Shri Krishna Bhajan
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प्रेरक कहानियाँ

कर्म कैसे फल देता है? - प्रेरक कहानी

ज्योतिष कहता है कि मनुष्य अपने ही कर्मो का फल पाता है। कर्म कैसे फल देता है? यह इस प्रसंग से समझे..

Prerak Kahani

आराम मे भी राम भाजो - प्रेरक कहानी

कुंदन काका प्रतियोगिता जीत चुके थे। उन्हें 1000 रुपये इनाम में दिए गए। तभी उस हारे हुए मजदूर ने पूछा- काका, मैं अपनी हार मानता हूँ। ..

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मन को कभी भी निराश न होने दें - प्रेरक कहानी

मन को कभी भी निराश न होने दें, बड़ी से बड़ी हानि में भी प्रसन्न रहें। मन उदास हो गया तो आपके कार्य करने की गति धीमी हो जाएगी। इसलिए मन को हमेशा प्रसन्न रखने का प्रयास।

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सन्त की दूरदर्शिता - प्रेरक कहानी

एक सन्त के पास 30 सेवक रहते थे। एक सेवक ने गुरुजी के आगे प्रार्थना की - महाराज जी! मेरी बहन की शादी है तो आज एक महीना रह गया है तो मैं दस दिन के लिए वहाँ जाऊँगा। गुरु की महिमा गुरु ही जाने।

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पुरुषार्थ की निरंतरता - प्रेरक कहानी

आज की कहानी के नायक अंगूठा छाप तन्विक पढ़े लिखे तो नहीं थे पर हुनरमंद अवश्य थे। वह पेशे से एक माली हैं और बंजर धरा को हरीभरी करने की कला में माहिर हैं।

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ऋण तो चुकाना ही होगा - प्रेरक कहानी

भाई ! तुम उधार कब लौटाओगे ? इस जन्म में या फिर अगले जन्म में ?

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भिखारी के माध्यम से लोगों को संदेश - प्रेरक कहानी

बनारस में एक सड़क के किनारे एक बूढ़ा भिखारी बैठता था। वह उसकी निश्चित जगह थी। आने-जाने वाले पैसे या खाने-पीने को कुछ दे देते। इसी से उसका जीवन चल रहा था।

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इन्द्रियों के भोग से कैसे जीव का नाश हो सकता है

परमात्मा द्वारा जीव को पांच ज्ञानेन्द्रियां प्रदान की गई हैं। श्रवण, त्वक,चक्षु, जिह्वा और घ्राणेन्द्रिय।इनके क्रमशः शब्द,स्पर्श, रूप, रस और गंध विषय हैं।

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महिमा राम नाम की - प्रेरक कहानी

राम राम कहने जैसे छोटे काम की वजह से आज उसकी जान बच गई। राम कहने से तर जाओगे..

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शुद्ध भावनाओं से ईश्वर और सुंदर भविष्य पक्का है - प्रेरक कहानी

एक मन्दिर था, उसमें सभी लोग पगार पर थे। आरती वाला, पूजा कराने वाला आदमी, घण्टा बजाने वाला भी पगार पर था...

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बाबा आप सही कह रहे हैं, भगवान हैं - प्रेरक कहानी

एक मेजर के नेतृत्व में 15 जवानों की एक टुकड़ी हिमालय के अपने रास्ते पर थी। बेहताशा ठण्ड में मेजर ने सोचा की अगर उन्हें यहाँ एक कप चाय मिल जाती तो आगे बढ़ने की ताकत आ जाती।

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मैं मरूंगा ही नहीं तो चूड़ियां फोड़ेगी कैसे - सत्य कथा

शारदा उनकी पत्नी रोने लगी तो रामकृष्ण ने आंखें खोलीं और कहा कि चुप, किसलिए रोती है? मैं न कहीं गया, न कहीं आया, मैं जहां हूं वहीं रहूंगा। तो शारदा ने पूछा, तुम्हारी देह के चले जाने के बाद मेरी चूड़ियों का क्या करना?

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कर्मानुसार सुख एवं दुःख का भोग - प्रेरक कहानी

प्रभु मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही अपने प्रारब्ध से दुःखी है आप उसे और ज्यादा दुःख प्रदान करते हैं, और जो सुख में हैं आप उसे दुःख नहीं देते है।

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हमारे भी पास सात दिन ही हैं - प्रेरक कहानी

रवि, सोम, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि, आठवां दिन तो बना ही नहीं है। परिवर्तन आज से आरम्भ करें।

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मन को शांत रखने के उपाय - प्रेरक कहानी

सेठ उस साधु के पास के पास जाकर बोला, महाराज मेरे पास बहुत पैसा है, लेकिन मन की शांति नहीं है। साधु ने कहा कि, बेटा जैसा मैं करूं उसे चुपचाप देखते रहना...

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प्रेरक कहानियाँ - Prerak Kahaniya are stories, quotes or katha full of spiritual, inspirational and moral values in its content. These Prerak Kahaniya are real time stories connecting with other live instance and inspires these live activities. Bhakti Bharat tells you 181+ prerak kahaniyan.

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