Haanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

जब वैश्या ने कबीरदास जी की झोपड़ी में लगाई आग - प्रेरक प्रसंग (Jab Vaishya Ne Kabir Das Ki Jhaupadi Me Lagai Aag)


Add To Favorites Change Font Size
सतगुरु कबीरदास जी की कुटिया के पास एक वैश्या ने अपना कोठा बना लिया, एक ओर तो कबीरदास जी जो दिन भर मालिक के नाम कीर्तन करते और दूसरी और वैश्या जिसके घर में नाच गाना होता रहता, एक दिन कबीरजी उस वैश्या के यहाँ गए और कहा कि, देख बहन, तुमारे यहाँ बहुत खराब लोग आते है, तो तुम कहीं और जाकर रह सकती हो?
संत की बात सुनकर वैश्या भड़क गयी और कहा की :- 'अरे फ़कीर तू मुझे यहाँ से भगाना चाहता है, कही जाना है तो तु जा कर रह, पर मैं यहाँ से कही जाने वाली नही हूँ, तो ये सुनकर कबीरजी ने कहा:- 'ठीक है जैसी तेरी मर्जी, 'कबीरदास जी अपनी कुटिया में वापिस आ गए और फिर से अपने भजन कीर्तन में लग गये, जब कबीरजी के कानों में उस वैश्या के घुघरू की झंकार और कोठे पर आये लोगो के गंदे-गंदे शब्द सुनाई पड़ते तो कबीर जी अपने भजन-कीर्तन को और जोर-जोर से करने लग जाते, तो कबीर जी के कीर्तन का ऐसा प्रभाव हुआ जो लोग वैश्या के कोठे पर आते जाते थे वो अब कबीर जी के पास बैठकर सत्संग सुनते और कीर्तन करते, वैश्या ने देखा की ये फ़कीर तो जादूगर है इसने मेरा सारा धंधा चौपट कर दिया, अब तो वे सब लोग उस फ़कीर के साथ ही भजन की महफ़िल में बैठे है, वैश्या ने क्रोधित हो कर अपने यारो से कहा की तुम इस फ़कीर जादूगर की कुटिया जला दो ताकि ये यहाँ से चला जाये, तो वैश्या के आदेश पर उनके यारों ने संत कबीर जी की कुटियां में आग लगा दी, कुटिया को जलता देख संत कबीरदास बोले : वाह, मेरे मालिक अब तो तू भी यही चाहता है कि मैं ही यहाँ से चला जाऊं और संत कबीर जी कहने लगे प्रभु अब आपका आदेश है तो जाना ही पड़ेगा, साध संगत जी संत कबीर जी वह जगह छोड़कर जाने ही वाले थे की मालिक से अपने भक्त का अपमान देखा नहीं गया, उसी समय मालिक ने ऐसी तूफानी सी हवा चलायी कि कबीर जी कि कुटिया कि आग तो बुझ गयी लेकिन उस वैश्या के कोठे ने आग पकड़ ली, वैश्या के देखते ही देखते उसका कोठा जलने लगा, वो चीखती-चिल्लाती हुए कबीर जी के पास आकर कहने लगी :- 'अरे कबीर जादूगर देख-देख मेरा सुन्दर कोठा जल रहा है मेरे सुंदर परदे जल रहे है, वे लहरातेहुए झूमर टूट रहे है, अरे जादूगर तू कुछ करता क्यों नही, साध संगत जी कबीर जी को जब अपनी झोपडी कि फिकर नही थी तो किसी के कोठे से उनको क्या लेनादेना, कबीर जी खड़े-खड़े हंसने लगे, कबीर जी कि हंसी देख वैश्या क्रोधित होकर बोली अरे देखो-देखो यारों इस जादूगर ने मेरे कोठे में आग लगा दी और कहने लगी अरे देख कबीर जिसमे तूने आग लगायी वो कोठा मेने अपना तन-मन , और अपनी इज्ज्त बेचकर बनाया था और तूने मेरे जीवन भर की कमाई, पूंजी को नष्ट कर दिया तो ये सुनकर कबीर जी मुस्कुरा कर बोले कि :- 'देख बहन तू फिर से गलती कर रही है और कबीरदास जी कहते है कि :-“ना तूने आग लगाई ना मैंने आग लगाई, ये तो यारों ने अपनी-अपनी यारी निभायी, तेरे यारो ने तेरी यारी निभायी तो मेरा भी तो यार बैठा है, मेरा भी तो चाहने वाला है, जब तेरे यार तेरी वफ़ादारी कर सकते है तो क्या मेरा यार तेरे यारों से कमजोर है ? तो ये सुनकर ”वैश्या समझ गयी कि “मेरे यार खाख बराबर, कबीर के यार सिर ताज बराबर” उस वैश्या को बड़ी ग्लानि हुई कि मैं मंद बुद्धि एक हरी भक्त का अपमान कर बैठी, उसके बाद वैश्या ने सब गलत काम छोड़ दिए और संत कबीर जी की शरण ग्रहण कर मालिक के भजन कीर्तन में लग गई, साध संगत जी मालिक अपने भक्तों के मान की रक्षा के लिए बहुत सुन्दर लीलाएं रचता है और अपने भक्त का मान कभी घटने नही देता, साध संगत जी इस साखी से हमें भी यही प्रेरणा मिलती है कि संतों की शरण में जाने से हमारे सभी दुख दूर हो जाते हैं हमारे जन्मों-जन्मों के पाप मिट जाते हैं क्योंकि संत सतनाम समुंदर की अंश होते हैं उनकी एक नज़र से ही लाखों-करोड़ों जीवों का उद्धार हो जाता है ।

