• श्री गणेश जी को नमस्कार है। दूध से भरा हुआ या फिर जल से भरा हुआ, रत्नों (या दक्षिणा/सामग्री) से युक्त यह करक (करवा) मैं दान कर रही हूँ, जिससे मेरे पति दीर्घायु हों (चिरंजीवी रहें) ॥1
• इस मंत्र को पढ़कर सुहागिन महिला को वह करवा किसी श्रेष्ठ ब्राह्मण (या योग्य विद्वान) को दान देना चाहिए। इसके साथ ही, यह करवा अपनी जैसी ही अन्य सुवासिनी (सुहागिन) स्त्रियों को देना चाहिए और उनसे भी (परस्पर प्रेम व आशीर्वाद के रूप में) करवा लेना चाहिए। (करवा चौथ की पूजा में बहुधा महिलाएं आपस में करवा बदलती हैं, यह उसी परंपरा का वर्णन है) ॥2
• जो भी नारी अपने अखंड सौभाग्य की कामना से इस प्रकार विधि-विधान से (करवा चौथ का) व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य, पुत्र-पौत्र आदि का सुख और समाज में सुस्थिर (स्थायी) लक्ष्मी (धन-धान्य और यश) की प्राप्ति होती है ॥3
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