करोड़ों की दौड़ खोया हुआ सुकून - प्रेरक कहानी
दिल्ली के एक छोटे से मोहल्ले में सोहन नाम का एक युवक रहता था। उसके पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे..
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शनिवार की रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे जय कार्यालय से घर लौट रहा था। कुछ दूर जाने पर उसे सड़क किनारे एक युवती दिखाई दी..
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सिद्धियों का उचित प्रयोग ही करें - प्रेरक कहानी
चार विद्वान ब्राह्मण मित्र थे। एक दिन चारों ने संपूर्ण देश का भ्रमण कर हर प्रकार का ज्ञान अर्जित करने का निश्चय किया।...
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जीवन का, जीवन बीमा - प्रेरक कहानी
दो मित्र थे, बड़े परिश्रमी और मेहनती। अपने परिश्रम से दोनों एक दिन बड़े सेठ बन गए। दोनों ने बड़ा व्यवसाय खड़ा कर लिया। पहले सेठ ने अपनी सारी संपत्ति का बीमा करवा लिया।...
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दो बहते पत्तों की कहानी - प्रेरक कहानी
एक समय की बात है, गंगा नदी के किनारे पीपल का एक पेड़ था। पहाड़ों से उतरती गंगा पूरे वेग से बह रही थी कि अचानक पेड़ से दो पत्ते नदी में आ गिरे।
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मृत्यु एक अटल सत्य हैं - प्रेरक कहानी
कृष्ण ने कहा: तुम्हे! किसी एक घर से मुट्ठी भर ज्वार लानी होगी और ध्यान रखना होगा कि उस परिवार में कभी किसी की मृत्यु न हुई हो..
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एक छोटी सी अच्छी आदत - प्रेरक कहानी
पुराने समय में दो दोस्त थे। बचपन में दोनों साथ पढ़ते और खेलते थे। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों दोस्त अपने अपने जीवन में व्यस्त हो गए।
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ग्राम देवता की सीख का फल - प्रेरक कहानी
उन्हीं के संस्कारों का परिणाम ये हुआ कि आज कई पीढ़ियों के बाद भी उनका परिवार धर्म की राह पर चलता हुआ फल-फूल रहा है।..
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कहीं बारिश हो गयी तो - प्रेरक कहानी
कहीं बारिश हो गयी तो! बारिश की एक बूँद तक नहीं गिरी थी। सभी बड़े परेशान थे। हरिया भी अपने बीवी-बच्चों के साथ जैसे-तैसे समय काट रहा था। ईश्वर में विश्वास रखें
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मेरे पास भगवान का विज़िटिंग कार्ड है - प्रेरक कहानी
रात के एक बजा था, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी, वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था, पर चैन नहीं पड़ रहा था...
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जब अर्जुन का घमंड चूर-चूर हुआ - प्रेरक कहानी
एक दिन श्रीकृष्ण, अर्जुन साथ घूम रहे थे। रास्ते में उनकी मुलाकात एक गरीब ब्राह्मण से हुई। उसका व्यवहार थोड़ा विचित्र था। वह सूखी घास खा रहा था और उसकी कमर से तलवार लटक रही थी।
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जैसी संगत वैसी रंगत - प्रेरक कहानी
स्वार्थी या संग करोगे, स्वार्थी बन जाओगे। दानी का संग करोगे, दानी बन जाओगे। संतो, भक्तो का संग करोगे, तो प्रभु से प्रेम..
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कर्म का भोग कैसे भोगते हैं? - प्रेरक कहानी
एक गाँव में एक किसान रहता था उसके परिवार में उसकी पत्नी और एक लड़का था। कुछ सालों के बाद पत्नी की मृत्यु हो गई..
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रामायण से, श्री कृष्ण के पंख की कहानी
वनवास के दौरान माता सीताजी को प्यास लगी, तभी श्रीरामजी ने चारों ओर देखा, तो उनको दूर-दूर तक जंगल ही जंगल दिख रहा था। कुदरत से प्रार्थना की, हे वन देवता..
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कर्मानुसार सुख एवं दुःख का भोग - प्रेरक कहानी
प्रभु मैंने पृथ्वी पर देखा है कि जो व्यक्ति पहले से ही अपने प्रारब्ध से दुःखी है आप उसे और ज्यादा दुःख प्रदान करते हैं, और जो सुख में हैं आप उसे दुःख नहीं देते है।
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