पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 25
दृढ़धन्वा बोला- हे ब्रह्मन्! हे मुने! अब आप पुरुषोत्तम मास के व्रत करने वाले मनुष्यों के लिए कृपाकर उद्यापन विधि को अच्छी तरह से कहिए।
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 24
मणिग्रीव बोला- हे द्विज! विद्वानों से पूर्ण और सुन्दर चमत्कारपुर में धर्मपत्नी के साथ में रहता था। धनाढय, पवित्र आचरण वाला, परोपकार में तत्पर मुझको किसी समय संयोग से दुष्ट बुद्धि पैदा हुई।
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 23
दृढ़धन्वा राजा बोला - हे मुनियों में श्रेष्ठ! हे दीनों पर दया करने वाले! श्रीपुरुषोत्तम मास में दीप-दान का फल क्या है? सो कृपा करके मुझसे कहिये।
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 22
दृढ़धन्वा राजा बोला - हे तपोधन! पुरुषोत्तम मास के व्रतों के लिए विस्तार पूर्वक नियमों को कहिये। भोजन क्या करना चाहिये? और क्या नहीं करना चाहिये? और व्रती को व्रत में क्या मना है? विधान क्या है?
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 21
बाल्मीकि मुनि बोले - इसके बाद फिर प्रतिभा की अनलोत्तारण क्रिया करके प्राण प्रतिष्ठा करें। अन्यथा यदि प्राण प्रतिष्ठा नहीं करता है तो वह प्रतिमा धातु ही कही जायगी
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 20
सूतजी बोले - हे विप्रो! नारायण के मुख से राजा दृढ़धन्वा के पूर्वजन्म का वृत्तान्त श्रवणकर अत्यन्त तृप्ति न होने के कारण नारद मुनि ने श्रीनारायण से पूछा।
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 19
श्रीसूत जी बोले - हे तपस्वियो! इस प्रकार कहते हुए श्रीनारायण को मुनिश्रेष्ठ नारद मुनि ने मधुर वचनों से प्रसन्न करके कहा।
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 18
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा के अध्याय 17 के उपरांत अध्याय 18 के अंतर्गत नारद जी बोले, हे तपोनिधे! उसके बाद साक्षात् भगवान् बाल्मीकि मुनि ने राजा दृढ़धन्वा को क्या कहा सो आप कहिये।
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 17
पुरुषोत्तम मास की 17 वीं कथा इस प्रकार से हैं. . नारदजी बोले, हे कृपा के सिन्धु! उसके बाद जागृत अवस्था को प्राप्त उस राजा दृढ़धन्वा का क्या हुआ?
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 16
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा के अध्याय 16 के अंतर्गत, श्रीनारायण बोले, हे महाप्राज्ञ! हे नारद! बाल्मीकि ऋषि ने जो परम अद्भुत चरित्र दृढ़धन्वा राजा से कहा उस चरित्र को मैं कहता हूँ तुम सुनो।
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 15
पुरुषोत्तम मास की १४ अध्याय वीं कथा के उपांत १५ वीं कथा इस प्रकार से हैं. . श्रीनारायण बोले, नारद! सुदेव शर्मा ब्राह्मण हाथ जोड़कर गद्गद स्वर से भक्तवत्सल श्रीकृष्णदेव की स्तुति करता हुआ बोला
Katha
श्री सत्यनारायण कथा - प्रथम अध्याय
सूतजी जी नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि ऋषियों से वह कथा सुनाई जो भगवान ने स्वयं नारद जी को सुनाई.. एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, अठ्ठासी हजार ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु!...
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 14
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा के अध्याय 14 के अंतर्गत, श्रीनारायणजी बोले, इसके बाद चिन्ता से आतुर राजा दृढ़धन्वा के घर बाल्मीकि मुनि आये जिन्होंने परम अद्भुत तथा सुन्दर रामचन्द्रजी का चरित्र वर्णन किया है।
Katha
पुरुषोत्तम मास माहात्म्य कथा: अध्याय 13
ऋषि लोग बोले, 'हे सूत! हे महाभाग! हे सूत! हे बोलने वालों में श्रेष्ठ! पुरुषोत्तम के सेवन से राजा दृढ़धन्वा शोभन राज्य, पुत्र आदि तथा पतिव्रता स्त्री को किस तरह प्राप्त किया
Katha
जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है वो गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है। गुरुवार प्रदोष व्रत रखने से भक्तों को अपने पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। एक बार इन्द्र और वृत्रासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ।..
Katha