मुख्य आकर्षण - Key Highlights |
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| ◉ जगह जहाँ देवी द्रौपदी दैनिक पूजा के लिए आती थीं। |
| ◉ महाभारत काल की ऐतिहासिक प्रष्ठभूमि। |
द्रौपदी घाट मंदिर वह जगह है जहाँ रानी द्रौपदी स्नान के लिए आतीं थीं, और दैनिक पूजा किया करती थीं। आधुनिक भारत में पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा कर्ण घाट के पास इस स्थान का नवीकरण कराया गया है। जहाँ श्री कृष्ण के साथ द्रौपदी का एक छोटा सा मंदिर है। ऐतिहासिक दृष्टि से इस स्थान का बहुत महत्व है, क्योंकि इसे महाभारत काल से जोड़कर देखा जाता है।
आस-पास की जगह से अनभिज्ञ लोगों के लिए इस स्थान तक पहुँचना भ्रम-पूर्ण हो सकता है, अतः गूगल-मेप का प्रयोग करें। लेख के अंत में गूगल-मेप की सही दिशा को दर्शाया गया है।
एक बार की घटना है कि रानी द्रौपदी नदी में स्नान हेतु आई हुईं थी। कुछ ही दूरी पर ऋषि दुर्वासा भी स्नान कर रहे थे। स्नान करते हुए ऋषि दुर्वासा का अधोवस्त्र जल में प्रवाहित हुए चला गया। इस परिस्थिति में ऋषि नदी से बाहर निकलने में असमर्थ थे।
द्रौपदी ने समझदारी दिखाते हुए अपनी साड़ी को फाड़कर उनको दिया। रानी के इस क्रत्य से प्रसन्न होकर ऋषि ने द्रौपदी को वर दिया कि उनकी लज्जा पर कभी भी आँच नहीं आयेगी। इसी वरदान के कारण, चीर हरण के समय भगवान श्री कृष्ण ने उनकी लाज का मान रखा था।

द्रौपदी घाट मंदिर

द्रौपदी घाट मंदिर

द्रौपदी घाट मंदिर

द्रौपदी घाट मंदिर
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