गणेशोत्सव - Ganeshotsav
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

श्री रुक्मणी मंदिर प्रादुर्भाव पौराणिक कथा (Rukmani Mandir Pauranik Katha)


श्री रुक्मणी मंदिर प्रादुर्भाव पौराणिक कथा
Add To Favorites Change Font Size
यदु वंशी श्रीकृष्ण दुर्वासा ऋषि को अपना कुलगुरु मानते थे। जब श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह हुआ तो वे अशीर्वाद प्राप्ति के लिए दुर्वासा ऋषि से मिलने के लिए उनके आश्रम पधारे, जो द्वारका से दूरी पर स्थित था।
श्री कृष्ण ने ऋषि दुर्वासा को महल आने का निमंत्रण दिया, जिसे दुर्वासा ऋषि ने स्वीकार तो किया लेकिन एक शर्त पर?
ऋषि दुर्वासा ने कहा: आप दोनों जिस रथ से आए हैं मैं उस रथ पर नहीं जाऊंगा, मेरे लिए एक अलग रथ मंगवाइए।
भगवान कृष्ण ने ऋषि दुर्वासा की बात सहर्ष स्वीकार की, उन्होंने रथ के घोड़े निकलवा दिए और रुक्मिणी के साथ स्वयं रथ खींचने में जुत गए।

लंबी दूरी तय करने के बाद रुक्मिणी को प्यास सताने लगी। भगवान ने रुक्मिणी को धैर्य रखने के लिए कहा और बोले कि कुछ दूर और रथ को खींच लो इसके बाद महल आ जाएगा। लेकिन रुक्मिणी का गला सूखने लगा और वे परेशान होने लगीं श्रीकृष्ण ने अपने पैरा का अंगूठा जमीन पर मारा और वहाँ से पानी की धार निकलकर आ गई। जिससे दोनों ने प्यास तो बुझा ली, लेकिन जल के लिए दुर्वासा ऋषि से नहीं पूछा, जिससे वे क्रोधित हो गए।

क्रोध में दुर्वासा ऋषि ने भगवान कृष्ण और देवी रुक्मणी को दो श्राप दिए।
पहला श्राप: भगवान और देवी रुक्मणी का 12 साल का वियोग होगा।
दूसरा श्राप: द्वारका की भूमि का पानी खारा हो जाएगा।

जिस स्थान पर 12 वर्ष रहने के दौरान रुक्मिणी ने भगवान विष्णु जी की तपस्या की थी आज वहीं उनका रुक्मणी देवी मंदिर स्थित है। दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण यहाँ जल का दान किया जाता है। मान्यता है कि यहाँ प्रसाद के रुप में जल दान करने से भक्तों की 71 पीढ़ियों का तर्पण का पुण्य प्राप्त हो जाता है।
यह भी जानें

Katha Vishnu Bhagwan KathaRukmani Mandir KathaPauranik KathaRukmani KathaDurwasa KathaDurwasa Rishi KathaDwarka Katha

अगर आपको यह कथाएँ पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस कथाएँ को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

कथाएँ ›

वामन अवतार पौराणिक कथा

श्री विष्णु नरसिंह अवतार पौराणिक कथा: पौराणिक कथा के अनुसार, हिरण्यकश्यप को ब्रह्माजी से वरदान प्राप्त था कि वह न तो किसी मनुष्य द्वारा मारा जा सके न ही किसी पशु द्वारा।

गुरु प्रदोष व्रत कथा

जो प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है वो गुरु प्रदोष व्रत कहलाता है। गुरुवार प्रदोष व्रत रखने से भक्तों को अपने पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है। एक बार इन्द्र और वृत्रासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ।..

आश्विन संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा

आश्विन मास की संकष्टी चतुर्थी को श्रीकृष्ण तथा बाणासुर की इस कथा के अनुसार एक समय की बात है बाणासुर की कन्या उषा ने सुषुप्तावस्था में अनिरुद्ध का स्वप्न देखा..

इंदिरा एकादशी व्रत कथा

आश्विन कृष्ण एकादशी का नाम इंदिरा एकादशी है। यह एकादशी पापों को नष्ट करने वाली तथा पितरों को अ‍धोगति से मुक्ति देने वाली होती है।

पार्श्व / परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा

युधिष्ठिर ने कहा हे भगवान! आपने भाद्रपद कृष्ण एकादशी अर्थात अजा एकादशी का सविस्तार वर्णन सुनाया। अब आप कृपा करके मुझे भाद्रपद शुक्ल एकादशी का क्या नाम, इसकी विधि तथा इसका माहात्म्य कहिए।

मंगलवार व्रत कथा

सर्वसुख, राजसम्मान तथा पुत्र-प्राप्ति के लिए मंगलवार व्रत रखना शुभ माना जाता है। पढ़े हनुमान जी से जुड़ी मंगलवार व्रत कथा...

तेजादशमी कथा

वीर तेजाजी लोकदेवता, कृषि कार्यो के उपकारक देवता, प्रणवीर, युद्धवीर, सत्यवीर, परमार्थी, वीर शिरोमणि थे।

Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Bhakti Bharat APP