Shri Ram Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

माता पिता की सेवा ही सिद्धि प्राप्ति - प्रेरक कहानी (Mata Pita Ki Seva Hi Siddhi Prapti)


माता पिता की सेवा ही सिद्धि प्राप्ति - प्रेरक कहानी
Add To Favorites Change Font Size
महर्षि पिप्पल बड़े ज्ञानी और तपस्वी थे। उन की कीर्ति दूर दूर तक फैली हुई थीं एक दिन सारस और सारसी दोनों जल में खड़े आपस में बातें कर रहे थे कि पिप्पल को जितना बड़प्पन मिला हुआ है उससे भी अधिक महिमा सुकर्मा की है, पर उसे लोग जानते नहीं
पिप्पल ने सारस सारसी के इस वार्तालाप को सुन लिया। वे सुकर्मा को तलाश करते हुए उसके घर पहुँचें। सुकर्मा साधारण गृहस्थ था पर उसने बिना पूछे ही पिप्पल का मनोरथ कह सुनाया। तब उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ कि वह एक साधारण गृहस्थ जो योग तथा अध्यात्म के तत्वज्ञान से अपरिचित है, किस प्रकार इतनी आत्मोन्नति कर सका?

सुकर्मा से उन्होंने जब अपनी शंका उपस्थिति की तो उसने बताया कि पिता माता को साक्षात भगवान का अवतार मानकर सच्चे मन से मैं उनकी सेवा करता हूँ। यही मेरी साधना है और उसी के बल पर मैं जो कुछ बन सका हूँ सो आप की जानकारी में है ही।
यह भी जानें

Prerak-kahani Maharshi Pippal Prerak-kahaniSaras Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

दया करते समय व्यापर मत करो - प्रेरक कहानी

हमेशा की तरह दोपहर को सब्जीवाली दरवाजे पर आई और चिल्लाई, चाची- आपको सब्जियां लेनी हैं?
माँ हमेशा की तरह अंदर से चिल्लाई- सब्जियों में क्या-क्या है?
सब्जीवाली- ग्वार, पालक, भिन्डी, आलू, टमाटर

सनातन गोस्वामी का नियम - प्रेरक कहानी

गिरि गोवर्द्धन की नित्य परिक्रमा करना, अब उनकी अवस्था 90 वर्ष की हो गयी थी, नियम पालन मुश्किल हो गया था फिर भी वे किसी प्रकार निबाहे जा रहे थे।..

हे कन्हैया! क्या बिगाड़ा था मैंने तुम्हारा - प्रेरक कहानी

एक औरत रोटी बनाते बनाते ॐ भगवते वासूदेवाय नम: का जाप कर रही थी, अलग से पूजा का समय कहाँ निकाल पाती थी बेचारी, तो बस काम करते करते ही..

श्री गणेश एवं बुढ़िया माई की कहानी

एक बुढ़िया माई थी। मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। रोज बनाए रोज गल जाए। एक सेठ का मकान बन रहा था..

बाँके बिहारी जी का प्रेम - प्रेरक कहानी

एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी...
मैंने बार बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ?

गंगाजल से भरे घड़े की आत्मा कथा - प्रेरक कहानी

संतों की एक सभा चल रही थी, किसी ने एक दिन एक घड़े में गंगाजल भरकर वहां रखवा दिया ताकि संत जन जब प्यास लगे तो गंगाजल पी सकें।

एक जोड़ी, पैरों के निशान? - प्रेरक कहानी

आपने तो कहा था. कि आप हर समय मेरे साथ रहेंगे, पर मुसीबत के समय मुझे दो की जगह एक जोड़ी ही पैर ही दिखाई दिए...

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP