Haanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

श्रीदासजी (Shri Dasji)


भक्तमाल | श्रीदासजी
आराध्य - श्रीठाकुरजी
प्रसिद्ध - सन्त सेवा
भक्तमाल कथा
आप सन्तों की सेवा को भगवान्‌ की सेवा से बढ़कर मानते थे। एक बार आपके यहाँ कई सन्त आये। सन्ध्या-आरती हुई। रात्रि-भोजन के बाद आप सन्तों की चरण-सेवा में लग गये। मन्दिर में श्रीठाकुरजी को शयन कराना भूल गये। प्रात:काल मंगला के समय आप मन्दिर में जाने लगे तो मन्दिर के किवाड़ भीतर से बन्द मिले। प्रयत्न करने पर भी किवाड़ नहीं खुले। तब आप बड़े असमंजस में पड़ गये। इतने में देवलोक से आकाशवाणी हुई- अब किवाड़ नहीं खुलेंगे, मेरी सेवा रहने दो, अब सन्तों की ही सेवा करो। मैं रातभर सिंहासन पर खड़ा रहा हूँ, तुमने मुझे शयन नहीं कराया।

यह सुनकर श्री दासजी ने सरल भावसे भगवन से निवेदन किया- प्रभो ! सन्त-सेवा में समय देने के कारण यदि आपकी सेवामें चूक हुई तो आपके नाराज होने का भय मुझे बिल्कुल नहीं है। अपितु, आपकी सेवा में लगा रहूँ और सन्त-सेवा में भूल-चूक हो जाय, तब मुझे आपकी नाराजगी का अति भारी भय रहता है। यह सुनते ही प्रभु प्रसन्न हो गये। किवाड़ पूर्वतः खुल गये। हम तुम पर बहुत प्रसन्न हैं, इस भावसे सन्तसेवा करने वाले भक्त मुझे अपने से भी अधिक प्रिय हैं, और ये भक्त मुझे अपने वश में कर लेते हैं। ऐसा कहकर भगवन ने श्री दासजी को प्रत्यक्ष दर्शन दिए। इस दया के लिए दासजी भगवान के चरणों में लिपट गये। प्रभु उन्हें उठाकर छाती से लगा लिया।

Shri Dasji in English

Bhaktamal - Shridasji | Worshipped by - Shri Thakurji | Famous for - Sant Sewa | He considered serving saints to be greater than serving God.
यह भी जानें

Bhakt Shri Dasji BhaktSant Sevi Bhakt

अगर आपको यह भक्तमाल पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस भक्तमाल को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Bhakt ›

देवी अहल्या

अहिल्या हिंदू इतिहास में सबसे पूजनीय महिला पात्रों में से एक हैं, जो अपनी सुंदरता, पवित्रता, धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति के लिए जानी जाती हैं।

ब्रह्मेंद्र स्वामी

परमहंस ब्रह्मेंद्रस्वामी | मूल नाम - विष्णुपंत कुलकर्णी | आराध्य - भगवान परशुराम | प्रसिद्धि - छत्रपति शाहू प्रथम के गुरु, परशुराम मंदिर के संथापक

गौतम महर्षि

गौतम महर्षि (जिन्हें ऋषि गौतम के नाम से भी जाना जाता है) हिंदू परंपरा के सबसे पूजनीय ऋषियों में से एक हैं और विभिन्न ग्रंथों में उन्हें महान सप्तऋषियों (सात ऋषियों) में गिना जाता है।

सत्य साईं बाबा

सत्य साईं बाबा एक भारतीय गुरु थे। चौदह वर्ष की आयु में उन्होंने दावा किया कि वह शिरडी साईं बाबा के अवतार थे और अपने भक्तों की सेवा करने के लिए अपना घर छोड़ दिया। उनका निवास प्रशांति निलयम आश्रम था, जो तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को समान रूप से आकर्षित करता है।

ऋषि जमदग्नि

आदि कवि के रूप में पूजनीय महर्षि वाल्मीकि, सनातन धर्म के प्रथम कवि और महाकाव्य श्री रामायण के दिव्य रचयिता हैं।

आचार्य विद्यासागर

आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज एक दिगंबर जैन आचार्य (दिगंबर जैन भिक्षु) हैं। उन्हें 1972 में आचार्य का दर्जा दिया गया था।

महर्षि वाल्मीकि

आदि कवि के रूप में पूजनीय महर्षि वाल्मीकि, सनातन धर्म के प्रथम कवि और महाकाव्य श्री रामायण के दिव्य रचयिता हैं।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP