दशा का तो आनंद ले रहे थे।

महाभारत में कर्ण ने श्रीकृष्ण से पूछा?

महाभारत में कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा: मेरी माँ ने मुझे जन्मते ही त्याग दिया, क्या ये मेरा अपराध था कि मेरा जन्म एक अवैध बच्चे के रूप में हुआ?

बुरी स्मृतियाँ भुला ही देनी चाहिए - प्रेरक कहानी

दो भाई थे। परस्पर बडे़ ही स्नेह तथा सद्भावपूर्वक रहते थे। पर एक दिन किसी बात पर दोनों में कहा सुनी हो गई..

एक जोड़ी, पैरों के निशान? - प्रेरक कहानी

आपने तो कहा था. कि आप हर समय मेरे साथ रहेंगे, पर मुसीबत के समय मुझे दो की जगह एक जोड़ी ही पैर ही दिखाई दिए...

भक्ति का प्रथम मार्ग है, सरलता - प्रेरक कहानी

प्रभु बोले भक्त की इच्छा है पूरी तो करनी पड़ेगी। चलो लग जाओ काम से। लक्ष्मण जी ने लकड़ी उठाई, माता सीता आटा सानने लगीं। आज एकादशी है...

Navratri Specials 2026 - Navratri Specials 2026
Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Bhakti Bharat APP