मुख्य आकर्षण - Key Highlights |
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| ◉ दुनिया का पहला मंदिर जिसमें छह चेहरों वाला विशाल षणमुख गोपुरम है। |
| ◉ आध्यात्मिकता और आधुनिक इंजीनियरिंग का अनोखा वास्तुशिल्प संगम। |
| ◉ बेंगलुरु के सबसे प्रमुख मुरुगन मंदिरों में से एक। |
श्रृंगागिरी श्री षण्मुख स्वामी मंदिर, बेंगलुरु के राजराजेश्वरी नगर में स्थित एक अनोखा पहाड़ी मंदिर है जो भगवान षण्मुख यानि भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। यह भारत के सबसे खास मुरुगन मंदिरों में से एक है जो की अपने छह चेहरों वाले गोपुरम और क्रिस्टल गुंबद के लिए मशहूर है।
श्रृंगागिरी श्री षण्मुख स्वामी मंदिर में दर्शन का समय
मंदिर पूरे हफ़्ते खुला रहता है और दर्शन का समय सुबह 6:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक और शाम 4:30 बजे से रात 9:00 बजे तक है।
श्रृंगागिरी श्री षण्मुख स्वामी मंदिर के मुख्य त्योहार
स्कंद षष्ठी, थाईपुसम, कार्तिक दीपम, वैकासी विशाकम और मुरुगन से जुड़े अन्य उत्सव यहाँ के मुख्य त्योहार हैं।
श्रृंगगिरि श्री षण्मुख स्वामी मंदिर कैसे पहुँचें
यह मंदिर बेंगलुरु शहर से लगभग 13-14 किमी दूर श्रृंगगिरि पहाड़ी पर स्थित है। यह BEML लेआउट, 5वां स्टेज, राजराजेश्वरी नगर, बेंगलुरु, कर्नाटक के पास है। BMTC बसें नियमित रूप से मैजेस्टिक, K.R. मार्केट और बेंगलुरु के अन्य हिस्सों को राजराजेश्वरी नगर से जोड़ती हैं। सबसे पास का मुख्य रेलवे स्टेशन KSR बेंगलुरु सिटी रेलवे स्टेशन है। नम्मा मेट्रो की पर्पल लाइन से राजराजेश्वरी नगर मेट्रो स्टेशन के पास उतरें। सबसे पास का एयरपोर्ट केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है।
मंदिर में भक्त भगवान षण्मुख के सभी छह चेहरों के दर्शन कर सकते हैं, जो मुरुगन मंदिरों में बहुत कम देखने को मिलता है। गर्भगृह में मोर पर विराजमान मुरुगन की शानदार छह चेहरों वाली मूर्ति है। एक खास सन-ट्रैकिंग सिस्टम सूरज की रोशनी को सीधे देवता पर डालता है, जिससे दिन भर \"सूर्य किरण अभिषेक\" होता रहता है।
यह मंदिर श्रृंगेरी शारदा पीठम के श्री भारती तीर्थ महास्वामीजी के आशीर्वाद से बनाया गया था। मंदिर की परंपरा के अनुसार, भगवान षण्मुख ने इस बंजर पहाड़ी को अपना निवास स्थान चुना, जिससे इस मंदिर के निर्माण की प्रेरणा मिली। मंदिर का डिज़ाइन डॉ. आर. अरुणाचलम ने तैयार किया था।
यह मंदिर श्रृंगागिरी पहाड़ी पर ज़मीन से लगभग 240 फीट की ऊँचाई पर बना है। मंदिर की कुल ऊँचाई लगभग 123 फीट है। इसमें 62 फीट का गोपुरम है जिस पर भगवान षण्मुख के छह चेहरे उकेरे गए हैं। मंदिर के शिखर पर 42 फीट का क्रिस्टल गुंबद है, जिसमें हज़ारों क्रिस्टल जड़े हुए हैं; ये दिन में इंद्रधनुष जैसी चमक और रात में रोशनी के स्वरूप बनाते हैं। पूरा ढांचा तारे के आकार का है, जो \"षण्मुख\" (छह चेहरों वाले देवता) के अर्थ से प्रेरित है। मंदिर परिसर में भगवान गणेश और भगवान शिव को समर्पित कई मूर्तियाँ और मंदिर भी हैं।
6:30 AM - 9 PM
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