Shri Krishna Bhajan
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श्रीदासजी (Shri Dasji)


भक्तमाल | श्रीदासजी
आराध्य - श्रीठाकुरजी
प्रसिद्ध - सन्त सेवा
भक्तमाल कथा
आप सन्तों की सेवा को भगवान्‌ की सेवा से बढ़कर मानते थे। एक बार आपके यहाँ कई सन्त आये। सन्ध्या-आरती हुई। रात्रि-भोजन के बाद आप सन्तों की चरण-सेवा में लग गये। मन्दिर में श्रीठाकुरजी को शयन कराना भूल गये। प्रात:काल मंगला के समय आप मन्दिर में जाने लगे तो मन्दिर के किवाड़ भीतर से बन्द मिले। प्रयत्न करने पर भी किवाड़ नहीं खुले। तब आप बड़े असमंजस में पड़ गये। इतने में देवलोक से आकाशवाणी हुई- अब किवाड़ नहीं खुलेंगे, मेरी सेवा रहने दो, अब सन्तों की ही सेवा करो। मैं रातभर सिंहासन पर खड़ा रहा हूँ, तुमने मुझे शयन नहीं कराया।

यह सुनकर श्री दासजी ने सरल भावसे भगवन से निवेदन किया- प्रभो ! सन्त-सेवा में समय देने के कारण यदि आपकी सेवामें चूक हुई तो आपके नाराज होने का भय मुझे बिल्कुल नहीं है। अपितु, आपकी सेवा में लगा रहूँ और सन्त-सेवा में भूल-चूक हो जाय, तब मुझे आपकी नाराजगी का अति भारी भय रहता है। यह सुनते ही प्रभु प्रसन्न हो गये। किवाड़ पूर्वतः खुल गये। हम तुम पर बहुत प्रसन्न हैं, इस भावसे सन्तसेवा करने वाले भक्त मुझे अपने से भी अधिक प्रिय हैं, और ये भक्त मुझे अपने वश में कर लेते हैं। ऐसा कहकर भगवन ने श्री दासजी को प्रत्यक्ष दर्शन दिए। इस दया के लिए दासजी भगवान के चरणों में लिपट गये। प्रभु उन्हें उठाकर छाती से लगा लिया।

Shri Dasji in English

Bhaktamal - Shridasji | Worshipped by - Shri Thakurji | Famous for - Sant Sewa | He considered serving saints to be greater than serving God.
यह भी जानें

Bhakt Shri Dasji BhaktSant Sevi Bhakt

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रामकृष्ण परमहंस

रामकृष्ण परमहंस एक सरल, प्रतिभाशाली, जीवित प्राणियों की सेवा करने वाले और देवी काली के उपासक थे। उन्होंने हिंदू धर्म को पुनर्जीवित किया और उनके उपदेशों ने नास्तिक स्वामी विवेकानंद को आकर्षित किया जो एक समर्पित शिष्य बन गए।

स्वामी आदिनाथ जी

आदिनाथ जी, जिन्हें ऋषभनाथ के नाम से भी जाना जाता है, जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। उन्हें वर्तमान काल में जैन आध्यात्मिक परंपरा का संस्थापक माना जाता है।

गुरु राम दास

असली नाम - भाई जेठा | गुरु - गुरु अमर दास जी | जन्म स्थान - लाहौर | जन्म - शुक्रवार, 9 अक्टूबर 1534 | मृत्यु - शनिवार, 16 सितंबर 1581
वैवाहिक स्थिति - विवाहित | पिता - भाई हरि दास जी | माता - माता अनूप देवी जी

पूज्य श्री मोटा

पूज्य श्री मोटा एक आध्यात्मिक नेता थे जिन्होंने भारत के गुजरात में नडियाद और सूरत में आश्रम स्थापित किए। पूज्य श्री मोटा ने अपनी पूजा-अर्चना को किसी एक पारंपरिक मानवीय रूप वाले देवता या ईश्वर के किसी संप्रदाय-विशेष के रूप तक सीमित नहीं रखा।

महाराज अग्रसेन

महाराजा अग्रसेन सौर वंश के एक वैश्य राजा थे जिन्होंने अपनी प्रजा की भलाई के लिए वणिका धर्म को अपनाया था। वस्तुतः, अग्रवाल का अर्थ है "अग्रसेन के बच्चे" या "अग्रसेन के लोग", हरियाणा क्षेत्र में हिसार के पास प्राचीन कुरु पांचाल में एक शहर, जिसे महाराजा अग्रसेन द्वारा स्थापित किया गया था।

ऋषि वसिष्ठ

ऋषि वसिष्ठ भारतीय परंपरा में सबसे प्रतिष्ठित संतों में से एक हैं और सप्तर्षियों (सात महान ऋषियों) में एक प्रमुख ऋषि हैं।

मीराबाई

मीराबाई, 16वीं शताब्दी की हिंदू रहस्यवादी कवयित्री और भगवान कृष्ण की परम भक्त थीं। उनका जन्म कुडकी में एक राठौर राजपूत शाही परिवार में हुआ था, वह एक प्रसिद्ध भक्ति संत थीं।

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