प्रेरक कहानी: भरे हुए में राम को स्थान कहाँ? (Bhare Hue Main Ram Ko Sthan Kahan)


एक सन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर आये, दुकान मे अनेक छोटे-बड़े डिब्बे थे, एक डिब्बे की ओर इशारा करते हुए...

सन्यासी ने दुकानदार से पूछा: इसमे क्या है?
दुकानदारने कहा: इसमे नमक है!
सन्यासी ने फिर पूछा: इसके पास वाले मे क्या है?
दुकानदार ने कहा: इसमे हल्दी है!

इसी प्रकार सन्यासी पूछ्ते गए और दुकानदार बतलाता रहा, अंत मे पीछे रखे डिब्बे का नंबर आया...

सन्यासी ने पूछा: उस अंतिम डिब्बे मे क्या है?
दुकानदार बोला: उसमे राम-राम है
सन्यासी ने पूछा: यह राम-राम किस वस्तु का नाम है!
दुकानदार ने कहा: महात्मन! और डिब्बों मे तो भिन्न-भिन्न वस्तुएं हैं, पर यह डिब्बा खाली है, हम खाली को खाली नही कहकर राम-राम कहते हैं!

संन्यासी की आंखें खुली की खुली रह गई! ओह, तो खाली मे राम रहता है! भरे हुए में राम को स्थान कहाँ?

लोभ, लालच, ईर्ष्या, द्वेष और भली-बुरी बातों से जब दिल-दिमाग भरा रहेगा तो उसमें ईश्वर का वास कैसे होगा?

राम यानी ईश्वर तो खाली याने साफ-सुथरे मन मे ही निवास करता है! एक छोटी सी दुकान वाले ने सन्यासी को बहुत बड़ी बात समझा दी!


अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

* यदि आपको इस पेज में सुधार की जरूरत महसूस हो रही है, तो कृपया अपने विचारों को हमें शेयर जरूर करें: यहाँ शेयर करें
** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर शेयर करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ शेयर करें

प्रेरक कहानी: संगत ही गुण होत है, संगत ही गुण जाय

संगत का प्रभाव: एक राजा का तोता मर गया। उन्होंने कहा: मंत्रीप्रवर! हमारा पिंजरा सूना हो गया। इसमें पालने के लिए एक तोता लाओ।

मैं तो स्वयं शिव हूँ!

एक था भिखारी! रेल सफर में भीख माँगने के दौरान एक सूट बूट पहने सेठ जी उसे दिखे। उसने सोचा कि यह व्यक्ति बहुत अमीर लगता है...

प्रेरक कहानी: छोटी सी गौरैया का श्रीकृष्ण पर विश्वास

भगवन बोले: अपने घोंसले में तीन सप्ताह के लिए भोजन का संग्रह करो। आइये हम भी तब तक इस घंटी के नीचे विश्राम करे जब तक ये हमारे लिए उठाई ना जाये...

प्रेरक कहानी: मृत्यु एक अटल सत्य हैं

कृष्ण ने कहा: तुम्हे! किसी एक घर से मुट्ठी भर ज्वार लानी होगी और ध्यान रखना होगा कि उस परिवार में कभी किसी की मृत्यु न हुई हो..

प्रेरक कहानी: क्या आपकी दुकान में ईश्वर मिलेंगे?

आठ साल का एक बच्चा एक रूपये का सिक्का मुट्ठी में लेकर एक दुकान पर जाकर कहा: क्या आपके दुकान में ईश्वर मिलेंगे?..

प्रेरक कहानी: बांटने के लिए ईश्वर ने तुम्हें बहुत कुछ दिया है

ईश्वर ने जिसको ये तीन चीजें दी हैं वह कभी गरीब और निर्धन हो ही नहीं सकता। निर्धनता का विचार आदमी के मन में होता है, यह तो एक भ्रम है इसे निकाल दो।

प्रेरक कहानी: जीवन में, सब ईश्वर की दया ही है

अमीर सेठ अपने नौकर से तो बहुत खुश था, लेकिन जब भी कोई कटु अनुभव होता तो वह भगवान को अनाप शनाप कहता और बहुत कोसता था..

🔝