मुख्य आकर्षण - Key Highlights |
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| ◉ मंगला गौरी मंदिर 18 प्रमुख महा शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। |
| ◉ यहाँ देवी की पूजा स्तन के प्रतीकात्मक रूप में की जाती है। |
| ◉ यह मंदिर मंगला गौरी पहाड़ी पर स्थित है। |
मंगला गौरी मंदिर, जिसे माँ मंगला गौरी शक्तिपीठ के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सम्मानित शक्तिपीठों में से एक है। बिहार के गया में मंगला गौरी पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर माता मंगला गौरी को समर्पित है, जो माँ पार्वती या शक्ति का ही एक रूप हैं। इस शक्तिपीठ में माँ सती के (स्तन) गिरे थे, इसलिए इस मंदिर को शक्ति पूजा का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है और यहाँ भक्त परिवार की भलाई, समृद्धि और वैवाहिक सुख के लिए देवी का आशीर्वाद लेने आते हैं। इसे 18 प्रमुख (महा) शक्ति पीठों में से एक माना जाता है।
मंगला गौरी मंदिर में दर्शन का समय
बिहार के गया में स्थित माँ सर्व मंगला गौरी शक्तिपीठ मंदिर दर्शन के लिए रोज़ाना सुबह 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है।
मंगला गौरी मंदिर के मुख्य त्योहार
नवरात्रि इस मंदिर का मुख्य त्योहार है। मंगला गौरी व्रत भी बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। भक्त देवी मंगला गौरी की पूजा करते हैं और अपने पति की भलाई और लंबी उम्र तथा परिवार की खुशी और समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हैं।
मंगला गौरी मंदिर कैसे पहुँचें
यह मंदिर बिहार के गया में मंगला गौरी पहाड़ी पर स्थित है। गया सड़क मार्ग से पटना, बोधगया और बिहार के अन्य शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। मंदिर तक पहुँचने के लिए गया जंक्शन मुख्य रेलवे स्टेशन है। गया अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा है।
गया में, यह पवित्र स्थल माँ मंगला गौरी से जुड़ा है। हिंदू परंपरा के अनुसार, सती के आत्मदाह के बाद भगवान शिव उनके शरीर को ले जा रहे थे, और भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र ने शरीर को कई हिस्सों में विभाजित कर दिया। जिन स्थानों पर शरीर के पवित्र अंग गिरे, वे शक्तिपीठ बन गए।
यहाँ देवी की पूजा स्तन के प्रतीकात्मक रूप में की जाती है, जो दिव्य पोषण, भलाई और जीवन का प्रतीक है। अग्नि पुराण, मार्कंडेय पुराण और कई तांत्रिक ग्रंथों में इसका ज़िक्र है। गर्भगृह की छत नीची है और प्रवेश द्वार छोटा है, इसलिए भक्तों को अंदर जाते समय झुकना पड़ता है। यहाँ देवी का पवित्र प्रतीक और साथ ही लगातार जलने वाला तेल का दीपक मौजूद है।
आस-पास के परिसर में भगवान शिव, भगवान गणेश, भगवान हनुमान, माँ काली, दुर्गा और महिषासुर मर्दिनी को समर्पित छोटे मंदिर भी हैं। मुख्य मंदिर के सामने एक छोटा सभा-भवन और एक आँगन है जिसमें हवन कुंड बना हुआ है।
यह मंदिर मंगला गौरी पहाड़ी पर स्थित है और यहाँ तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं। पहाड़ी की चोटी पर इसकी छोटी सी जगह, पवित्र गर्भगृह और आसपास की धार्मिक संरचनाएँ इसे एक खास तीर्थस्थल का माहौल देती हैं। इस जगह से ऐतिहासिक शहर गया के कुछ हिस्सों का नज़ारा भी दिखता है। चढ़ाई के लिए नीचे से लगभग 200 पत्थर की सीढ़ियाँ चढ़नी होंगी।
6 AM - 8 PM
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