Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

जब भक्त के लिए भगवान ने दी गवाही - साक्षी गोपाल मंदिर सत्य कथा (Sakshi Gopal Mandir Ki Satya Katha)


Add To Favorites Change Font Size
एक बूढ़ा ब्राह्मण तीर्थ यात्रा करना चाहता था। उनके स्वयं के बच्चे थे पर वो उनकी धर्म-कर्म वाली बातों का पालन नहीं करते थे। उन्होंने सोचा कि बूढ़ा अकेले तीर्थ यात्रा कैसे कर पाऊंगा? एक गरीब ब्राह्मण का लड़का था, उन्होंने उससे कहा कि तुम इधर-उधर नौकरी के लिए भटक रहे हो, अगर तुम मेरे साथ तीर्थ यात्रा पर चल लो तो मैं तुम्हारे खानपान की व्यवस्था कर दूँगा और धनराशि भी दे दूंगा। ब्राह्मण ने कहा अच्छा है, आपके साथ तीर्थों का भी दर्शन हो जाएगा। वह जहां-जहां जाना चाहते थे वह जवान ब्राह्मण उन्हें ले गया। जब ब्रज धाम आया तो उन्हें बहुत बुखार आ गया। उस ब्राह्मण ने बूढ़े ब्राह्मण की बहुत सेवा की।
बूढ़ा ब्राह्मण उसकी सेवा से बहुत द्रवित हुआ। वह धनी तो था ही। जब बूढ़े ब्राह्मण गोपाल जी के दर्शन करने गये तो उन्होंने कहा बेटा तुमने मेरी बहुत सेवा की है, मैं तुम्हें अपनी सुंदर बेटी और बहुत धन-संपत्ति दूंगा। उस जवान ब्राह्मण ने बूढ़े ब्राह्मण से कहा, देखो बाबा, आप यहाँ तो बोल रहे हैं, लेकिन घर पर आपके जवान लड़के हैं, वो मेरी पिटाई करेंगे। उन बूढ़े ब्राह्मण ने कहा कि मैं गोपाल जी को साक्षी करके कहता हूँ कि अपनी बेटी की शादी तुम्हारे साथ करवा दूँगा और तुम्हें संपत्ति भी दूँगा। बात तय हो गई।

तीर्थ यात्रा पूर्ण कर जब घर पहुँचे तो बूढ़े ब्राह्मण की हिम्मत नहीं हुई कि वो अपने लड़कों के सामने बात कर सकें। उस नौजवान ब्राह्मण ने महीना भर कोई सूचना मिलने का इंतज़ार किया, लेकिन कोई सूचना नहीं मिली। वह उन बूढ़े ब्राह्मण के घर गया और बोला देखो बाबा आपने कहा था की मेरी शादी आपकी बेटी के साथ होगी। उनके लड़कों ने उसे धक्का दिया और दो-चार थप्पड़ लगाए कि तेरी सामर्थ क्या है कि तू हमारी बहन से शादी करने की बात सोच सके। उसने बोला कि आपके पिताजी ने ही कहा था। अब लड़कों का वह स्वरूप देख कर बाबा बदल गए। उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा कुछ याद नहीं। उस नौजवान ब्राह्मण ने कहा, अरे! आपने गोपाल जी के सामने ये कहा था। उन्होंने पीट के उससे वहाँ से भगा दिया।

उस लड़के को इस बात का बहुत बुरा लगा की उसने अपनी तरफ से तो कहा नहीं था शादी के लिए, उन्होंने उसका अपमान भी किया। उसने पंचायत बुलाई और कहा कि इन्होंने हमें तीर्थ यात्रा के लिए प्रेरित किया, तीर्थयात्रा पर ले गए, मैंने इनकी सेवा की और इन्होंने ठाकुर जी के सामने मेरी शादी की बात कही। पंचायत ने बोला कि कोई और गवाही दे तब बात बनेगी। उसने बोला कि वहाँ तो केवल मैं, यह बूढ़े ब्राह्मण और ठाकुर जी ही थे। पंचायत ने कहा कि अगर ठाकुर जी गवाही दे दें तो तुम्हारी शादी कराइ जा सकती है। इस बात पर बूढ़ा ब्राह्मण भी राजी हो गया क्योंकि उन्होंने सोचा कि गोपाल जी थोड़ी ना आयेंगे गवाही देने। उन्होंने सोचा कि मूर्ति थोड़ी चलकर आएगी गवाही देने आएगी।

लड़के का साक्षी गोपाल के पास जाना
वह वृंदावन आया। उस दिन के लिए ठाकुर जी का शयन हो चुका था। वो बहुत परेशान हुआ, मंदिर का दरवाजा बंद था, उसने खटखटाया और कहा - सुनो गोपाल जी, मैं आपसे ये पूछने आया हूँ कि उन वृद्ध ब्राह्मण ने आपके सामने शादी की बात बोली थी ना।
दो-चार बार आवाज लगाई, कोई उत्तर नहीं आया। फिर वो बहुत जोर से बोला - देखो मैं आपको चैन से सोने नहीं दूँगा, मैं पैदल चलकर आया हूँ, भूखा भी हूँ, मेरी शादी की बात है, छोटी मोटी बात नहीं, आपको बोलना ही पड़ेगा।

ठाकुर जी ने अंदर से कहा, मूर्ति कहीं चलती है क्या। उसने कहा जब मूर्ति बोल रही है तो चलेगी क्यों नहीं। ठाकुर जी फँस गये। ठाकुर जी बाहर निकल कर आए। उसने देखा बहुत सुंदर नवकिशोर गोपाल जी, साक्षात ठुमक-ठुमक कर चलके आए। ठाकुर जी बोले देखो तुम्हारे भाव के कारण हम चलने के लिए राजी तो हैं। उसने गोपाल जी से पूछा कि आप उड़ीसा कैसे चलेंगे। गोपाल जी ने कहा, चलेंगे तो हम पैदल ही। आगे आगे तुम चलना, पीछे पीछे हम चलेंगे। हमारे नूपुरों की ध्वनि तुम्हें सुनाई देती रहेगी, अगर पीछे मुड़ के देख लिया तो हम वहीं खड़े हो जाएँगे, वहाँ से आगे नहीं बढ़ेंगे।

बात तय हो गई, चल दिये ठाकुर जी भक्त के पीछे। वो बीच-बीच में गोपाल जी को भोग लगाता रहा। जब अपने गांव के नजदीक पहुंचा तो नूपुर ही बजने की आवाज आना बंद होगी। भक्त ने मुड़कर देखा तो ठाकुर जी खड़े थे। ठाकुर जी ने कहा अब यहाँ से आगे मैं नहीं चलूँगा, तुम सबको बुलाकर यहीं लाओ।

साक्षी गोपाल
वो दौड़कर गाँव में गया और सभी को बुलाया कि वृंदावन के ठाकुर आये हैं साक्षी देने। भीड़ इकट्ठा हो गई साक्षात गोपाल जी को देखने के लिए। सब पंच भी वहाँ आ गये, अब ठाकुर जी को देखकर उन वृद्ध ब्राह्मण की कुछ बोलने की हिम्मत नहीं हुई। ठाकुर जी उस भक्त के वचन की रक्षा के लिए सबके सामने बोले और गवाही दी और उसके बाद उस नौजवान की शादी हो गई।
यह भी जानें

Prerak-kahani Gopal Ji Prerak-kahaniTrue Story Prerak-kahaniTrue Prerak-kahaniSakhi Gopal Temple Prerak-kahaniSakhi Gopal Mandir Prerak-kahaniSakhi Gopal Temple Puri Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

पीपल एवं पथवारी की कथा - प्रेरक कहानी

एक बुढ़िया थी। उसने अपनी बहू से कहा तू दूध दही बेच के आ। वह बेचने गई तो रास्ते में औरतें पीपल पथवारी सींच रहीं थीं..

सेवा भाव ना भूलें, क्षमाशील बनें - प्रेरक कहानी

एक राजा था, उसने 10 खूंखार जंगली कुत्ते पाल रखे थे। जिनका इस्तेमाल वह लोगों को उनके द्वारा की गयी गलतियों पर मौत की सजा देने के लिए करता था...

भिखारी के माध्यम से लोगों को संदेश - प्रेरक कहानी

बनारस में एक सड़क के किनारे एक बूढ़ा भिखारी बैठता था। वह उसकी निश्चित जगह थी। आने-जाने वाले पैसे या खाने-पीने को कुछ दे देते। इसी से उसका जीवन चल रहा था।

बहरूपियों से हमेशा सतर्क एवं सावधान रहें - प्रेरक कहानी

अचानक उसने अपने वस्त्र के अंदर से तीर कमान निकाला और झट से कबूतर को मार दिया।..

अपनी शिक्षाओं की बोली ना लगने दें - प्रेरक कहानी

एक नगर में रहने वाले एक पंडित जी की ख्याति दूर-दूर तक थी। पास ही के गाँव में स्थित मंदिर के पुजारी का आकस्मिक निधन होने की वजह से...

भक्त का भाव ही प्रभुको प्रिय है - प्रेरक कहानी

बनारस में उस समय कथावाचक व्यास डोगरे जी का जमाना था। बनारस का वणिक समाज उनका बहुत सम्मान करता था। वो चलते थे तो एक काफिला साथ चलता था।

श्री राम नाम जाप महिमा

अगर तुम तीन बार राम नाम का जाप करते हो तो यह सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या १००० बार ईश्वर के नाम का जाप करने के बराबर है।

Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP