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Gopashtami 2018


Updated: Oct 23, 2017 22:24 PM About | Dates | Read Also | Kathayen


Upcoming Event: 16 November 2018
On गोपाष्टमी (Gopashtami) Nanda Maharaja performed a ceremony for the cows and Shri Krishna when He reached the pauganda age. This was the day for Shri Krishna and Balarama to herd the cows for the first time. Gopashtami is celebrated 7 days after famous festival Govardhan Puja.

On गोपाष्टमी (Gopashtami) Nanda Maharaja performed a ceremony for the cows and Shri Krishna when He reached the pauganda age. This was the day for Shri Krishna and Balarama to herd the cows for the first time. Gopashtami is celebrated 7 days after famous festival Govardhan Puja.

Related Name
Gopashtmi

गोपाष्टमी पर्व से जुडी प्रसिद्ध पौराणिक कथाये!

गाय का दूध, गाय का घी, दही, छांछ यहाँ तक की मूत्र भी मनुष्य जाति के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। गोपाष्टमी त्यौहार हमें बताता हैं कि हम सभी अपने पालन के लिये गाय पर निर्भर करते हैं इसलिए वो हमारे लिए पूज्यनीय हैं। और हिन्दू संस्कृति, गाय को माँ का दर्जा देती हैं।

पौराणिक कथा 1: जब कृष्ण भगवान ने अपने जीवन के छठे वर्ष में कदम रखा। तब वे अपनी मैया यशोदा से जिद्द करने लगे कि वे अब बड़े हो गये हैं और बछड़े को चराने के बजाय वे गैया चराना चाहते हैं। उनके हठ के आगे मैया को हार माननी पड़ी और मैया ने उन्हें अपने पिता नन्द बाबा के पास इसकी आज्ञा लेने भेज दिया। भगवान कृष्ण ने नन्द बाबा के सामने जिद्द रख दी कि अब वे गैया ही चरायेंगे। नन्द बाबा गैया चराने के मुहूर्त के लिए, शांडिल्य ऋषि के पास पहुँचे, बड़े अचरज में आकर ऋषि ने कहा कि, अभी इसी समय के आलावा कोई शेष मुहूर्त नहीं हैं अगले बरस तक। शायद भगवान की इच्छा के आगे कोई मुहूर्त क्या था। वह दिन गोपाष्टमी का था। जब श्री कृष्ण ने गैया पालन शुरू किया। उस दिन माता ने अपने कान्हा को बहुत सुन्दर तैयार किया। मौर मुकुट लगाया, पैरों में घुंघरू पहनाये और सुंदर सी पादुका पहनने दी लेकिन कान्हा ने वे पादुकायें नहीं पहनी। उन्होंने मैया से कहा अगर तुम इन सभी गैया को चरण पादुका पैरों में बांधोगी तब ही मैं यह पहनूंगा। मैया ये देख भावुक हो जाती हैं और कृष्ण बिना पैरों में कुछ पहने अपनी गैया को चारण के लिए ले जाते। गौ चरण करने के कारण ही,श्री कृष्णा को गोपाल या गोविन्द के नाम से भी जाना जाता है।

पौराणिक कथा 2: ब्रज में इंद्र का प्रकोप इस तरह बरसा की लगातार बारिश होती रही, जिससे बचाने के लिए कृष्ण ने जी 7 दिन तक गोबर्धन पर्वत को को अपनी सबसे छोटी ऊँगली से उठाये रखा, उस दिन गोबर्धन पूजा की जाती है। गोपाष्टमी के दिन ही भगवान् इंद्र ने अपनी हार स्वीकार की थी, जिसके बाद श्रीकृष्ण ने गोबर्धन पर्वत नीचे रखा था। भगवान कृष्ण स्वयं गौ माता की सेवा करते हुए, गाय के महत्व को सभी के सामने रखा। गौ सेवा के कारण ही इंद्र ने उनका नाम गोविंद रखा था।

पौराणिक कथा 3: गोपाष्टमी ने जुड़ी एक बात और ये है कि राधा भी गाय को चराने के लिए वन में जाना चाहती थी, लेकिन लड़की होने की वजह से उन्हें इस बात के लिए कोई हाँ नहीं करता था। जिसके बाद राधा को एक तरकीब सूझी, उन्होंने ग्वाला जैसे कपड़े पहने और वन में श्रीकृष्ण के साथ गाय चराने चली गई।

English Version
First Katha: This was the day Nanda Maharaja sent his children Krishna and Balarama to herd the cows for the first time. On Gopashtami, cows and their calf are decorated and worshipped. The ritual of worshipping cows and calf is similar to Govatsa Dwadashi in Maharashtra.

Second Katha: According to Hindu mythology Lord Krishna suggested Braj people to stop annual offering made to God Indra. This angered Indra and he decided to flood Braj region. Lord Krishna lifted Gowardhan hill on His Knishtha on Gowardhan Puja day to save Braj people from fury of Indra. After seven days of unrelenting flooding of Braj region God Indra accepted his defeat on Gopashtami.

Third Katha: As Srimati Radharani and Her friends wanted to enjoy the fun, and because of Her resemblance to Subala-sakha, She put on his dhoti and garments and joined Krishna. The other gopis joined in too.

गोपाष्टमी पूजा विधि

  • सुबह ही गाय और उसके बछड़े को नहलाकर तैयार किया जाता है। उसका श्रृंगार किया जाता हैं, पैरों में घुंघरू बांधे जाते हैं,अन्य आभूषण पहनायें जाते हैं।
  • गौ माता के सींगो पर चुनड़ी का पट्टा बाधा जाता है
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करके गाय के चरण स्पर्श किये जाते हैं।
  • गाय माता की परिक्रमा भी की जाती हैं। सुबह गायों की परिक्रमा कर उन्हें चराने बाहर ले जाते है।
  • इस दिन ग्वालों को भी दान दिया जाता हैं। कई लोग इन्हें नये कपड़े दे कर तिलक लगाते हैं।
  • शाम को जब गाय घर लौटती है, तब फिर उनकी पूजा की जाती है, उन्हें अच्छा भोजन दिया जाता है। खासतौर पर इस दिन गाय को हरा चारा, हरा मटर एवं गुड़ खिलाया जाता हैं।
  • जिनके घरों में गाय नहीं होती है वे लोग गौ शाला जाकर गाय की पूजा करते है, उन्हें गंगा जल, फूल चढाते है, दिया जलाकर गुड़ खिलाते है। गौशाला में खाना और अन्य समान का दान भी करते है।
  • औरतें कृष जी की भी पूजा करती है, गाय को तिलक लगाती है। इस दिन भजन किये जाते हैं। कृष्ण पूजा भी की जाती हैं।

Information

Futures Dates
4 November 201922 November 202011 November 20211 November 2022
Frequency
Yearly / Annual
Duration
1
Begins (Tithi)
Kartik Shukla Ashtami
Ends (Tithi)
Kartik Shukla Ashtami
Months
October / November
Mantra
लक्ष्मीर्या लोकपालानां धेनुरूपेण संस्थिता। घृतं वहति यज्ञार्थ मम पापं व्यपोहतु॥
Celebrations
Gau Puja, Bhajan-Kirtan, Nach-Gane
Imp Places
Barsana, Mathura, Vrindavan, Braj Pradesh, Gaushala, Shri Krishna Mandir, Shrinathji Temple Nathdwara, ISKCON Temples
Past Dates
28 October 2017, 8 November 2016

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