सोन महीने दी रूत आई
संगता नू होवे बधाई
मेला लगेया उथे भारी
रोनका लगीया चिन्तापूर्णी दे
भगता ने खींची त्यारी
मेले चलिये चिन्तापूर्णी दे
भक्तिभारत लिरिक्स दुरो दुरो आईया संगता
दर तेरे ते लेके मनता
आस मुराद माँ पूरी करदी
असी मांगते चिन्तापूर्णी दे
भगता ने खींची त्यारी
मेले चलिये चिन्तापूर्णी दे
किते कढ़ी चोल किते पुड़ियां छोले
जो वीं खावे जै माँ बोले
खालो चाह दे नाल पकोड़े
लंगर लगे चिन्तापूर्णी दे
भगता ने खींची त्यारी
मेले चलिये चिन्तापूर्णी दे
सोहनिया भेटा सागर गावै
माँ नू गा के अर्ज सुनावे
कुलदीप पियरिया लिखदा भेटा
राये पियरिया लिखदा भेटा
दर आके चिन्तापूर्णी दे
भगता ने खींची त्यारी
मेले चलिये चिन्तापूर्णी दे
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