गणेशोत्सव - Ganeshotsav
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

कुछ अच्छाइयां.. ऐसी भी.. जिनका कोई और साक्षी ना हो - प्रेरक कहानी (Kuchh Acchaiyan.. Aisi Bhi.. Jinaka Koi Aur Aakshi Na Ho)


Add To Favorites Change Font Size
मैं पैदल घर आ रहा था। रास्ते में एक बिजली के खंभे पर एक कागज लगा हुआ था। पास जाकर देखा, लिखा था:
कृपया पढ़ें...
इस रास्ते पर मैंने कल एक 50 का नोट गंवा दिया है। मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता। जिसे भी मिले कृपया इस पते पर दे सकते हैं।
यह पढ़कर पता नहीं क्यों उस पते पर जाने की इच्छा हुई। पता याद रखा, यह उस गली के आखिरी में एक घर था। वहाँ जाकर आवाज लगाया तो एक वृद्धा लाठी के सहारे धीरे-धीरे बाहर आईं। मुझे मालूम हुआ कि वह अकेली रहती हैं। उन्हें ठीक से दिखाई नहीं देता।

माँ जी, मैंने कहा: आपका खोया हुआ 50 मुझे मिला है उसे देने आया हूँ।

यह सुन वह वृद्धा रोने लगी।

बेटा, अभी तक करीब 50-60 व्यक्ति मुझे 50-50 दे चुके हैं। मै पढ़ी-लिखी नहीं हूँ। ठीक से दिखाई नहीं देता। पता नहीं कौन मेरी इस हालत को देख मेरी मदद करने के उद्देश्य से लिख गया है।

बहुत ही कहने पर माँ जी ने पैसे तो रख लिए। पर एक विनती की: बेटा, वह मैंने नहीं लिखा है। किसी ने मुझ पर तरस खाकर लिखा होगा। जाते-जाते उसे फाड़कर फेंक देना बेटा।

मैनें हाँ कहकर टाल तो दिया पर मेरी अंतरात्मा ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि उन 50-60 लोगों से भी माँ ने यही कहा होगा। किसी ने भी नहीं फाड़ा। जिंदगी मे हम कितने सही और कितने गलत है, ये सिर्फ दो ही शक्स जानते है..

परमात्मा और अपनी अंतरआत्मा..!! मेरा हृदय उस व्यक्ति के प्रति कृतज्ञता से भर गया। जिसने इस वृद्धा की सेवा का उपाय ढूँढा। सहायता के तो बहुत से मार्ग हैं, पर इस तरह की सेवा मेरे हृदय को छू गई। और मैंने भी उस कागज को फाड़ा नहीं। मदद के तरीके कई हैं, सिर्फ कर्म करने की तीव्र इच्छा मन मॆ होनी चाहिए।

कुछ अच्छाइयां.. अपने जीवन में ऐसी भी करनी चाहिए, जिनका ईश्वर के सिवाय.. कोई और साक्षी ना हो...!!
यह भी जानें

Prerak-kahani Budhi Mai Prerak-kahaniGareev Budhiya Prerak-kahani50 Rupaye Prerak-kahaniAnpadh Amma Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

श्री गणेश एवं बुढ़िया माई की कहानी

एक बुढ़िया माई थी। मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। रोज बनाए रोज गल जाए। एक सेठ का मकान बन रहा था..

गणेश चतुर्थी कथा

पक्षी बहुत दुःखी हुआ और उसने प्रतिज्ञा की कि मैं समुद्र के जल को समाप्त कर दूंगी और अपने चोंच में सागर के जल को भर भर कर फेंकने लगी ऐसा..

दद्दा की डेढ़ टिकट - प्रेरक कहानी

एक देहाती बुजुर्ग ने चढ़ने के लिए हाथ बढ़ाया। एक ही हाथ से सहारा ले डगमगाते कदमों से वे बस में चढ़े, क्योंकि दूसरे हाथ में थी भगवान गणेश की एक अत्यंत मनोहर बालमूर्ति थी।

गणेश विनायक जी की कथा - प्रेरक कहानी

एक गाँव में माँ-बेटी रहती थीं। एक दिन वह अपनी माँ से कहने लगी कि गाँव के सब लोग गणेश मेला देखने जा रहे हैं..

जब भगवान ने मुझे गोदी में बिठाया - प्रेरक कहानी

जन्म से ठीक पहले एक बालक भगवान से कहता है- प्रभु आप मुझे नया जन्म मत दीजिये, मुझे पता है पृथ्वी पर बहुत बुरे लोग रहते है

तुलसीदास जी द्वारा श्रीराम के दर्शन का उपाय - सत्य कथा

साक्षात् भगवान् श्रीराम के दर्शन करने का उपाय | उसके लिए प्रेम और भाव चाहिए, संत की कृपा चाहिए | वह व्यक्ति तुरंत पेड़ पर चढ़कर त्रिशूलपर कूद पडा..

परमात्मा या भौतिक सांसारिक प्राप्ति? - प्रेरक कहानी

भगवन् मेरे पास आपका दिया सब कुछ है। फिर भी मेरी एक ईच्छा हॆ कि जैसे आपने मुझे दर्शन देकर धन्य किया, वैसे ही मेरी सारी प्रजा को भी दर्शन दीजिये।...

Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Bhakti Bharat APP