भक्तमाल: मल्लिनाथ स्वामी जी
अन्य नाम - मल्ली, मल्लिनाथ, मल्ली कुमारी, मल्लिनाथ भगवान
शिष्य - 28 प्रमुख शिष्य (जिन्हें गणधर कहा जाता है), भिषज
आराध्य - जैन धर्म
लिंग - पुरुष (दिगंबर), महिला (श्वेतांबर)
उम्र: 56,000
जन्म स्थान - मिथिलापुरी जैन तीर्थ, मिथिला
निर्वाण: सम्मेद शिखरजी (पारसनाथ पहाड़ी)
वैवाहिक स्थिति - आजीवन ब्रह्मचारी
पिता - राजा कुम्भा
माता - रानी प्रजापति
प्रसिद्ध - जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर
वंश: हरिवंश
प्रतीक (लंछन): कलश (घड़ा)
यक्ष: कुबेर
यक्षिणी: धारणाप्रिया (या परंपराओं के अनुसार अपराजिता)
केवल ज्ञान: गहन तपस्या और ध्यान से प्राप्त किया गया
मल्लिनाथ भगवान जैन परंपरा के उन्नीसवें तीर्थंकर हैं, जो सर्वोच्च आत्म-अनुशासन, पवित्रता और वैराग्य के लिए पूजनीय हैं। जैन शास्त्रों के अनुसार, भगवान मल्लिनाथ का जन्म मिथिला नगरी में राजा कुंभ और रानी प्रजापति के घर हुआ था।
आध्यात्मिक महत्व
मल्लीनाथ भगवान सांसारिक सुखों से विरक्ति के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। जैन ग्रंथ इस बात पर प्रकाश डालते हैं कि दिव्य सौंदर्य और राजसी सुख-सुविधाएं भी मोक्ष के मार्ग पर चल रही आत्मा को विचलित नहीं कर सकीं। भक्तिभारत के अनुसार, उनका जीवन यह शिक्षा देता है कि सच्ची विजय (मल्ल = विजय) अहंकार, इच्छा और आसक्ति पर विजय है।
“स्वयं पर विजय ही सबसे बड़ी विजय है।”
मल्लिनाथ भगवान मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं मल्लिनाथाय नमः
भक्तों के लिए संदेश
❀ आत्म-संयम और विनम्रता का अभ्यास करें
❀ अहंकार और आकर्षण से ऊपर उठें
❀ अहिंसा, अपरिग्रह और सत्य के मार्ग का अनुसरण करें