🌎वराह जयन्ती - Varaha Jayanti

Varaha Jayanti Date: 30 August 2022

सतयुग में भगवान विष्णु के तीसरे अवतार भगवान वराह के अवतरण दिवस को वराह जयंती के नाम से जाना जाता है। भगवान वराह का रूप आधा वराह आधा मानव का था, उन्होने हिरण्याक्ष को पराजित कर पृथ्वी को बचाया था।

ऐसा माना जाता है कि भगवान वराह की पूजा करने से भक्त को स्वास्थ्य, धन एवं सभी प्रकार के सुख की प्राप्ति होती है। वराह जयंती मुख्य रूप से दक्षिण भारत में मनाए जाने वाला त्यौहार है। भक्त सुबह जल्दी स्नान करने के पश्चात भगवान विष्णु के मंदिर में पूजा अर्चना के लिए जाते हैं।

श्रीजयदेव गोस्वामी द्वारा रचित श्रीगीतगोविन्दम के श्री दशावतार स्तोत्र में भी भगवान वराह को श्रीहरि का तृतीय अवतार बताया गया है।

वसति दशनशिखरे धरणी तव लग्ना ।
शशिनि कलंकलेव निमग्ना ।
केशव धृतसूकररूप जय जगदीश हरे ॥3॥

अर्थात: हे जगदीश! हे केशव! हे हरे! हे वराहरूपधारी ! जिस प्रकार चन्द्रमा अपने भीतर कलंकके सहित सम्मिलित रूपसे दिखाई देता है, उसी प्रकार आपके दाँतों के ऊपर पृथ्वी अवस्थित है ॥3॥

Varaha Jayanti in English

The incarnation day of Lord Varaha, the third incarnation of Lord Vishnu in Satyuga, is known as Varaha Jayanti.

संबंधित जानकारियाँ

भविष्य के त्यौहार
17 September 20235 September 202425 August 202513 September 20263 September 2027
आवृत्ति
वार्षिक
समय
1 दिन
महीना
अगस्त / सितंबर
कारण
भगवान वराह का अवतरण दिवस
उत्सव विधि
भजन, कीर्तन
महत्वपूर्ण जगह
घर, भगवान विष्णु मंदिर
पिछले त्यौहार
9 September 2021
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