पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 16
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा के अध्याय 16 के अंतर्गत, श्रीनारायण बोले, हे महाप्राज्ञ! हे नारद! बाल्मीकि ऋषि ने जो परम अद्भुत चरित्र दृढ़धन्वा राजा से कहा उस चरित्र को मैं कहता हूँ तुम सुनो।
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 15
पुरुषोत्तम मास की १४ अध्याय वीं कथा के उपांत १५ वीं कथा इस प्रकार से हैं. . श्रीनारायण बोले, नारद! सुदेव शर्मा ब्राह्मण हाथ जोड़कर गद्गद स्वर से भक्तवत्सल श्रीकृष्णदेव की स्तुति करता हुआ बोला
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 14
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा के अध्याय 14 के अंतर्गत, श्रीनारायणजी बोले, इसके बाद चिन्ता से आतुर राजा दृढ़धन्वा के घर बाल्मीकि मुनि आये जिन्होंने परम अद्भुत तथा सुन्दर रामचन्द्रजी का चरित्र वर्णन किया है।
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 13
ऋषि लोग बोले, 'हे सूत! हे महाभाग! हे सूत! हे बोलने वालों में श्रेष्ठ! पुरुषोत्तम के सेवन से राजा दृढ़धन्वा शोभन राज्य, पुत्र आदि तथा पतिव्रता स्त्री को किस तरह प्राप्त किया
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जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है वो गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है। गुरुवार प्रदोष व्रत रखने से भक्तों को अपने पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। एक बार इन्द्र और वृत्रासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ।..
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 12
नारदजी बोले - जब भगवान् शंकर चले गये तब हे प्रभो! उस बाला ने शोककर क्या किया! सो मुझ विनीत को धर्मसिद्धि के लिए कहिये।
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श्री भगवान बोले, हे राजन्! अधिकमास में शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है वह पद्मिनी (कमला) एकादशी कहलाती है।
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 11
नारदजी बोले - सब मुनियों को भी जो दुष्कर कर्म है ऐसा बड़ा भारी तप जो इस कुमारी ने किया वह हे महामुने! हमसे सुनाइये।
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 10
नारद जी बोले - हे तपोनिधे! परम क्रोधीदुर्वासा मुनि ने विचार करके उस कन्या से क्या उपदेश दिया। सो आप मुझसे कहिये।
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 8
सूतजी बोले - हे तपोधन! विष्णु और श्रीकृष्ण के संवाद को सुन सन्तुष्टमन नारद, नारायण से पुनः प्रश्न करने लगे।
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 7
सूतजी बोले - हे तपोधन! आप लोगों ने जो प्रश्न किया है वही प्रश्न नारद ने नारायण से किया था सो नारायण ने जो उत्तर दिया वही मैंआप लोगों से कहता हूँ।
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 6
नारदजी बोले - भगवान् गोलोक में जाकर क्या करते हैं? हे पापरहित! मुझ श्रोता के ऊपर कृपा करके कहिये।
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 5
नारद जी बोले - हे महाभाग! हे तपोनिधे! इस प्रकार अधिमास के वचनों को सुनकर हरि ने चरणों के आगे पड़े हुए अधिमास से क्या कहा?
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पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 4
श्रीनारायण बोले - हे नारद! भगवान् पुरुषोत्तम के आगे जो शुभ वचन अधिमास ने कहे वह लोगों के कल्याण की इच्छा से हम कहते हैं, सुनो।
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