तेरे यारों ने मेरी झोपड़ी में लगाई आग
अब मेरे यार के भी जरा दिल के अरमान निकलने दो
यह भी जानें

Prerak-kahani Registan Prerak-kahaniDesert Prerak-kahaniGod Prerak-kahaniThanks Good Prerak-kahaniBhagwan Prerak-kahaniJhonpadi Prerak-kahaniHut Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

कर्म कैसे फल देता है? - प्रेरक कहानी

ज्योतिष कहता है कि मनुष्य अपने ही कर्मो का फल पाता है। कर्म कैसे फल देता है? यह इस प्रसंग से समझे..

परहित ही सबसे बड़ा धर्म है - प्रेरक कहानी

एक बार भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन भ्रमण के लिए कहीं निकले थे तो उन्होंने मार्ग में एक निर्धन ब्राह्मण को भिक्षा मांगते देखा तो अर्जुन को उस पर दया आ गयी

जहां खतरा है, वहां खतरा नहीं होता - प्रेरक कहानी

कोई दस फ़ीट नीचे रह गया होगा वह लड़का, तब वह बूढा खडा हुआ और चिल्लाया, सावधान! बेटे सावधान होकर उतरना, होश से उतरना!...

पीपल एवं पथवारी की कथा - प्रेरक कहानी

एक बुढ़िया थी। उसने अपनी बहू से कहा तू दूध दही बेच के आ। वह बेचने गई तो रास्ते में औरतें पीपल पथवारी सींच रहीं थीं..

प्रेरक कहानी: जब पंडित जी नदी मे बह गए..

अनपढ़ नाविक क्या कहे, उसने इशारे में ना कहा, तब पंडित जी मुस्कुराते हुए बोले तुम्हारी तो पौनी जिंदगी पानी में गई।...

गरीब विद्वान व राजा भोज, बने भाई-भाई - प्रेरक कहानी

राजन्, जब तक आपकी मौसी जीवित थीं, आपके दर्शन नहीं हुए थे। अब आपके दर्शन हुए तो आपकी मौसी स्वर्ग सिधार गईं। इस उत्तर से भोज को और भी प्रसन्नता हुई।

माइक आगे होता है, और मुख पीछे - प्रेरक कहानी

गुरु शिष्यों में युगों युगों से यही रहस्यमयी लीला होती आ रही है। अपने गुरु पर पूर्ण विश्वास रखे वे सदैव हमारे साथ है।..

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP