श्री चामुण्डा माता - आरती (Shri Chamunda Mata)


ॐ जय चामुण्डा माता मैया जय चामुण्डा माता
शरण आए जो तेरे सब कुछ पा जाता॥ ॥
ॐ जय चामुण्डा माता…॥
चण्ड-मुण्ड दो राक्षस हुए हैं बलशाली
उनको तुमने मारा क्रोध दृष्टि डाली॥
॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

चौंसठ योगिनी आकर तांडव नृत्य करें
बावन भैरव झूमे विपदा आन हरे॥
॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

शक्ति धाम कहलाती पीछे शिव मंदिर
ब्रह्मा, विष्णु, नारद मंत्र जपें अंदर॥
॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

सिंहराज यहाँ रहते घंटा ध्वनि बाजे
निर्मल धारा जल की वंडेर नदी साजे॥
॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

क्रोध रूप में खप्पर खाली नहीं रहता
शांत रूप जो ध्यावे आनंद भर देता॥
॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

हनुमत बाला योगी ठाढ़े बलशाली
कारज पूरण करती दुर्गा महाकाली॥
॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

रिद्धि-सिद्धि देकर जन के पाप हरे
शरणागत जो होता आनंद राज्य करे॥
॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

शुभ गुण मंदिर वाली ‘ॐ’ कृपा कीजै
दुख जीवन के संकट आकर हर लीजै॥
॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥

ॐ जय चामुण्डा माता मैया जय चामुण्डा माता
शरण आए जो तेरे सब कुछ पा जाता॥
॥ॐ जय चामुण्डा माता…॥ ॥

इति चामुण्डा माता आरती संपूर्णम्॥
नवरात्रि 2026 की तारीखें
Navratri 2026 Dates
दिन तिथि नवरात्रि में देवी के नाम रँग
19 मार्च अमावस्या माता शैलपुत्री पूजा, नवरात्रि घटस्थापना, नववर्ष पीला
20 मार्च द्वितीया माता ब्रह्मचारिणी पूजा, चेटी चंड हरा
21 मार्च तृतीया माता चंद्रघंटा पूजा, मत्स्य जयन्ती, गणगौर स्लेटी
22 मार्च चतुर्थी माता कुष्मांडा पूजा नारंगी
23 मार्च पंचमी माता स्कंद माता पूजा, लक्ष्मी पंचमी सफ़ेद
24 मार्च षष्ठी माता कात्यायनी पूजा, , यमुना छठ लाल
25 मार्च सप्तमी माता कालरात्रि पूजा गहरा नीला
26 अप्रैल अष्टमी महा गौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजा, अन्नपूर्णा अष्टमी, सन्धि पूजा, राम नवमी, माता सिद्धिदात्री पूजा गुलाबी
27 मार्च नवमी नवरात्रि पारण, स्वामीनारायण जयंती बैंगनी
Shri Chamunda Mata - Read in English
Om Jai Chamunda Mata Maiya Jai ​​Chamunda Mata, Sharan Aae Jo Tere Aab Kuchh Pa Jata॥ ॥, Om Jai Chamunda Mata…॥ ॥
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आरती ›

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आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला...आरती के लिरिक्स हरिहरन ने गाये हैं..

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ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजत, अनुपम रूप धरे॥

श्री चित्रगुप्त आरती

ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे। भक्तजनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥

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ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे। भक्तजनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥

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मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं,बुद्धिमतां वरिष्ठम्॥ आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥..