Shri Hanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

बहरूपियों से हमेशा सतर्क एवं सावधान रहें - प्रेरक कहानी (Bahrupiyon Se Hamesha Satartk Rahen)


बहरूपियों से हमेशा सतर्क एवं सावधान रहें - प्रेरक कहानी
Add To Favorites Change Font Size
एक कबूतर और एक कबूतरी एक पेड़ की डाल पर बैठे थे। उन्हें बहुत दूर से एक आदमी आता दिखाई दिया। कबूतरी के मन में कुछ शंका हुई और उसने कबूतर से कहा कि चलो जल्दी उड़ चले नहीं तो ये आदमी हमें मार डालेगा।
कबूतरने लंबी सांस लेते हुए आराम के साथ कबूतरी से कहा: भला उसे ध्यान से देखो तो सही, उसके कपड़े देखो, चेहरे से भोलापन टपक रहा है, ये हमें क्या मारेगा, बिलकुल सज्जन पुरुष लग रहा है।

कबूतर की बात सुनकर कबूतरी चुप हो गई। जब वह आदमी उनके पास आया तो अचानक उसने अपने वस्त्र के अंदर से तीर कमान निकाला और झट से कबूतर को मार दिया। और बेचारे उस कबूतरके वहीं प्राण पखेरू उड़ गए।

असहाय कबूतरी ने किसी तरह भाग कर अपनी जान बचाई और बिलखने लगी। उसके दुःख का कोई ठिकाना न रहा और पल भर में ही उसका सारा संसार उजड़ गया। उसके बाद वह कबूतरी रोती हुई अपनी फरियाद लेकर राजा के पास गई और राजा को उसने पूरी घटना बताई।

राजा बहुत दयालु इंसान था। राजा ने तुरंत अपने सैनिकों को उस शिकारी को पकड़कर लाने का आदेश दिया। तुरंत शिकारी को पकड़ कर दरबार में लाया गया। शिकारी ने डर के कारण अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

उसके बाद राजा ने कबूतरी को ही उस शिकारी को सजा देने का अधिकार दे दिया और उससे कहा कि: तुम जो भी सजा इस शिकारी को देना चाहो दे सकती हो।

कबूतरी ने बहुत दुःखी मन से कहा कि: हे राजन, मेरा जीवन साथी तो इस दुनिया से चला गया जो फिर कभी भी लौटकर नहीं आएगा, इसलिए मेरे विचार से इस क्रूर शिकारी को बस इतनी ही सजा दी जानी चाहिए कि अगर वो शिकारी है तो उसे हर समय शिकारी वाले कपड़े पहनना चाहिए। ये अच्छे व्यक्ति वाले कपड़े उतार दे क्योंकि अच्छे व्यक्ति वेल कपड़े पहन कर धोखे से घिनौने कर्म करने वाले सबसे बड़े नीच होते हैं।

इसलिए अपने आसपास अच्छे व्यक्ति बनने का ढोंग करने वाले बहरूपियों से हमेशा सावधान रहें। सतर्क रहें और अपना बहुत ध्यान रखें।
यह भी जानें

Prerak-kahani Kabutar Prerak-kahaniPigon Prerak-kahaniShikari Prerak-kahaniRaja Prerak-kahaniKing Prerak-kahaniHunter Prerak-kahaniBahrupiyon Prerak-kahaniKabutari Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

राम से बड़ा राम का नाम क्यों - प्रेरक कहानी

श्री राम दरबार में हनुमानजी महाराज श्री रामजी की सेवा में इतने तन्मय हो गये कि गुरू वशिष्ठ के आने का उनको ध्यान ही नहीं रहा!...

परमात्मा! जीवन यात्रा के दौरान हमारे साथ हैं - प्रेरक कहानी

प्रतिवर्ष माता पिता अपने पुत्र को गर्मी की छुट्टियों में उसके दादा-दादी के घर ले जाते । 10-20 दिन सब वहीं रहते और फिर लौट आते।..

पाप का गुरु कौन? - प्रेरक कहानी

पंडित जी कई वर्षों तक काशी में शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद अपने गांव लौटे। गांव के एक किसान ने उनसे पूछा, आप हमें यह बताइए कि पाप का गुरु कौन है?...

ह्रदय से जो जाओगे सबल समझूंगा तोहे: सूरदास जी की सत्य कथा

हाथ छुड़ाए जात हो, निवल जान के मोये । मन से जब तुम जाओगे, तब प्रवल माने हौ तोये । - सूरदास जी

हमारी लालसाएँ और वृत्तियाँ नहीं बदलती - प्रेरक कहानी

एक पेड़ पर दो बाज रहते थे। दोनों अक्सर एक साथ शिकार की तलाश में निकलते और जो भी पाते, उसे शाम को मिल-बांट कर खाते..

गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते - प्रेरक कहानी

उन्होंने मेरे शब्दो का मान रखते हुए मेरे शिष्य पर अपनी सारी कृपा उडेल दी। इसलिए कहते है गुरू की बात को गिरिधारी भी नही टाल सकते।

गुरु गूंगे, गुरु बावरे, गुरु के रहिये दास! - Guru Purnima Special - प्रेरक कहानी

गुरु गूंगे गुरु बाबरे गुरु के रहिये दास, गुरु जो भेजे नरक को, स्वर्ग कि रखिये आस!

Shiv Bhajan - Shiv Bhajan
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP