मुख्य आकर्षण - Key Highlights |
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| ◉ सूर्यपुत्र दानवीर कर्ण यहाँ 50 किलो सोना दैनिक दान किया करते थे। |
| ◉ बूढ़ी गंगा पुल के निकट। |
कर्ण घाट मंदिर पर सूर्यपुत्र दानवीर कर्ण भगवान शिव की पूजा करने के पश्चात, सवामन सोना प्रतिदिन दान किया करते थे। मान्यता के अनुसार, उसी स्थान 2012 की दीपावली को शिवलिंग की पुनः स्थापना कर दी गयी है। ऐसा माना जाता है कि पास ही मे एक देवी माँ का मंदिर था। जो कर्ण को सोना दिया करतीं थीं, आज वो मंदिर विलुप्त हो चुका है या धरती मे समा गया है।
हस्तिनापुर का पुनर्विकास, आज़ादी के बाद पंडित जवाहर लाल नेहरू ने किया था। उसी के अंतर्गत राज्य सरकार की मदद से मंदिर का पुनर्घटन किया गया। आज के मंदिर का यह स्वरूप स्वामी शंकर देव जी की अनन्य भक्ति, सेवा और परिश्रम का फल है।
आज का कर्ण मंदिर बूढ़ी गंगा के पुल के पास स्थित है। माना जाता है कि, महाभारत काल मे गंगाजी, इसी घाट से होकर गुजरती थीं। गंगा जी का प्रवाह इस स्थान से दूर होजाने की वजह से, अब इस विलुप्त धारा को बूढ़ी गंगाजी के नाम से जाना जाने लगा है। कर्ण घाट से थोड़ा ही दूर, दौपदी घाट को बूढ़ी गंगा पुल के विपरीत दिशा मे देखा जा सकता है

New temple is the result of exclusive devotion, dedication and hard work of Swami Shankar Dev Ji.

On this ghat, Sun`s son Karan used to donate daily Savanama gold.
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