करवा चौथ श्री गणेश मंत्र (Karwa Chauth Shri Ganesh Mantra)


यह पवित्र एवं कल्याणकारी करवा चौथ श्लोक है, यह मन्त्र सुहागिन महिलाओं द्वारा पूजे जाने वाले सभी करवा चौथ माता के चित्र में अवश्य ही अंकित होता है।
श्री गणेशाय नमः करंक क्षीरसम्पूर्ण तोयपूर्णमथापि वा ।
ददामि रत्नसंयुक्त चिरंजीवतु मे पति: ॥1
इति मन्त्रेण करकान्प्रदद्याद्विजसत्तमे ।
सुवासिनीभ्यो द्द्याच्च आदद्यात्ताभ्य एववा ॥2

एवं व्रतंया कुरूते नारी सौभाग्य काम्यया ।
सौभाग्यं पुत्रपौत्रादि लभते सुस्थिरां श्रियम् ॥3

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भावार्थ
• श्री गणेश जी को नमस्कार है। दूध से भरा हुआ या फिर जल से भरा हुआ, रत्नों (या दक्षिणा/सामग्री) से युक्त यह करक (करवा) मैं दान कर रही हूँ, जिससे मेरे पति दीर्घायु हों (चिरंजीवी रहें) ॥1

• इस मंत्र को पढ़कर सुहागिन महिला को वह करवा किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण (या योग्य विद्वान) को दान देना चाहिए। इसके साथ ही, यह करवा अपनी जैसी ही अन्य सुवासिनी (सुहागिन) स्त्रियों को देना चाहिए और उनसे भी (परस्पर प्रेम व आशीर्वाद के रूप में) करवा लेना चाहिए। (करवा चौथ की पूजा में बहुधा महिलाएं आपस में करवा बदलती हैं, यह उसी परंपरा का वर्णन है) ॥2

• जो भी नारी अपने अखंड सौभाग्य की कामना से इस प्रकार विधि-विधान से (करवा चौथ का) व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य, पुत्र-पौत्र आदि का सुख और समाज में सुस्थिर (स्थायी) लक्ष्मी (धन-धान्य और यश) की प्राप्ति होती है ॥3
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करवा चौथ श्री गणेश मंत्र

यह पवित्र एवं कल्याणकारी करवा चौथ श्लोक है, यह मन्त्र सुहागिन महिलाओं द्वारा पूजे जाने वाले सभी करवा चौथ माता के चित्र में अवश्य ही अंकित होता है। भक्ति भारत वही मंत्र आप तक पहुँचा रहा है | श्री गणेशाय नमः करंक क्षीरसम्पूर्ण तोयपूर्णमथापि वा ।

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