गणेशोत्सव - Ganeshotsav
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

निस्वार्थ भाव से दान पुण्य करें - प्रेरक कहानी ( Nisvarth Bhav Se Dan Puny Karen)


निस्वार्थ भाव से दान पुण्य करें - प्रेरक कहानी
Add To Favorites Change Font Size
एक गांव पहाड़ों के बीच में बसा हुआ था। वहाँ का ठाकुर बहुत ही परोपकारी व्यक्ति था। उस के पूर्वजों की सजा उस को मिली थी उस की पत्नी इस दुनिया में नहीं रही।
उसका एक बेटा था जो इस जगत को देख नहीं सकता था पर ठाकुर को उस परमात्मा पर विश्वास था कि प्रभु की कृपा से एक दिन उस का बेटा सही हो जायेगा। वह इस सोच मै पुण्य दान करता था कि कभी ना कभी प्रभु की कृपा रहेगी।

ऐसे ही करते कुछ साल बीत गये अब ठाकुर को चिंता होने लगी कि मेरे मरने के बाद मेरे बेटे का क्या होगा उस की चिंता दिन पर दिन खाई जा रही थी।

तभी स्वर्ग लोक मे नारद जी नारायण-नारायण बोलते हुए ब्रह्मा जी के पास जाते है और बोलते है: प्रभु ये क्या? आप कितने निर्दय है, आप उस मानव की सहायता क्यों नहीं करते वो रोज पुण्य दान करता है।

फिर भी आप उस कष्ट दे रहे हो आप बड़े स्वार्थी हो आप को उस का दुख नहीं दिखता क्या?

तब ब्रह्मा मुस्कराए और बोले: इसमे मेरा क्या स्वार्थ है नारद मुनि?

तब नारद मुनि शिवजी के पास जाते है और वही बात शिवजी से भी करते है तब उन की बात सुनकर शिव जी हंसते लगते है और बोलते है: इंसान स्वार्थी है।

ये बात सुनकर उन्हें और गुस्सा आगया और वो वहाँ से विष्णु जी पास आए और अपनी बात बताई तब विष्णु जी बोल: जिस दिन ठाकुर निस्वार्थ पुण्य करेगा मै उस दिन उस की परेशानी को खत्म कर दूँगा।

नारद जी बोले: प्रभु! वो रोज पूजा पाठ करता है दान करता है फिर भी आप कहते हो ये स्वार्थ है, तो इस प्रकार जगत मै सभी स्वार्थी हैं।

तब विष्णु जी बोले: हाँ!
नारद जी बोलते है: तब तो ठाकुर की परेशानी का कोई हल नहीं उस का दान-पुण्य सब बेकार है।

विष्णु जी कहते है: जब ठाकुर निस्वार्थ काम करेगा तब सब अपने आप सही हो जायेगा।

प्रभु नारद से बोल: तुम धरती लोक पर जाओ और खुद ठाकुर की परीक्षा लो।

नारद जी धरती पर जाते है वह एक बच्चे का रूप ले लेते है भूखा-नंगा सा रूप ले के ठाकुर के गाँव में पहुँच जाते है।

एक दिन ठाकुर मन्दिर जा रहे थे तभी रास्ते मे उनकी नजर उस बच्चे पर पड़ी उन्होंने उस बच्चे से पूछा: बेटा कहाँ से आए हो और तुम्हारे माँ-बाप कहाँ है।

तब बच्चा बोलता है: बाबूजी! भूख लगी है कुछ दो खाने को।

ठाकुर को उस बच्चे की हालत पर तरस आता है और वो उसे पूजा के लिए जो प्रसाद बनाया था उसे दे देते हैं। बिना पूजा किए घर लौट जाते है, उस बालक को भी घर ले आते है और उसे अपने साथ हवेली मे रहने देते है।

अब ठाकुर उस बालक को अपने बेटे जैसा पालने लगा इस तरह कही वर्ष बीत गए। एक दिन रात मे नारद जी ठाकुर के सामने प्रकट हुए।

बोले: ठाकुर! मै तुम्हारी सेवा से खुश हुआ कोई एक वरदान मागो।

ठाकुर के आंखो मे आंसू आ जाते है और बोलता है: मै कितना स्वार्थी था। प्रभु आप नहीं जानते जिस दिन आप मुझे भूखे मिले थे सिर्फ उस दिन मेरे मन मे कोई स्वार्थ नहीं था उसी रात को मेरे बेटे की आंखो मे रोशनी आ गई थी मैंने ये बात किसी को नहीं बताई आज भी मेरा बेटा उसी हालत मे अपने कमरे मे है।
बस मै तो बिना स्वार्थ के आप की सेवा कर रहा था।

