नवरात्रि विशेष 2026 - Navratri Specials 2026
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

त्रिलोकनाथ मंदिर, टुंडे - Triloknath Mandir, Tunde

मुख्य आकर्षण - Key Highlights

◉ लाहौल के बौद्ध धार्मिक परिवेश में त्रिलोकनाथ का एक महत्वपूर्ण स्थान है।
◉ यह हिमालय के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास के जीवंत प्रतीक के रूप में खड़ा है।
◉ मूल रूप से टुंडा विहार के नाम से जाने जाने वाले इस स्थान की स्थापना गुरु पद्मसंभव ने किया था।

त्रिलोकनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के अंतर्गत उदयपुर तहसील के टुंडे गाँव में स्थित एक बहुत पुराना और पवित्र मंदिर है। टुंडे गाँव को मंदिर की प्रसिद्धी के कारण अब त्रिलोकनाथ ही कहा जाने लगा है। यह मंदिर हिंदुओं और बौद्धों, दोनों के लिए बहुत आध्यात्मिक महत्व रखता है, जिससे यह हिमालयी क्षेत्र में साझा आस्था का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया है। त्रिलोकनाथ मंदिर भगवान त्रिलोकनाथ को समर्पित है, जिसका अर्थ है `तीनों लोकों के स्वामी`। यह मंदिर हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और अन्य हिमालयी क्षेत्रों के भक्तों के लिए तीर्थयात्रा का एक महत्वपूर्ण स्थान है। मंदिर के गर्भगृह में फोटोग्राफी के लिए मनाही है, लेकिन मंदिर परिसर में फोटोग्राफी की जासकती है।

त्रिलोकीनाथ मंदिर, टुंडे दर्शन का समय
मंदिर पूरे हफ़्ते खुला रहता है और दर्शन का समय सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक है।

प्रचलित नाम: टुंडा विहार

समय - Timings

दर्शन समय
6 AM - 8 PM
त्योहार
Pauri Fair, Fagli, Halda | यह भी जानें: एकादशी

त्रिलोकनाथ मंदिर, टुंडे: विस्तृत इतिहास और कथाएँ

त्रिलोकनाथ मंदिर में भगवान शिव की पूजा की जाती है, जबकि बौद्ध इन्हें अवलोकितेश्वर (चेनरेज़िग) के रूप में मानते हैं, जो करुणा के बोधिसत्व हैं। यह हिमालयी नज़ारों के बीच खूबसूरत चिनाब घाटी में स्थित है। यह मंदिर हिंदू और बौद्ध परंपराओं के मेल के लिए जाना जाता है। मंदिर का निर्माण 9वीं सदी के आखिर या 10वीं सदी की शुरुआत में हुआ था।

त्रिलोकनाथ मंदिर, जिसे ऐतिहासिक रूप से 'टुंडा विहार' के नाम से भी जाना जाता है। हिमाचल पर्यटन विभाग के आधिकारिक विवरणों में छह भुजाओं वाली पवित्र मूर्ति का ज़िक्र है और इस मंदिर का अवलोकितेश्वर से खास संबंध बताया गया है। एक अन्य आधिकारिक मान्यता के अनुसार, इस मूर्ति की स्थापना गुरु पद्मसंभव ने की थी, जो हिमालयी बौद्ध धर्म में अत्यंत सम्मानित हस्ती हैं।

यहाँ की सबसे दिलचस्प स्थानीय कथाओं में से एक देवता के चमत्कारी रूप से प्रकट होने से जुड़ी है। कभी मौजूदा 'हिंसा नाला' के पास एक झील हुआ करती थी। यह झील किसी रहस्यमयी पवित्र शक्ति से जुड़ी थी और तिब्बती परंपरा में इसे 'ओमे-चो' कहा जाता था, जिसका अर्थ है \"दूधिया सागर\"।

कथा के अनुसार, झील से सात रहस्यमयी जीव निकले और पास में चर रही गायों का दूध पी गए। एक दिन, टुंडू नाम के एक स्थानीय चरवाहे लड़के ने उनमें से एक जीव को पकड़ लिया और उसे गाँव की ओर ले जाने लगा। कहा जाता है कि पकड़ा गया वह जीव चमत्कारिक रूप से देवता की संगमरमर की मूर्ति में बदल गया, जिसे बाद में त्रिलोकनाथ मंदिर में स्थापित किया गया और पूजा जाने लगा।

एक और प्रचलित कथा के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण एक अलौकिक शक्ति ने किया था, जिसे स्थानीय लोग 'महादानव' या एक शक्तिशाली राक्षस के रूप में जानते हैं। यह मंदिर एक ही रात में उस अलौकिक शक्ति की मदद से बनकर तैयार हो गया था। हिमालय की पवित्र परंपराओं में ऐसी कहानियाँ आम हैं, जहाँ पुराने मंदिरों का संबंध अक्सर अलौकिक निर्माण करने वालों, दैवीय शक्तियों या चमत्कारी घटनाओं से जोड़ा जाता है।

त्रिलोकीनाथ मंदिर, टुंडे के प्रमुख त्यौहार

अगस्त माह का पोड़ी मेला (त्रिलोकनाथ मेला) इस मंदिर का महत्वपूर्ण वार्षिक धार्मिक उत्सव है। इस त्योहार के दौरान, स्थानीय परंपराओं में त्रिलोकीनाथ के पवित्र घोड़े से जुड़ी एक औपचारिक शोभायात्रा शामिल होती है, और श्रद्धालु पवित्र जल और आस-पास के इलाकों से जुड़ी रस्मों में हिस्सा लेते हैं। यह हर साल अगस्त में आयोजित किया जाता है, साथ ही फरवरी में 'हल्दा' और मार्च में 'फागली' जैसे क्षेत्रीय उत्सव भी मनाए जाते हैं। हिंदू और बौद्ध दोनों परंपराओं को मानने वाले लोग इन समारोहों में भाग लेते हैं, जिससे आस्था के साझा केंद्र के रूप में मंदिर की पहचान और मज़बूत होती है।

त्रिलोकीनाथ मंदिर, टुंडे कैसे पहुँचें

त्रिलोकीनाथ मंदिर हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति ज़िले के उदयपुर सब-डिविजन में त्रिलोकीनाथ गाँव में स्थित है, जिसे ऐतिहासिक रूप से टुंडा विहार के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर तक मनाली, केलंग और उदयपुर जैसे प्रमुख केंद्रों से सड़क मार्ग द्वारा पहुँचा जा सकता है। पठानकोट जंक्शन सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है। सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट कुल्लू के पास भुंतर एयरपोर्ट है, जो त्रिलोकनाथ मंदिर से लगभग 218 किमी दूर है। भुंतर से यात्री मनाली की ओर जा सकते हैं और फिर सड़क मार्ग से लाहौल क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।

Triloknath Mandir, Tunde in English

The Triloknath Temple is a very ancient and sacred temple located in the village of Tunde in the Lahaul region of Himachal Pradesh. It holds great spiritual significance for both Hindus and Buddhists, making it a vital symbol of shared faith in the Himalayan region.

फोटो प्रदर्शनी - Photo Gallery

Photo in Full View
Shiv Pariwar

Shiv Pariwar

जानकारियां - Information

मंत्र / प्रचलित जयकारा
ओम नम शिवाय
बुनियादी सेवाएं
पेयजल, प्रसाद, सीसीटीवी सुरक्षा, जूता स्टोर, पार्किंग स्थल
धर्मार्थ सेवाएं
Restaurants
स्थापना
9th century
समर्पित
भगवान शिव
वास्तुकला
हिमालयी लकड़ी का पैगोडा स्टाइल

क्रमवद्ध - Timeline

6 AM - 8 PM

कैसे पहुचें - How To Reach

पता 📧
Trilokinath Udaipur Himachal Pradesh
सड़क/मार्ग 🚗
Trilokinath Road
रेलवे 🚉
Pathankot Junction
हवा मार्ग ✈
Bhuntar Airport near Kull
नदी ⛵
Chenab
सोशल मीडिया
Download App
निर्देशांक 🌐
32.6646853°N, 76.6695806°E
त्रिलोकनाथ मंदिर, टुंडे गूगल के मानचित्र पर
http://www.bhaktibharat.com/mandir/trilokinath-mandir-tunde

अगला मंदिर दर्शन - Next Darshan

अपने विचार यहाँ लिखें - Write Your Comment

अगर आपको यह मंदिर पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस मंदिर को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Navratri Specials 2026 - Navratri Specials 2026
Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Bhakti Bharat APP