राधा रानी भक्त गुलाब सखी - सत्य कथा
श्री बरसाने में प्रेम सरोवर के मार्ग पर एक समाधी बनी हुई है। जिसे हर कोई गुलाब सखी (Gulab Sakhi) के चबूतरे के नाम से जानते है। एक भक्त का नाम गुलाब खान(Gulab Khan) था।
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ईश्वर बहुत दयालु है - प्रेरक कहानी
एक राजा का एक विशाल फलों का बगीचा था, उसमें तरह-तरह के फल होते थे और उस बगीचा की सारी देखरेख एक किसान अपने परिवार के साथ करता था।...
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भगवान होने का स्पष्ट प्रमाण - प्रेरक कहानी
राजस्थान के उपरमालिया में भगवान श्री कृष्ण के एक दयालु भक्त थे, नाम था राम सिंह जब दुकान खोलते, साफ सफाई के उपरांत हाथ धोकर नित्य भगवान की तस्वीर को साफ करते और बड़ी श्रद्धा से धूप इत्यादि दिखाते।
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हे श्री कृष्ण! तुम सर्वज्ञ हो - प्रेरक कहानी
एक वृद्ध महिला एक सब्जी की दुकान पर जाती है, उसके पास सब्जी खरीदने के पैसे नहीं होते है।..
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जीवन में, सब ईश्वर की दया ही है - प्रेरक कहानी
अमीर सेठ अपने नौकर से तो बहुत खुश था, लेकिन जब भी कोई कटु अनुभव होता तो वह भगवान को अनाप शनाप कहता और बहुत कोसता था..
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जब प्रभु को बाल सफेद करने पड़े - प्रेरक कहानी
एक राजा ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर बनवाया और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया...
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जब श्री कृष्ण बोले, मुझे कहीं छुपा लो - प्रेरक कहानी
एक बार की बात है कि यशोदा मैया प्रभु श्री कृष्ण के उलाहनों से तंग आ गयीं और छड़ी लेकर श्री कृष्ण की ओर दौड़ी।...
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कर्मो का उचित फल - प्रेरक कहानी
कुछ दिन पहले की बात है मैं अपने भाई के घर यानी अपने मायके गयी। वहां अपनी मम्मी और भाभी के साथ बैठ कर बातें कर रही थी।
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परमात्मा ने जो किया वह अच्छा ही किया था - प्रेरक कहानी
एक अमीर व्यक्ति समुद्र में अकेले घूमने के लिए एक नाव बनवाई और छुट्टी के दिन वह नाव लेकर अकेले समुद्र की सैर करने निकल पड़ा।
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हनुमानजी की उपासना से आयु वृद्धि होती है - प्रेरक कहानी
चित्रकूटके घाट पर, भइ संतन की भीर । तुलसिदास चंदन घिसें, तिलक देन रघुबीर ॥..
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क्या आपकी दुकान में ईश्वर मिलेंगे? प्रेरक कहानी
आठ साल का एक बच्चा एक रूपये का सिक्का मुट्ठी में लेकर एक दुकान पर जाकर कहा: क्या आपके दुकान में ईश्वर मिलेंगे?..
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अपने प्रारब्ध स्वयं अपने हाथों से काटे - प्रेरक कहानी
प्रभु कहते है कि, मेरी कृपा सर्वोपरि है, ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है, लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा। यही कर्म नियम है।
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प्रभु भोग का फल - प्रेरक कहानी
सेठजी के होश उड़ गए, वो तो बैठ गए वहीं पर। रात हो गई, सेठजी वहीं सो गए कि कहीं संतजी की तबियत बिगड़ गई तो कम से कम बैद्यजी को दिखा देंगे..
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सबसे बड़ा पुण्य क्या है? - प्रेरक कहानी
क राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था। वह इतना कर्मठ था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण में ही लगा देता था।
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कर्म महत्वपूर्ण है - प्रेरक कहानी
उसकी नजर एक मरे हुए सांप पर पड़ी। उसने एक लाठी पर सांप को लटकाया और घर की और जाते हुए सोचने लगा, इसे देखकर पत्नी डर जाएगी और आगे से काम पर जाने के लिए नहीं कहेगीं।...
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