किसी नगर में एक धनी व्यापारी रहता था। दूर-दूर तक उसका व्यापार फैला हुआ था। नगर के सभी लोग उस व्यापारी का सम्मान करते थे..
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भगवान श्रीकृष्ण ने कहा: हे धर्मराज! चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी के नाम से जाना जाता है।
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श्री विष्णु मत्स्य अवतार पौराणिक कथा
एक बार ब्रह्मा जी के पास से वेदों को एक बहुत बड़े दैत्य हयग्रीव ने चुरा लिया। चारों ओर अज्ञानता का अंधकार फैल गया और पाप तथा अधर्म का बोल-बाला हो गया।
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गणगौर व्रत कथा | भगवान शंकर, माता पार्वती जी एवं नारदजी के साथ भ्रमण हेतु चल दिए। वे चलते-चलते चैत्र शुक्ल तृतीया को एक गाँव में पहुँचे।..
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भगवान श्रीकृष्ण ने कहा: हे अर्जुन! चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।
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एक बुढ़िया थी, उस बुढ़िया का एक बेटा था जिसका नाम था रामनाथ। रामनाथ धन कमाने के लिए परदेस चला गया।...
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भद्र देश के एक राजा थे, जिनका नाम अश्वपति था। भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान न थी...
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बसौड़ा व्रत कथा | शीतला माता धरती पर राजस्थान के डुंगरी गाँव में आईं और देखा कि इस गाँव में मेरा मंदिर नहीं है, और ना ही मेरी पूजा होती है..
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वसिष्ठजी द्वारा सुनाई गई राजा अनरण्य की कथा
भगवान शिव की प्रेरणा से सप्तऋषि वसिष्ठजी ने गिरिश्रेष्ठ हिमालय को सुनाई अनरण्य की कथा। इन्द्रसावर्णि नामक चौदहवें मनुके वंश में मंगलारण्यका का महाबलवान् शिव भक्त पुत्र अनरण्य उत्पन्न हुआ था। वह राजराजेश्वर तथा सातों द्वीपोंका सम्राट् था।
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श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग प्रादुर्भाव पौराणिक कथा
शिव पुराण के अनुसार सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, भगवान शिव का प्रथम ज्योतिर्लिंग है। पुराणो में सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना से सम्बंधित कथा इस प्रकार है...
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वीर तेजाजी लोकदेवता, कृषि कार्यो के उपकारक देवता, प्रणवीर, युद्धवीर, सत्यवीर, परमार्थी, वीर शिरोमणि थे।
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त्रेता युग में महाराजा मान्धाता के तीन पुत्र हुए, अमरीष, पुरू और मुचुकुन्द। युद्ध नीति में निपुण होने से देवासुर संग्राम में इंद्र ने महाराज मुचुकुन्द को अपना सेनापति बनाया।..
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एक बार सतयुग में महाविनाश उत्पन्न करने वाला ब्रह्मांडीय तूफान उत्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण विश्व नष्ट होने लगा इससे चारों ओर हाहाकार मच गया। संसार की रक्षा करना असंभव हो गया...
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देवी धूमावती की पौराणिक कथा: पुराणों के अनुसार एक बार माँ पार्वती को बहुत तेज भूख लगी हुई थी। किंतु कैलाश पर उस समय कुछ न रहने के कारण..माँ धूमावती की मुद्रा
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चैत्र संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा
एक समय कैलाश में माता पार्वती तथा श्री गणेश जी महाराज विराजमान थे तब 12 माह की गणेश चतुर्थी का प्रसंग चल पड़ा। पार्वती जी ने पूछा कि हे पुत्र ! चैत्र कृष्ण चतुर्थी को गणेश की पूजा कैसे करनी चाहिए?
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