यह जान कर नारद बड़े हैरत मै पड गए की आखिर ये चमत्कार किस ने किया फिर भी नारद बोले – आप मुझसे कोई वरदान मागों।

तब ठाकुर बोलता है: प्रभु! मुझे कुछ नहीं चाहिए बस आप ने मेरे घर को रोशन कर दिया है।

नारद जी वहाँ से विदा लेकर स्वर्ग लोक मे आते है। विष्णु, शिव और ब्रह्मा जी को एक साथ देख कर हैरत मे पड जाते है।

और बोलते है: प्रभु! आप ने मुझे जिस दिन धरती पर जाने को बोला उसी दिन आपने ठाकुर की इच्छा पूरी कर दी, क्या उस दिन वह स्वार्थी नहीं था।

तब विष्णु जी बोले: उस दिन जब तुम ठाकुर के पास भूखे गए थे, तब ठाकुर ने बिना स्वार्थ तुमको भोजन करवाया ये पुण्य से कम नहीं था। मै यही चाहता हूँ कि बिना स्वार्थ कोई किसी की मदद करे।

तब शिव जी बोलते है: हे मुनि! आप ने तो उसी दिन उस वरदान दे देना चाहिए था जब उस ने आप को भोजन करवाया आप ने तो वर्षों लग दिए क्या आप स्वार्थ से परिचित नहीं थे।

नारद मुनि बोलते है: प्रभु! आप की माया से मै अपरिचित हूँ आप ने मुझे बोला ठाकुर की परीक्षा लो पर आप तो मेरी भी परीक्षा ले रहे थे।

तब ब्रह्मा जी बोलते है: स्वार्थ का मतलब होता है, केवल अपने लाभ की बात सोचना, दूसरों के लाभ और भले की बात नहीं सोचना, सही मायने मे वही स्वार्थी है।

अतएव जो ज्ञानी है, जिसने भगवान से अपना लक्ष्य सिद्ध करने का लक्ष्य बनाया, वो भगवान सम्बन्धी स्वार्थी है।
यह भी जानें

Prerak-kahani Thankur Prerak-kahaniDaan Prerak-kahaniNarad Ji Prerak-kahaniNirdhan Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

श्री गणेश एवं बुढ़िया माई की कहानी

एक बुढ़िया माई थी। मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। रोज बनाए रोज गल जाए। एक सेठ का मकान बन रहा था..

गणेश चतुर्थी कथा

पक्षी बहुत दुःखी हुआ और उसने प्रतिज्ञा की कि मैं समुद्र के जल को समाप्त कर दूंगी और अपने चोंच में सागर के जल को भर भर कर फेंकने लगी ऐसा..

दद्दा की डेढ़ टिकट - प्रेरक कहानी

एक देहाती बुजुर्ग ने चढ़ने के लिए हाथ बढ़ाया। एक ही हाथ से सहारा ले डगमगाते कदमों से वे बस में चढ़े, क्योंकि दूसरे हाथ में थी भगवान गणेश की एक अत्यंत मनोहर बालमूर्ति थी।

गणेश विनायक जी की कथा - प्रेरक कहानी

एक गाँव में माँ-बेटी रहती थीं। एक दिन वह अपनी माँ से कहने लगी कि गाँव के सब लोग गणेश मेला देखने जा रहे हैं..

जब भगवान ने मुझे गोदी में बिठाया - प्रेरक कहानी

जन्म से ठीक पहले एक बालक भगवान से कहता है- प्रभु आप मुझे नया जन्म मत दीजिये, मुझे पता है पृथ्वी पर बहुत बुरे लोग रहते है

तुलसीदास जी द्वारा श्रीराम के दर्शन का उपाय - सत्य कथा

साक्षात् भगवान् श्रीराम के दर्शन करने का उपाय | उसके लिए प्रेम और भाव चाहिए, संत की कृपा चाहिए | वह व्यक्ति तुरंत पेड़ पर चढ़कर त्रिशूलपर कूद पडा..

परमात्मा या भौतिक सांसारिक प्राप्ति? - प्रेरक कहानी

भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ है। फिर भी मेरी एक ईच्छा हॆ कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी दर्शन दीजिये।...

Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Bhakti Bharat APP