ह्रदय से जो जाओगे सबल समझूंगा तोहे: सूरदास जी की सत्य कथा
हाथ छुड़ाए जात हो, निवल जान के मोये । मन से जब तुम जाओगे, तब प्रवल माने हौ तोये । - सूरदास जी
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वृंदावन के वृक्ष को मर्म न जाने कोय - प्रेरक कहानी
क्येांकि संत को वो वृदांवन दिखता है जो साक्षात गौलोंक धाम का खंड है। हमें साधारण वृदांवन दिखता है।...
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बुरी आदतें बाद मे और बड़ी हो जाती हैं - प्रेरक कहानी
उन्ही दिनों एक महात्मा गाँव में पधारे हुए थे, जब आदमी को उनकी ख्याति के बारे में पता चला तो वह तुरंत उनके पास पहुँचा और अपनी समस्या बताने लगा।...
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पाप का गुरु कौन? - प्रेरक कहानी
पंडित जी कई वर्षों तक काशी में शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद अपने गांव लौटे। गांव के एक किसान ने उनसे पूछा, आप हमें यह बताइए कि पाप का गुरु कौन है?...
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ईश्वर के न्याय का भिन्न दृष्टिकोण - प्रेरक कहानी
एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे। वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे। 8 (3+5) रोटी तीन आदमियों में कैसे बांट पाएंगे?...
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अपनी गठरी टटोलें - प्रेरक कहानी
पहला यात्री बोला: महोदय मैं एक नामी ठग हूँ परन्तु आप तो महाठग हैं। आप मेरे भी गुरू निकले। दूसरे यात्री बोला: कैसे?
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एक दिन का पुण्य ही क्यूँ? - प्रेरक कहानी
तुम्हारे बाप के नौकर बैठे हैं क्या हम यहां, पहले पैसे, अब पानी, थोड़ी देर में रोटी मांगेगा, चल भाग यहाँ से।
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बुरी परिस्थिति में भी अपनी उम्मीद ना छोड़े - प्रेरक कहानी
एक बार एक व्यक्ति रेगिस्तान में कहीं भटक गया। उसके पास खाने-पीने की जो थोड़ी बहुत चीजें थीं, वो जल्द ही ख़त्म हो गयीं थीं। पिछले दो दिनों से वह पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहा था।
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कर्म कैसे फल देता है? - प्रेरक कहानी
ज्योतिष कहता है कि मनुष्य अपने ही कर्मो का फल पाता है। कर्म कैसे फल देता है? यह इस प्रसंग से समझे..
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परहित ही सबसे बड़ा धर्म है - प्रेरक कहानी
एक बार भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन भ्रमण के लिए कहीं निकले थे तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राह्मण को भिक्षा मांगते देखा तो अर्जुन को उस पर दया आ गयी
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जहां खतरा है, वहां खतरा नहीं होता - प्रेरक कहानी
कोई दस फ़ीट नीचे रह गया होगा वह लड़का, तब वह बूढा खडा हुआ और चिल्लाया, सावधान! बेटे सावधान होकर उतरना, होश से उतरना!...
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पीपल एवं पथवारी की कथा - प्रेरक कहानी
एक बुढ़िया थी। उसने अपनी बहू से कहा तू दूध दही बेच के आ। वह बेचने गई तो रास्ते में औरतें पीपल पथवारी सींच रहीं थीं..
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प्रेरक कहानी: जब पंडित जी नदी मे बह गए..
अनपढ़ नाविक क्या कहे, उसने इशारे में ना कहा, तब पंडित जी मुस्कुराते हुए बोले तुम्हारी तो पौनी जिंदगी पानी में गई।...
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माइक आगे होता है, और मुख पीछे - प्रेरक कहानी
गुरु शिष्यों में युगों युगों से यही रहस्यमयी लीला होती आ रही है। अपने गुरु पर पूर्ण विश्वास रखे वे सदैव हमारे साथ है।..
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भगवान् का विनिमय प्रस्ताव - प्रेरक कहानी
एक बार एक दुःखी भक्त अपने ईश्वर से शिकायत कर रहा था। आप मेरा ख्याल नहीं रखते, मैं आपका इतना बड़ा भक्त हूँ। आपकी सेवा करता हूँ, रात-दिन आपका स्मरण करता हूँ..
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