Shri Krishna Bhajan
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कथाएँ

योगिनी एकादशी व्रत कथा

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी जिसे योगिनी एकादशी कहते हैं। योगिनी एकादशी का उपवास रखने से समस्त पापों का नाश होता है, तथा इस लोक में भोग और परलोक मुक्ति भी मिलती है...

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आषाढ़ संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा

हे महाराज! द्वापर युग में महिष्मति नगरी का महीजित नामक राजा था। वह बड़ा ही पुण्यशील और प्रतापी राजा था। वह अपनी प्रजा का पालन पुत्रवत करता था।

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गया तीर्थ की पौराणिक कथा

ब्रह्माजी जब सृष्टि की रचना कर रहे थे उस दौरान उनसे असुर कुल में गया नामक असुर की रचना हो गई। गया असुरों के संतान रूप में पैदा नहीं हुआ था इसलिए उसमें आसुरी प्रवृति नहीं थी।

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वट सावित्री व्रत कथा

भद्र देश के एक राजा थे, जिनका नाम अश्वपति था। भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान न थी...

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शनि प्रदोष व्रत कथा

शनि प्रदोष व्रत कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक नगर सेठ थे। सेठजी के घर में हर प्रकार की सुख-सुविधाएं थीं लेकिन संतान नहीं होने के कारण सेठ और सेठानी हमेशा दुःखी रहते थे।

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पाण्डव निर्जला एकादशी व्रत कथा

निर्जला एकादशी व्रत का पौराणिक महत्त्व और आख्यान भी कम रोचक नहीं है। जब सर्वज्ञ वेदव्यास ने पांडवों को चारों पुरुषार्थ संकल्प कराया था...

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गंगा दशहरा कथा

भगवान् श्रीरामका जन्म अयोध्याके सूर्यवंशमें हुआ था। चक्रवर्ती महाराज सगर उनके पूर्वज थे। उनकी केशिनी और सुमति नामकी दो रानियाँ थीं।

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माँ धूमावती उत्पत्ति कथा

देवी धूमावती की पौराणिक कथा: पुराणों के अनुसार एक बार माँ पार्वती को बहुत तेज भूख लगी हुई थी। किंतु कैलाश पर उस समय कुछ न रहने के कारण..माँ धूमावती की मुद्रा

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सोमवती अमावस्या व्रत कथा

सोमवती अमावस्या व्रत कथा के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण परिवार था, उस परिवार में पति-पत्नी एवं उसकी एक पुत्री भी थी..

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 30

नारदजी बोले- हे तपोनिधे! तुमने पहले पतिव्रता स्त्री की प्रशंसा की है अब आप उनके सब लक्षणों को मुझसे कहिये।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 28

श्रीनारायण बोले- चित्रगुप्त धर्मराज के वचन को सुनकर अपने योद्धाओं से बोले, यह कदर्य प्रथम बहुत समय तक अत्यन्त लोभ से ग्रस्त हुआ, बाद चोरी करना शुरू किया।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 27

श्रीनारायण बोले- इस प्रकार कह कर मौन हुए मुनिश्वर बाल्मीकि मुनि को सपत्नीक राजा दृढ़धन्वा ने नमस्कार किया, और प्रसन्नता के साथ भक्तिपूर्वक पूजन किया।

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परमा एकादशी व्रत कथा

श्री भगवान बोले, हे अर्जुन! अधिकमास के कृष्ण पक्ष में जो एकादशी आती है वह परमा एकादशी कहलाती है।

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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 26

अब उद्यापन के पीछे व्रत के नियम का त्याग कहते हैं। बाल्मीकि मुनि बोले, 'सम्पूर्ण पापों के नाश के लिये गरुडध्वज भगवान्‌ की प्रसन्नता के लिये धारण किये व्रत नियम का विधि पूर्वक त्याग कहते हैं।

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